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“दूषित पेयजल से 32 मौतें, सदन में चुप्पी क्यों?” – केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने सरकार को घेरा
सिवनी यशो:-
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से लगभग 32 निर्दोष नागरिकों की मौत के मामले को लेकर
केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े ऐसे संवेदनशील विषय पर सदन में चर्चा से बचना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से लगभग 32 निर्दोष नागरिकों की मौत के मामले को लेकर
केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े ऐसे संवेदनशील विषय पर सदन में चर्चा से बचना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
## केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह का बयान
ठाकुर रजनीश सिंह, केवलारी विधायक, ने मध्यप्रदेश विधानसभा में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से लगभग 32 निर्दोष नागरिकों की मृत्यु की घटना को अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक बताया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस दल के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा इस गंभीर विषय पर सदन में चर्चा की मांग पूरी तरह उचित थी। जनस्वास्थ्य से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार को गंभीरता और जवाबदेही के साथ चर्चा करनी चाहिए थी।
विधायक सिंह ने संसदीय कार्य मंत्री द्वारा दिए गए उस बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें संबंधित क्षेत्र में कार्य में कठिनाई का कारण लोगों की अशिक्षा को बताया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में अशिक्षा या जागरूकता की कमी है, तो वहां सरकार की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वह जनजागरूकता अभियान चलाए तथा स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा की घटना अकेली नहीं है। मध्यप्रदेश के कई नगर परिषद क्षेत्रों एवं ग्रामीण अंचलों में जर्जर पाइपलाइन, जंग लगे हैंडपंप और रखरखाव के अभाव के कारण दूषित पेयजल की समस्या लगातार बनी हुई है, जो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाओं को जन्म दे सकती है।
विधायक ठाकुर रजनीश सिंह ने सरकार से मांग की कि इस विषय पर सदन में व्यापक चर्चा कराई जाए, पूरे प्रदेश की पेयजल व्यवस्थाओं की समीक्षा हो, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बचना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।



