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कूटरचित दस्तावेज बनाकर षडयंत्रपूर्वक फर्जी रजिस्ट्ररी कराने के आरोप से पटवारी दोषमुक्त

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Feb 19, 2025 10:03 pm / Post views : 233

कूटरचित दस्तावेज बनाकर षडयंत्रपूर्वक फर्जी रजिस्ट्ररी कराने के आरोप से पटवारी दोषमुक्त
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अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर खान एवं सज्जाद अनवर ने की पैरवी

Seoni 19 February 2025 सिवनी यशो:- प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना केवलारी जिला सिवनी म0 प्र0 में सूचनाकर्ता/शिकायतकर्ता विवेकानंद ठाकुर ने एक लिखित शिकायत इस आशय से दी थी कि उसने दिनांक 9/7/2013 को अपनी पत्नि श्रीमति माया बाई के नाम से अभियुक्त दिनेश से उसके नाम की ग्राम देहवानी में स्थित भूमि खसरा न0 301 रकबा- 0.40 हे0 दो लाख रूपये नगद देकर खरीदा था विक्रय पत्र निष्पादित कराने के पूर्व पटवारी हेमराज गेडाम ने बिक्री पत्र जारी किया था विक्रय पत्र निष्पादित किये जाने के बाद उसने अविवादित नामांत्रण होने के कारण पटवारी हेमराज गेडाम को अपने विक्रय पत्र और नामांत्रण हेतु आवेदन दिया था तब अभियुक्त दिनेश ठाकुर और पटवारी हेमराज गेडाम ने नामांत्रण की कार्यवाही के लिये शिकायतकर्ता से पांच हजार रूपये लिये थे । शिकायतकर्ता ने कई बार पटवारी हेमराज गेडाम को बही बनाने की मांग किया पंरतु वह हीला-हवाली करते रहा, जब शिकायतकर्ता ने भूमि खसरा न0 301 की नकल लोकसेवा केन्द्र केवलारी से प्राप्त किया तब उसे यह जानकारी हुई कि उक्त भूमि अभियुक्त जितेन्द्र सेन के नाम पर दर्ज है तब शिकायतकर्ता को यह अशंका हुई कि अभियुक्त दिनेश ठाकुर, पटवारी हेमराज गेडाम और जितेन्द्र सेन आपस में सांठगांड कर उसकी पत्नि को दिनांक 9.07.13 को बेची गई जमीन के लगभग 3-4 माह बाद ही उक्त भूमि की फर्जी रजिस्ट्री जितेन्द्र सेन के नाम पर करा दी गई, अभियुक्त दिनेश एवं पटवारी हेमराज गेडाम व जितेन्द्र सेन ने जानबूझकर उसके द्वारा उसकी पत्नि माया बाई के नाम पर खरीदी गई जमीन को हड़पने के लिये फर्जी रजिस्ट्री की कार्यवाही की गई पटवारी हेमराज गेडाम ने दिनांक 1.11.2023 को उसी भूमि का दोबारा बिक्री प्रमाण पत्र अभियुक्त जितेन्द्र सेन को जारी कर दिया जो भूमि उसे लगभग 3-4 माह पहले आरोपी दिनेश बेच चुका था और जिसका बिक्री प्रमाण पत्र पटवारी हेमराज के द्वारा ही बनाया गया था । उपरोक्त शिकायत के आधार पर अभियुक्तगण के विरूद्ध अपराध क्र.322/2016 अंतगर्त धारा 420,467,468,471,120बी,34 भा.द.वि. पंजीबद्ध किया था तथा संपूर्ण विवेचना उपरांत माननीय न्यायालय के समक्ष चालान प्रस्तुत किया गया जिसका विचारण माननीय न्यायालय पर चला। अभियोजन की ओर से उक्त प्रकरण में कुल 14 साक्षीगणों की साक्ष्य माननीय न्यायालय के समक्ष कराई गई। परीक्षण और प्रतिपरीक्षण के दौरान आये तथ्यो तथा बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत घटनाक्रम और तर्को एवं उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय के विभिन्न न्यायदृष्टांतों को बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत किया गया । अभियोजन के द्वारा उक्त प्रकरण को अभियुक्त के विरूद्ध युक्तियुक्त संदेह से प्रमाणित नहीं किया जा सका तथा बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत न्यायदृष्टांतों तथा प्रतिपरीक्षण के दौरान आये तथ्यों एवं अभिलेख पर उपलब्ध संपूर्ण साक्ष्य को देखते हुए आरोपी पटवारी को आरोपित अपराधो से दोषमुक्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से प्रख्यात अधिवक्ता सोहेल जकी अनवर खान, अधिवक्ता  सज्जाद अनवर खान एवं सहयोगी अधिवक्तागण के द्वारा पैरवी की गई थी।

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