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जो भारत माता को अपमानित करे उन्हें नष्ट करने हमें संकल्ति होना चाहिये – रामभद्राचार्य जी

भगवान श्रीराम सर्वत्र है उन्होंने मनुष्य रूप धारण कर राक्षसो का नाश किया था, रामकथा के तीसरे दिने भगवान राम की बाल लीलाओं का सुंदर चित्रण किया स्वामी जी

ब्रम्हलीन पूज्य शंकराचार्य मुझसे बहुत स्नेह करते थे- रामभद्राचार्य

जो भारत माता को अपमानित करे उन्हें नष्ट करने हमें संकल्ति होना चाहिये - रामभद्राचार्य जी - Seoni News

स्वामी जी ने भगवान श्रीराम की बाल कथाओं और अनुकरणीय संदेशों का उल्लेख करते हुये बताया कि भगवान श्री राम का संदेश संपूर्ण विश्व को सुरक्षा शांति और सुख देने वाला है । ब्रम्हलीन पूज्य स्वारूपानंद सरस्वती जी महाराज सरस्वती पुत्र थे वे मुझे अनेक बार बुलाते थे और मेरे लिखे हुये भाष्यों पर चर्चा करते थे मार्गदर्शी चर्चा और उनका सदैव मुझ पर स्नेह रहा है यह बात रामभद्राचार्य जी महाराज रामकथा के मंच से कही और उन्होंने कहा कि ब्रम्हलीन जगद्गुरू शंकराचार्य को पूज्य और अपना बड़ा भाई बताते हुये कहा कि ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी उनसे बहुत स्नेह करते थे उनकी इस भूमि में पहुँचकर वे आनंदित है और सुख की अनुभूति कर रहे है उनकी इस पवित्र भूमि का स्मरण करते हुये रामभद्राचार्य जी ने उन्हें विनग्र श्रद्धासुमन अर्पित किये ।

जो भारत माता को अपमानित करे उन्हें नष्ट करने हमें संकल्ति होना चाहिये - रामभद्राचार्य जी - Seoni News

सिवनी यशो:- भगवान श्री राम ने पृथ्वी पर पाँच लोगो के लिये जन्म लिया यह पाँच थे ब्राह्मण, गाय, पृथ्वी, देवताओं एवं संत एवं भगवत भक्तों की रक्षा के लिये पृथ्वी हमारी माता है । अपनी जन्मदात्री माँ को भी पृथ्वी ही कहा जाता है भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का राक्षस राज रावण ने एक समय में अपमान किया था तभी भगवान श्रीराम ने रावण को समूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा ले ली थी ज्ञान वर्धक संबोधन श्रीराम कथा सुनाते हुए कथावाचक तुलसी पीठाधीश्वर रामनंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी ने कथा के तीसरे दिन पालीटेक्रिक ग्राऊंड में श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुये पतित पावनी श्रीरामकथा की रसधार का प्रवाह करते हुये कही।

जो भारत माता को अपमानित करे उन्हें नष्ट करने हमें संकल्ति होना चाहिये - रामभद्राचार्य जी - Seoni News
स्वामी रामभद्राचार्य जी ने कथा के दूसरे दिन भगवान श्रीराम के जन्म तक की कथा का सुंदर वर्णन किया था उसी कथाा को आगे बढाते हुये बाल लीलाओं का मनोहारी चित्रण करते हुये स्वामी जी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने मनुष्य रूप में अवतार लेकर अनेक हेतु सिद्ध किये उन्हीं में से एक था माता के अपमान का बदला लेना स्वामी जी इसी कथा को वर्तमान की परिस्थितियों से जोड़ते हुये कहा कि हमारी माता गाया और भारत माता का जो अपमान कर रहे है, धर्म को नष्ट करने के समर्थक राजनैतिक दल है उनका विनाश करने हमे सकल्प लेना चाहिये । स्वामी जी ने स्पष्ट रूप से संदेश दिया कि आधुनिकता की चकाचौंध में आजकल के माता पिता अपने बालको का नामकरण करते समय नाम के महत्व को नजरांदाज कर देते है और अर्थहीन नामकरण करते है । स्वामी जी ने कथा के दौरान बताया कि भगवान श्रीराम ने जब अपने अंशो सहित जन्म लिया तो उनका नामकरण विद्वान आचार्यो ने किया और राजा दशरथ को बताया कि जो सर्वज्ञ है सर्वत्र है हर जगह रमते है सबमें रमते है आनंद के सागर है सुख राशि के धनी है उनका नाम राम है और राम राक्षसों का नाश करने वाले है अर्थात रक्षसी वृत्ति का नाश केवल उनके नाम के स्मरण से होता रहे ऐसे प्रथम पुत्र का नाम राम है । विश्व का भरण पोषण करने की सामर्थ रखने वाले द्वितीय पुत्र जिनके नाम से इस देश का भारत होगा उनका नाम भरत है । स्वामी जी ने शास्त्रोक्त तीन भरत का उल्लेख करते हुये स्पष्ट किया किया कि उन्ही के कारण इस देश का नाम भारत है इंडिया नहीं भारत होने की बात का उन्होने सुंदर तरीके ससे उल्लेख किया । स्वामी जी बताया कि राजा दशरथ के तृतीय पुत्र के संबंध में आचार्यवर ने बताया कि लक्ष्णो को धारण करने वाले राममय लक्षणों के धारक पुत्र का नाम लक्ष्मण है और यह पुत्र भगवान राम की पांचों भक्ति में पांचों लीलाओं में पांचों भक्ति में शामिल होने के लक्षणों वालो है इस लिये इसका नाम लक्ष्मण होगा तथा चौथे पुत्र के स्मरण मात्र से शत्रुओं का नाश होगा शुत्र इस नाम से भयभीत रहेंगे ऐसे चौथे पुत्र का नाम शत्रुघ्र होगा ।
स्वामी जी ने बताया कि भगवान राम इस संपूर्ण पृथ्वी की रक्षा के लिये संदेश देकर गये है और जिन पांच के लिये उन्होंने मनुष्य का रूप धारण किया था उस दिशा में भारत अग्रसर है जी – 20 को उन्होंने उसी दिशा में बढते कदम के रूप में बताया और कहा कि जी – 20 में इस बात पर जोर दिया गया है कि संपूर्ण विश्व को एक परिवार के रूप में देखा जाये ।

ब्रम्हलीन पूज्य शंकराचार्य मुझसे बहुत स्नेह करते थे

 

स्वामी जी ने भगवान श्रीराम की बाल कथाओं और अनुकरणीय संदेशों का उल्लेख करते हुये बताया कि भगवान श्री राम का संदेश संपूर्ण विश्व को सुरक्षा शांति और सुख देने वाला है महाराज श्री ने ब्रम्हलीन जगद्गुरू शंकराचार्य को पूत्य और अपना बड़ा भाई बताते हुये कहा कि ब्रम्हलीन शंकराचार्य जी उनसे बहुत स्नेह करते थे उनकी इस भूमि में पहुँचकर वे आनंदित है और सुख की अनुभूति कर रहे है उनकी इस पवित्र भूमि का स्मरण करते हुये रामभद्राचार्य जी ने उन्हें विनग्र श्रद्धासुमन अर्पित किये ।
राम कथा सुनने बड़ी संख्या में राम कथा अनुरागी पहुँचे श्रोताओं से पंडाल खचाखच भरा रहा है संगीत मय राम राम कथा को श्रोताओं ने संगीत के दौरान झूमते हुये सुना जय श्री राम के नारों से पंडाल गुंजायमान होते रहा है संगीतमय राम कथा में श्रोता भाव विभोर होकर कथा श्रवण कर रहे थे । कथा के आयोजक दिनेश राय मुनमुन ने सहित आमंत्रित अनेक समाज प्रमुखों के द्वारा कथाकार राम अनुरागी स्वामी रामभद्राचार्य जी की पदुका पूजन किया गया कथा में आरती के समय अनेक सामाजिकजनों की उपस्थिती रही ।

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