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Dainik Yashonnati
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मोहगांव प्रोजेक्ट में 2007 के विनियमितीकरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की सडांध

मोहगांव प्रोजेक्ट में 2007 के विनियमितीकरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की सडांध
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भर्ती करने के लिये मस्टर रोल से की गई छेड़छाड़ स्थापना शाखा पे लगा पैसो के लेन-देन का आरोप

मंडला यशो:- वन विभाग के मोहगांव प्रोजेक्ट में दस्तावेजों से छेडछाड कर फर्जी तरीके से कुछ व्यक्तियों को विनियमति करण का लाभ दिया गया है और इस प्रक्रिया में भारी लेने देन होने की चर्चाएँ है । हालांकि मंडला जि़ले मे वन विभाग मे घोटालो के आरोप लगना कोई नयी बात नहीं है यहाँ आये दिन किसी न किसी प्रकार के घोटाले सामने आते रहते है । वर्तमान मे मंडला मे स्थित मोहगाव प्रोजेक्ट मे दस्तावेजो से छेड़छाड़ करने और फर्जी तरीके से कर्मचारियों की भर्ती का मामला व्यापक चर्चा में है और इस संबंध में जिम्मेदार सूचना के अधिकार के तहत भी आवेदक को दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे है । यह महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि माननीय उच्च न्ययायलय द्वारा विभाग को वर्ष 2007 से कार्यरत कर्मचारियो के विनियमतिकरण के आदेश दिये गये थे । जिसकी प्रक्रिया वर्ष 2021 - 2022 मे की गई । इसमे वर्ष 2007 से कार्यरत कई कर्मचारियो को विनियमित का लाभ दिया गया वहीं इसकी आड़ में विभाग के जिम्मेदारों ने फर्जी तरीके से भर्तियाँ भी कर ली । प्राप्त जानकारी के अनुसार इस नियमितीकरण की प्रक्रिया मे ऐसे व्यक्तियों का भी चयन हो गया जो 2007 से कार्यरत नहीं है । इसमे मस्टर रोल से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है प्राप्त जानकारी के अनुसार किसी मृत कर्मचारी के मस्टर रोल मे छेड़छाड़ कर उसकी जगह किसी दूसरे कर्मचारी का मस्टर रोल लगाया गया ताकि ये दिखाया जा सके की दूसरा कर्मचारी वर्ष 2007 से कार्यरत है । क्या है मामला .... . दरअसल मामला कुछ इस प्रकार है बसोर गोंड पिता सीताराम ग्राम तुरुर और अशोक यादव पिता सीताराम यादव ग्राम पाण्डिवरा से संबंंधित है । इसमे बसोर गोंड वह व्यक्ति है जो वर्ष 2007 से कार्यरत है पर इसकी मृत्यु हो चुकी है और अशोक यादव जो अभी वर्तमान मे कार्यरत है । अब चूकि दोनों के पिता का नाम एक ही है और बसोर गोंड की मृत्यु हो चुकी है उसी का फायदा उठा कर बसोर गोंड के मस्टर रोल मे छेड़छाड़ करके नाम बदल कर अशोक यादव का नाम डाल दिया गया और फर्जी तरीके से अशोक यादव की नौकरी प्रदान कर दी गई है। इसकी सत्यता की जांच के लिये जब सूचना के अधिकार से जानकारी विभाग से एक व्यक्ति ने जानकारी माँगी तो विभाग द्वारा यह बताया गया की बसोर गोंड की मृत्यु हो चुकी है और अशोक यादव ने अपने मस्टर रोल देने मे सहमति नहीं दी है । इस प्रकार का जबाव लिखित रूप मे विभाग ने प्रदान किया है । इस प्रकार के जबाव से विभाग द्वारा की गयी विनियमतिकरण की प्रक्रिया पर संदेह होता है और स्पष्ट प्रतीत होता है कि वन के जिम्मेदार अधिकारी तथ्यों को छुपाने का प्रयास कर रहे है । बताया गया है कि. विनियमतिकरण की प्रक्रिया के लिये एक कमेटी का गठन किया गया था उसी कमेटी के द्वारा ही सारे कर्मचारियो का चयन किया गया था तो ज़ाहिर सी बात है कि चयन प्रक्रिया की कार्यवाही में ततकानीन अधिकारियों की सांठ गाँठ रही होगी । । कोर्ट ने छोटे कर्मचारियों के हित में निर्णय दिया परंतु अधिकारियों ने उसमें भी अपने हितों के कारण भ्रष्टाचार की सडांध फैला दी ।

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