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 सिवनी नगरपालिका में ‘एजेंडा खेल’ का भंडाफोड़

विशेष सम्मेलन स्थगित कर अवैध कब्जों को वैध करने की साजिश नाकाम, कांग्रेस का बड़ा हमला

सिवनी | फ्रंट पेज लीड

सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण विवाद में नगर पालिका अधिनियम को दरकिनार करने के आरोप, कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

कांग्रेस पार्षद दल की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य, अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुँचाने के आरोप

नगरपालिका परिषद सिवनी — जहाँ सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

Seoni 16 February  2026

सिवनी यशो:- सिवनी नगरपालिका परिषद में कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही ज्ञानचंद सनोडिया की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराते जा रहे हैं। आरोप है कि सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण जैसे संवेदनशील मामले में नगरपालिका अधिनियम और नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे अवैध कब्जाधारियों और नियम विरुद्ध काबिज दुकानदारों को सीधा लाभ पहुँचा।

कांग्रेस पार्षद दल द्वारा इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर, नगरीय प्रशासन आयुक्त भोपाल और संयुक्त संचालक जबलपुर तक की जा चुकी है। 

महत्वपूर्ण तथ्य:
सदर कॉम्प्लेक्स लीज नामांतरण मामला इतना अधिक विवादित रहा है कि पूर्व में भाजपा के जनता से निर्वाचित अध्यक्षों ने भी इसमें उलझना उचित नहीं समझा।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व निर्वाचित अध्यक्षों को भी अवैध कब्जाधारियों द्वारा प्रलोभन दिए जाने की चर्चाएँ रही हैं, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत और पार्टी की छवि को देखते हुए इस पूरे विवाद से दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। यही नहीं, कांग्रेस की अध्यक्षीय परिषद ने भी इस मुद्दे पर कभी सक्रिय हस्तक्षेप नहीं किया।

अब जनता के बीच यह प्रश्न गहराता जा रहा है कि वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष से आखिर ऐसी कौन-सी चूक हुई कि वे इस विवाद के केंद्र में आ गए। साथ ही उनके सलाहकारों की भूमिका को लेकर भी शहर में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

Seoni Nagar Palika special meeting cancelled amid agenda manipulation and illegal shop regularisation allegations
सिवनी नगरपालिका परिषद का विशेष सम्मेलन स्थगित होने के बाद परिषद परिसर में पसरा सन्नाटा, एजेंडा खेल और भ्रष्टाचार के आरोप तेज

यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नगरपालिका की साख और पारदर्शिता से जुड़ा प्रश्न बन चुका है।

विशेष सम्मेलन स्थगित कर अवैध कब्जों को वैध करने की साजिश नाकाम


सिवनी नगरपालिका परिषद में 16 फरवरी को आहूत विशेष सम्मेलन का नाटकीय ढंग से स्थगित होना अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गया है,
बल्कि इसे भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और अवैध कब्जों को संरक्षण देने की कथित साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
सम्मेलन स्थगित होते ही जहां एक ओर आमजन में इसे लेकर व्यंग्यात्मक और हास्यप्रद चर्चाएं शुरू हो गईं,
वहीं दूसरी ओर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश भी सामने आया है।

सदर कॉम्प्लेक्स की 49 दुकानों पर ‘वैधता की मुहर’ की तैयारी?

जानकारी के अनुसार नगरपालिका के सदर कॉम्प्लेक्स में कुल 49 दुकानें हैं,
जिनमें से कई पर वर्षों से अवैध एवं नियम-विरुद्ध कब्जे चले आ रहे हैं।
इन कब्जाधारियों को पूरा भरोसा था कि 16 फरवरी के विशेष सम्मेलन में
लीज एवं नामांतरण से जुड़े प्रस्ताव पारित कर उन्हें वैधता प्रदान कर दी जाएगी।

चर्चा यहां तक है कि कुछ अवैध कब्जाधारियों द्वारा
भारी अनैतिक प्रलोभन राशि भी दी गई,
ताकि नियमों को ताक पर रखकर प्रस्तावों को परिषद से पारित कराया जा सके।
हालांकि, अंतिम समय पर सम्मेलन स्थगित होने से इन मंसूबों पर पानी फिर गया।

 भाजपा संगठन की दखल से बिगड़ा खेल

सूत्रों के अनुसार विवादित प्रस्तावों को लेकर मीडिया, विपक्ष और जनचर्चा में माहौल इतना गर्म हो गया
कि भाजपा जिला संगठन को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि सम्मेलन से पहले भाजपा जिला संगठन ने परिषद अध्यक्ष एवं भाजपा पार्षदों की बैठक बुलाकर
स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव न लाया जाए जिससे पार्टी सार्वजनिक रूप से कटघरे में खड़ी हो।

इसके बाद ही विशेष सम्मेलन को अचानक स्थगित कर दिया गया।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने इस पर केवल इतना कहा कि
“अध्यक्ष के आदेश से सम्मेलन स्थगित किया गया है”,
लेकिन यह बयान अपने आप में कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

भाजपा की कथनी–करनी पर सवाल

यह तथ्य बेहद अहम है कि कुछ माह पूर्व तक स्वयं भाजपा पार्षद
सदर कॉम्प्लेक्स की दुकानों पर अवैध कब्जों के खिलाफ मुखर थे।
जब नगरपालिका में कांग्रेस की अध्यक्षीय परिषद थी, तब इन्हीं नियम-विरुद्ध कब्जों को हटाने के लिए—

  • अवैध कब्जाधारियों को नोटिस जारी किए गए,
  • दुकानें खाली कराने के आदेश दिए गए,
  • यहां तक कि एफआईआर की तैयारी तक की गई।

अब भाजपा की सत्ता आते ही इन्हीं कब्जाधारियों को वैध करने की कथित जल्दबाजी ने
भाजपा की नीयत, नीति और सिद्धांतों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

 कांग्रेस का सीधा आरोप – ‘भ्रष्टाचार को बचाने का एजेंडा’

कांग्रेस के पार्षद दल ने इसे सीधे-सीधे “एजेंडा खेल” करार देते हुए आरोप लगाया है कि कार्यकारी अध्यक्ष के पदभार संभालने के बाद से नगरपालिका को लगातार नगरपालिका अधिनियम के विपरीत चलाया जा रहा है।

  • पिछले 9 माह से एक भी पीआईसी बैठक आयोजित नहीं हुई।
  • एक तिहाई पार्षदों के नगरहित प्रस्ताव तीन माह से दबाए जा रहे हैं।
  • विशेष सम्मिलन को फास्ट ट्रैक मंजूरी मंच बना दिया गया है।
  • 58 से 80 विषय एक साथ रखकर बिना चर्चा फैसले थोपे जाते हैं।

कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया को “नस्ती छिपाओ–फैसले पास कराओ” की कार्यप्रणाली बताया है।

 सबसे बड़ा सवाल

क्या सिवनी नगरपालिका में एजेंडा प्रबंधन, पीआईसी को निष्क्रिय करना
और परिषद बैठकों को बार-बार टालना
भ्रष्टाचार को बचाने और अवैध गतिविधियों को वैध बनाने की रणनीति है?

अगर नहीं, तो फिर पारदर्शिता से इतना परहेज क्यों?

अब सिवनी की जनता जवाब चाहती है।

Dainikyashonnati

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