आबकारी आयुक्त ने फैक्ट्री का लाइसेंस 20 दिवस तक निलंबित (Suspended) कर दिया है साथ ही यह भी यह भी कहा है कि श्रम विभाग से इस मामले में प्रतिवेदन (report) मांगा गया है यदि श्रम विभाग का प्रतिवेदन 20 दिवस की समय सीमा में नहीं आया तब भी लायसेंस निलंबित रहेगा अर्थात कम से कम 20 दिन और श्रम विभाग (Labour Department) के प्रतिवेदन प्राप्त होने तक लायसेंसे निलंबित रहेगा ।
शराब फैक्ट्री को प्राप्त लायसेंस की शर्तो के अनुसार फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन (police verification) कराएं जाना जरूरी होता है। नाबालिग (minor) बच्चों से फैक्ट्री में कार्य कराए जाने से स्पष्ट है कि इस शर्त का उल्लंघन किया गया है। दूसरा शराब फैक्ट्री में 21 वर्ष से कम आयु/ पागल को परिसर में प्रवेश की अनुमति का प्रावधान नहीं है । जिले के कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री में 39 नाबालिग लड़के और 20 नाबालिग लड़कियाँ काम करते हुये पाये गये है और इनसे कठोर श्रम कराया जा रहा था तथा मजदूरी भी कम दी जा रही थी ।
सोम डिस्लरी रायसेन के मामले में सेहतगंज मैसर्स सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी कन्हैयालाल अतुलकर, आबकारी विभाग के तीन उप निरीक्षक प्रीति शैलेंद्र उइके, शैफाली वर्मा और मुकेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है ।
बचपन बचाओ आंदोलन के द्वारा फैक्ट्री के संचालक के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करने की मांग की गयी है । वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री डां. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने भी कहा है कि बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषी व्यक्तियों को छोड़ा नहीं जायेगा । यहाँ बता दें कि इन बच्चों को स्कूल बस से फैक्ट्री लाया जाता था और इन से शराब की पैंकिंग सहित अन्य काम लिया जाता था। निर्धारित समय से अधिक समय तक काम कराया जाता था । इन नाबालिगों को जब बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकत्र्ताओं एवं राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अधिकारियों के द्वारा छुड़ा गया और थाने में एफआईआर कराने गये तब एफआईआर नहीं लिखी जा रही थी और अधिकारियों ने बच्चों को भगा दिया था ।