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उद्यानिकी विभाग के मजदूरों के हक में अधिकारी डाल रहे डाका

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Sep 07, 2024 10:48 pm / Post views : 118

उद्यानिकी विभाग के मजदूरों के हक में अधिकारी डाल रहे डाका
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मजदूरों ने लगाया आरोप कहा हर माह मजदूरी से मांगा जाता है हिस्सा

मजबूरन मजदूरों ने को जनसुनवाई में की शिकायत

उद्यानिकी विभाग की देवरी ( नारायणगंज) का मामला

  मंडला यशो: - विगत कुछ वर्षो से मंडला जिला भ्रष्टाचार का केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ के चाहे नेता हो, अधिकारी हो या कर्मचारी सभी भ्रष्टाचार में लिप्त मिलते है। ऐसा ही एक मामला मंडला जिले के उद्यानिकी विभाग की नारायणगंज (देवरी) से सामने आया है । यहां के मजदूरों ने नर्सरी प्रभारी और सहायक संचालक पर यह आरोप लगाये हैं कि उनके द्वारा हर माह मजदूरों से उनकी आय का एक हिस्सा वसूला जाता है । उनसे प्राप्त शिकायत पत्र में उन्होंने यह भी बताया कि विभागीय मजदूरों को अधिकारी द्वारा अपने घर जबलपुर ले जाकर उनसे घर के कार्य कराये जाते है। अगर मजदूरों द्वारा अपनी आय का हिस्सा देने से मना किया जाता था तो उन्हें कार्य से निकलने की धमकी भी दी जाती है ऐसा मजदूरों का कहना है। जब नर्सरी जाकर मामले की तफ्तीश की गई तब कई जानकारियाँ सामने आई। यहाँ पर मजदूरो द्वारा विभिन्न तरह के आरोप नारायणगंज नर्सरी प्रभारी पर लगाये गये। मजदूरों से बात करने पर उन्होंने बताया कि नर्सरी प्रभारी हर माह मस्टर रोल में हाजिरी भरकर उनसे उनकी आय का हिस्सा ले लिया करते हैं। जब मजदूरों द्वारा पूछा गया तो अधिकारी ने जिला अधिकारी का हवाला देते हुए बताया कि या उनके द्वारा राशी मंगवाई जाती है । एक मजदूर ने तो यह भी आरोप लगाया कि महिने में दो-तीन बार अधिकारी द्वारा उसे अपने जबलपुर स्थित घर ले जाकर घर के कार्य कराए जाते हैं और उससे भी मजदूरी वेतन का हिस्सा लिया जाता है।

नर्सरी के पंखे खराब होने पर प्रभारी ने मजदूर से ले लिए 6000 रुपए

नर्सरी के चौकीदार ने नर्सरी प्रभारी पर यह आरोप लगाया कि नर्सरी के पंखे खराब होने पर उनके द्वारा चौकीदार को नोटिस जारी कर दिया गया और नर्सरी प्रभारी द्वारा उनसे 6000 नगद वसूल लिए गए पर वर्तमान स्थिति में भी नर्सरी का सिर्फ एक ही पंखा सुधार पाया है बाकी सारे पंखे खराब है। चौकीदार ने अपना दर्द का व्याख्यान करते हुए बताया कि उसकी एक माह की सारी मजदूरी नर्सरी प्रभारी द्वारा वसूल ली गई। नाराज मजदूरों ने विभाग की पोल पूरी तरह खोल दी और बताया कि विभाग में लंबे समय से मिट्टी और खाद कम मात्रा में बुलाई जाती है और उनकी बड़ी मात्रा के बिल लगाए जाते हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व नर्सरी में पानी की मोटर खराब हो गई थी उसका सुधारीकरण का कार्य भी मज़दूरों से ही पैसा लेकर कराया गया।

अस्त - व्यस्त पड़ी है नर्सरी जिम्मेदार कौन

नर्सरी पूरी तरह अस्त- व्यस्त पड़ी हुई है । कहने को तो यह नर्सरी 8 एकड़ में फैली हुई है पर नर्सरी को देखने पर स्पष्ट होता है कि ना ही कहीं नर्सरी के विभिन्न भागों तक जाने के लिए उपयुक्त रास्ते हैं और ना ही वहां पर पौधों का संरक्षण ठीक तरह से किया गया है। जगह-जगह खरपतवार हो गए हैं जिस कारण पौधे फल - फूल नहीं पा रहे हैं। नर्सरी में ना तो झंडा फहराने के लिए उपयुक्त जगह है ना ही मुख्य गेट है और ना ही पंखे और अन्य उपकरण चालू स्थिति में हैं। इस विषय पर जब हमारे संवाददाता ने नर्सरी प्रभारी से बात की तो वह हर बात से पल्ला झाड़ते नजर आए। उन्होंने यह माना कि मेरे द्वारा मजदूरों से आय का हिस्सा लिया जाता है पर उन्होने कहा की उस पैसे का उपयोग नर्सरी के विकास और रखरखाव में किया जाता है । पर नर्सरी में ना ही कोई विकास दिखता है और ना ही कोई कार्य है उल्टा सारी नर्सरी अस्त व्यस्त पड़ी हुई है। जब अधिकारी से पूछा गया कि आप किस नियम के तहत मजदूरों के पैसों से नर्सरी का विकास कार्य करते हैं क्या आपके पास जिला कार्यालय से नर्सरी के रखरखाव के लिए कोई राशि नहीं आती? इस विषय पर उन्होंने बताया कि जिला कार्यालय से उन्हें रखरखाव के लिए कोई भी राशि नहीं आती है जिस कारण उन्हें मजदूरों से पैसे लेकर नर्सरी का रखरखाव करना पड़ता है।

जाँच के लिये टीम गठित की गयी

इस विषय पर सहायक संचालक उद्यानिकी ने बताया कि हमारे द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जॉच के लिए टीम गठित कर दी गई है और जाँच जारी है। उन्होंने बताया कि मुझे इस कृत्य की बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी जबकि मजदूरों द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि नर्सरी प्रभारी द्वारा साहायक संचालक के नाम से उनसे राशि वसूली जाती थी। इसके जवाब में जिला उद्यानिकी अधिकारी द्वारा यह बताया गया कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार की राशि आज तक नहीं ली गई है पर आपने कार्यक्षेत्र की नर्सरी और विकासखण्ड मैं ध्यान ना देना और वहाँ से इस प्रकार की गड़बड़ी का सामने आना जिला अधिकारी की कार्य प्रणाली पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। जाहिर है यह जिले में चल रहे भ्रष्टाचार का एक छोटा सा नमूना मात्र है। यह नर्सरी पर कार्य कर रहे मजदूरों की व्यथा को पूर्णत: बयान करता है। कहने को तो हम आजाद हो चुके हैं पर आज भी हमारे जिले के कई हिस्सों में मजदूरों से अधिकारीयो द्वारा उनकी कमाई का एक हिस्सा माँगा जाता है। यह शोषण का एक रूप है या नहीं इस बात का निर्णय में आप पर छोड़ता हूं। [pdf-embedder url="https://dainikyashonnati.com/storage/2024/09/4-x-6-in.pdf" title="4 x 6 in"]  

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