🛣️गुंडा ठेकेदारों का दबदबा! मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना में गड़बड़ी की जांच शुरू
नवागत कलेक्टर और CEO की पारदर्शिता पर पहली कसौटी
Seoni 08 October
सिवनी यशो:- सिवनी जिले में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना के तहत हुए निर्माण कार्यों में फैले भ्रष्टाचार और गुंडा ठेकेदारों की मनमानी अब आम चर्चा का विषय बन चुकी है। सत्ताधारी दल से जुड़े जिला पंचायत अध्यक्ष ने स्वयं जांच की मांग करते हुए पत्र लिखे, विधायक ने विधानसभा में प्रश्न उठाया — फिर भी नौकरशाही की पकड़ इतनी मजबूत रही कि सारी जांचें ‘टांय-टांय फिस’ साबित हुईं।
अब इस तंत्र में सुधार और पारदर्शिता की असली परीक्षा नवागत कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी के सामने है।
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में गड़बड़ी की जांच शुरू, पांच सदस्यीय समिति गठित
भ्रष्टाचार की बढ़ती शिकायतों के बीच आखिरकार प्रशासन हरकत में आया है। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के प्रमुख अभियंता के.सी. ध्रुवकर ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं अवसंरचना योजना (शीर्ष 6084) के अंतर्गत सिवनी जिले में हुए कार्यों की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है।
- समिति को अधीक्षण यंत्री प्रभात गुप्ता (भोपाल) के मार्गदर्शन में कार्य करने के निर्देश।
- पी.के. कुशमारे, कार्यपालन यंत्री (मंडला) — समिति अध्यक्ष।
- सदस्य: सुनील जैन (सिवनी), राहुल मंडरहा (मंडला), सैफ अजहर (मंडला), श्यामसुंदर (सिवनी)
समिति विभिन्न जनपदों में हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, माप-पुस्तक (MB) और भुगतान प्रक्रिया की गहन जांच करेगी।
अफसर-ठेकेदार गठजोड़ पर उठे सवाल — “ग्राम स्वराज” के नाम पर लूट
जिले में लंबे समय से विकास कार्यों पर ठेकेदारों और अधिकारियों का गठजोड़ हावी रहा है। कई पंचायतों में कार्य आदेश तो पंचायतों के नाम से जारी हुए, लेकिन काम ठेकेदारों द्वारा करवाए गए।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि सड़कों के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि ज़मीन पर काम अधूरा या घटिया निकला।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने इस पर कई बार जांच की मांग की, वहीं केवलारी विधायक ठा. रजनीश हरवंश सिंह ने विधानसभा में अतारांकित प्रश्न क्रमांक 119 के माध्यम से मुद्दा उठाया था —
“जब कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपे गए थे तो ठेकेदारों से क्यों कराए जा रहे हैं, और गुणवत्ता जांच की जवाबदेही किसकी है?”
यह प्रश्न 17 जुलाई 2025 को उत्तरित होना था और 28 जुलाई 2025 को सदन में लिया जाना था, किंतु विभाग अब तक मौन है।
उपेन्द्र मिश्रा और पूर्व सीईओ पर संदेह की सुई
सूत्रों के अनुसार, पूर्व में उपेन्द्र मिश्रा और पूर्व सीईओ नवजीवन पवार के कार्यकाल में योजनाओं में भारी गड़बड़ी हुई।
तकनीकी निरीक्षण, सत्यापन और बिल भुगतान में नियमों की खुली अनदेखी की गई।
कई पंचायतों में तो ठेकेदारों के धमकी भरे वीडियो तक सामने आए, पर प्रशासन ने आंखें मूंद लीं।
जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल — केवलारी तक सीमित निरीक्षण
जांच समिति अध्यक्ष पी.के. कुशमारे ने अब तक केवल केवलारी क्षेत्र के कुछ स्थलों का निरीक्षण कर फोटो और वीडियो जुटाए हैं, जबकि समिति के अन्य सदस्य अभी तक निष्क्रिय बताए जा रहे हैं।
इससे स्थानीय लोगों में यह आशंका बढ़ रही है कि यह जांच भी केवल “कागजी औपचारिकता” बनकर न रह जाए।
जन अपेक्षा: भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचे जांच
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह जांच ईमानदारी से की गई,
तो जिले में वर्षों से सक्रिय ठेकेदार-अधिकारी गठजोड़ का पर्दाफाश हो सकता है।
ग्राम पंचायतों के नाम पर हुए करोड़ों के घोटाले सामने आ सकते हैं,
और यह भी उजागर होगा कि-
“ग्राम स्वराज” की आड़ में विकास की नहीं,
लूट की राजनीति खेली जा रही थी।
कलेक्टर और सीईओ की कसौटी — क्या लौटेगा जनविश्वास?
सिवनी की जनता अब नवागत कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से उम्मीद लगाए बैठी है।
यदि उन्होंने इच्छाशक्ति और पारदर्शिता का परिचय दिया,
तो न केवल विकास कार्यों में सुधार संभव होगा,
बल्कि सिवनी प्रशासन की साख भी लौटेगी।



