पड़ोसी जिलों में बीमारी का प्रकोप, सिवनी में सतर्कता जरूरी; डेंगू-चिकुनगुनिया से निपटने स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा
छिंदवाड़ा में चिकुनगुनिया से मौत की खबर के बीच सिवनी में जिला स्तरीय प्रशिक्षण, 34 स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई रोकथाम और निगरानी की जिम्मेदारी
पड़ोसी जिलों में बीमारी का प्रकोप, सिवनी में डेंगू-चिकुनगुनिया पर अलर्ट
सिवनी, 30 सितंबर 2026
सिवनी यशो :- बारिश के बाद मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने के बीच पड़ोसी जिलों में सामने आए स्वास्थ्य संकट ने सिवनी के लिए भी सतर्कता बढ़ाने की जरूरत पैदा कर दी है। ऐसे समय में जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू एवं चिकुनगुनिया की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित कर स्वास्थ्य अमले को मैदानी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।
छिंदवाड़ा में चिकुनगुनिया से मौत की खबर के बीच सिवनी में बुधवार को होटल आशीर्वाद में डेंगू एवं चिकुनगुनिया नियंत्रण विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन तथा जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में आयोजित प्रशिक्षण में विभिन्न विकासखंडों से 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
बालाघाट का स्वास्थ्य संकट भी बढ़ा चुका है चिंता
पड़ोसी जिले बालाघाट में पिछले महीनों में बच्चों में गंभीर बीमारी और मौतों का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में मौतों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम की रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित बच्चों में खसरा, मलेरिया, खसरा-मलेरिया सह-संक्रमण, गंभीर कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई थीं।
यानी यह मामला किसी एक बीमारी तक सीमित नहीं रहा। यही वजह है कि बारिश के मौसम के बाद सिवनी में भी बीमारी की निगरानी, समय पर जांच और मैदानी स्तर पर रोकथाम को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।
सिर्फ प्रशिक्षण नहीं, अब मैदानी कार्रवाई की जरूरत
सिवनी में आयोजित प्रशिक्षण में स्वास्थ्यकर्मियों को डेंगू और चिकुनगुनिया की पहचान, लक्षण, जांच, उपचार, रोगी प्रबंधन, मच्छर नियंत्रण, लार्वा सर्वेक्षण और मच्छरों के प्रजनन स्रोत नष्ट करने की जानकारी दी गई।
आईएचआईपी रिपोर्टिंग और जन-जागरूकता पर भी प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के MPW, LT, ASHA, MTS, MI, AMO सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों की जानकारी परखने के लिए प्री-टेस्ट और पोस्ट-टेस्ट भी कराए गए।
मच्छरों के प्रजनन स्थल बने सबसे बड़ी चुनौती
प्रशिक्षण में CHRI के EMBED Project के Regional Coordinator श्री रामकृष्ण जाट ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। उन्होंने मच्छरजनित रोगों की निगरानी, लार्वा स्रोत नियंत्रण, सामुदायिक सहभागिता, व्यवहार परिवर्तन संचार और समयबद्ध रिपोर्टिंग पर जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती प्रशिक्षण की जानकारी को जमीन पर उतारने की है। शहर से लेकर गांव तक पानी जमा होने वाले स्थानों, कूलर, टंकियों, पुराने बर्तनों, टायरों और अन्य संभावित प्रजनन स्थलों की नियमित जांच तथा लार्वा नियंत्रण जैसी गतिविधियां लगातार चलाना जरूरी होगा।
सिवनी को इंतजार नहीं, पहले से तैयारी की जरूरत
पड़ोसी जिलों में सामने आए स्वास्थ्य संकट यह संकेत देते हैं कि बीमारी के गंभीर रूप लेने के बाद सक्रिय होने के बजाय पहले से निगरानी और रोकथाम ज्यादा जरूरी है।
जिला मलेरिया अधिकारी ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में मच्छरजनित रोगों की प्रभावी निगरानी, समय पर जांच एवं उपचार तथा आमजन को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।

अब जरूरत इस बात की है कि सिवनी में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था लगातार सक्रिय रहे, संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच हो, मच्छरों के स्रोतों पर नियमित कार्रवाई हो और गांव-गांव तक जागरूकता अभियान पहुंचे। बारिश के बाद का यह दौर स्वास्थ्य विभाग के लिए विशेष सतर्कता का समय है।



