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 मध्यप्रदेश में कोविड काल के अस्थायी स्वास्थ्य योद्धाओं की पुनर्नियुक्ति की मांग  

Chhindwara 06 June 2025
छिंदवाड़ा यशो:- कोविड-19 महामारी के दौरान मध्यप्रदेश में चिकित्सा संकट को दूर करने के लिए नियुक्त किए गए आयुष चिकित्सक, दंत चिकित्सक, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, साइंटिस्ट सहित अन्य पैरामेडिकल कर्मियों ने संविदा नियुक्ति की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से पुन: न्याय की गुहार लगाई है। कोविड-19 की भयावह लहर के समय प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आदेश क्रमांक एनएचएम/एचआर/सेल-1/2020/5883 दिनांक 23 मार्च 2020 के तहत मेरिट के आधार पर अस्थाई नियुक्तियां की थीं। दो वर्षों तक सेवा देने के पश्चात, दिनांक 28 मार्च 2022 के आदेश क्रमांक एनएचएम/एचआर/सेल-1/2022/14506 के माध्यम से बजट का हवाला देते हुए सभी अस्थाई कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।अब यह समूचा प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल, जिसमें लगभग 4000 से अधिक युवा स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं, पिछले दो वर्षों से बेरोजगार हैं। इन लोगों ने कोविड के कठिन समय में जनसेवा की, जान जोखिम में डालकर मरीजों की जानें बचाईं, लेकिन आज वे नौकरी से वंचित हैं।

अन्य राज्यों की पहल

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों ने कोविड के अस्थायी स्वास्थ्य कर्मियों को संविदा पर पुनर्नियुक्त कर मानवता का परिचय दिया है। ऐसे में मध्यप्रदेश सरकार पर भी इन कोरोना योद्धाओं को पुन: अवसर देने का दबाव बढ़ रहा है।राज्य सरकार से अनुरोध कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ, मध्यप्रदेश  के प्रदेश सहसचिव डॉ. प्रशांत मेश्राम, डॉ. सर्वेश नागर, शैलेन्द्र शुक्ला एवं ओमकार पटेल द्वारा कलेक्टर महोदय को सौंपे गए ज्ञापन में यह स्पष्ट मांग रखी गई है कि प्रदेश में खाली पड़े चिकित्सा पदों पर इन अनुभवी चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को संविदा नियुक्ति दी जाए।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा को मिलेगा लाभ

संघ का तर्क है कि यदि इन प्रशिक्षित योद्धाओं की पुनर्नियुक्ति की जाती है, तो इससे ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी और आमजन को भी राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह निर्णय सरकार की संवेदनशीलता और न्यायप्रियता का भी प्रमाण बनेगा।

केंद्र सरकार ने दी हरी झंडी

भारत सरकार के गृह मंत्रालय (आपदा प्रबंधन प्रभाग) और स्वास्थ्य मंत्रालय के पत्रों में यह विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में बताया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार यदि चाहे तो निर्णय लेकर इन योद्धाओं को पुन: सेवा में ले सकती है।

Dainikyashonnati

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