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भाजपा की गुटबाजी पर भी उठे सवाल : छिंदवाड़ा में महापौर-कमिश्नर आमने-सामने, धरने की चेतावनी

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Oct 24, 2026 02:31 am / Post views : 4

छिंदवाड़ा में महापौर-कमिश्नर आमने-सामने, धरने की चेतावनी
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महापौर विक्रम अहाके बोले—काम समय पर नहीं हुए तो बैठूंगा धरने पर, आयुक्त चंद्रप्रकाश राय का जवाब—सभी काम नियम से होंगे; कैलाश विजयवर्गीय के सीमित दौरों को लेकर भी चर्चा

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छिंदवाड़ा‌ यशो :- छिंदवाड़ा नगर निगम में विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर महापौर विक्रम अहाके तथा निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय के बीच तीखी बहस होने की खबर सामने आई है। नगर में पेयजल संकट और वार्डों के कामकाज को लेकर महापौर की नाराजगी के बीच उन्होंने चेतावनी दी कि यदि काम समय पर नहीं हुए तो वे धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। वहीं, आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि सभी काम नियमों के अनुसार ही होंगे।

इस घटनाक्रम ने नगर निगम के कामकाज और जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर, लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत की रणनीति में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता एवं नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के छिंदवाड़ा में सीमित दौरों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

पेयजल संकट और वार्डों के काम बने विवाद की वजह

नगर में पेयजल संकट और वार्डों में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर महापौर ने असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और जनता की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता। महापौर का कहना है कि यदि जनहित के काम समय पर नहीं होंगे तो उन्हें धरने पर बैठना पड़ेगा।

इसके जवाब में निगम आयुक्त चंद्रप्रकाश राय ने कहा कि सभी काम नियमों के अनुसार किए जाएंगे। महापौर और आयुक्त के बीच इस टकराव को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा हो रही है। अब देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच समन्वय बनाकर पेयजल और वार्डों से जुड़ी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है।

भाजपा में शामिल हुए थे महापौर विक्रम अहाके

विक्रम अहाके कांग्रेस के टिकट पर महापौर निर्वाचित हुए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे में उनके और निगम प्रशासन के बीच हुए विवाद को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस बहस के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाओं, कामकाज की गति और आपसी समन्वय की क्या भूमिका रही, यह संबंधित पक्षों के विस्तृत पक्ष सामने आने पर ही स्पष्ट होगा।

महापौर-आयुक्त विवाद पर भाजपा जिलाध्यक्ष बोले—मुझे कुछ पता नहीं

महापौर और निगम आयुक्त के बीच बहस तथा धरने की चेतावनी के संबंध में भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव से प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बहस के बारे में जानकारी नहीं है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब नगर निगम के कामकाज को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है।

लोकसभा चुनाव के रणनीतिकार कैलाश विजयवर्गीय के दौरों पर सवाल

छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय की रणनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया था। वे मध्य प्रदेश सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री भी हैं। इसके बावजूद, उपलब्ध स्थानीय विवरण के अनुसार, वे पिछले लगभग ढाई वर्षों में केवल एक बार निजी कार्यक्रम के सिलसिले में छिंदवाड़ा आए।

इस सीमित उपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हैं। नगरीय प्रशासन मंत्री होने के नाते उनसे शहर के विकास, नगरीय निकायों की जरूरतों और स्थानीय समस्याओं पर सक्रिय पहल की अपेक्षा की जा रही है। शहर में पेयजल संकट, सड़कों के पुनर्निर्माण और अन्य विकास कार्यों को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच उनके दौरे और विभागीय सहयोग का मुद्दा भी चर्चा में है।

हालांकि, विजयवर्गीय की कथित नाराजगी या उनके दौरे नहीं होने के पीछे भाजपा नेताओं की ओर से निमंत्रण नहीं दिए जाने की बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सड़क निर्माण के टेंडर, लेकिन ठेकेदारों की कमी की चर्चा

शहर में सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया होने के बावजूद ठेकेदारों के आगे नहीं आने की बात भी सामने आई है। वहीं, पेयजल संकट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए निगम प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत महसूस की जा रही है।

इंजीनियरों के फोन नहीं उठाने की शिकायत

नगर निगम के इंजीनियरों के कामकाज को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि निगम के कई इंजीनियर आम नागरिकों और पार्षदों के फोन नहीं उठाते और न ही कॉल बैक करते हैं। पार्षदों को फाइलों के साथ संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों के बारे में भी इसी तरह की शिकायतें किए जाने की बात कही गई है।

यदि ये शिकायतें सही हैं, तो इससे आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण में देरी और जनप्रतिनिधियों की परेशानी बढ़ सकती है। निगम प्रशासन को शिकायतों की समीक्षा कर जवाबदेही और संवाद व्यवस्था बेहतर बनाने की जरूरत है।

अमित सक्सेना की कांग्रेस में वापसी, जनप्रतिनिधियों के सम्मान का मुद्दा

जनता की समस्याओं को लेकर भाजपा में प्रभावी मंच नहीं होने की बात कहते हुए भाजपा नेता अमित सक्सेना के दोबारा कांग्रेस में जाने का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि उन्होंने महापौर और निगम आयुक्त के बीच हुई बहस को जनप्रतिनिधियों के अपमान से जोड़कर देखा।

इस घटनाक्रम के बीच छिंदवाड़ा में भाजपा की अंदरूनी खींचतान, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय तथा शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, शहरवासियों की प्रमुख अपेक्षा यही है कि पेयजल, सड़क और वार्डों के विकास से जुड़े काम समय पर पूरे हों।