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अधिकारी को क्यो है ऊपरी आदेश की प्रतीक्षा ? राजसात, एफआईआर व जुर्माने का है प्रावधान

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Jun 14, 2025 05:43 pm / Post views : 393

अधिकारी को क्यो है ऊपरी आदेश की प्रतीक्षा ? राजसात, एफआईआर व जुर्माने का है प्रावधान
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अब जंगल भी नहीं बचे - संरक्षित वन क्षेत्र से भी रेत चोरी, कोपीझोला में सरपंच का ट्रैक्टर पकड़ा गया

रेत माफिया अब फॉरेस्ट एरिया में भी सक्रिय, वन विभाग भी 'नाममात्र की कार्रवाई तक सीमित

 Seoni 14 June 2025 सिवनी यशो:- बरघाट क्षेत्र में रेत माफिया अब न केवल नदियों और गांवों में बल्कि संरक्षित वन क्षेत्रों में भी पैर पसार चुके हैं। कोपीझोला के फॉरेस्ट नाले से अवैध रेत खनन करते हुए एक ट्रैक्टर को वन विभाग की टीम ने रंगेहाथ पकड़ा है, जो स्थानीय सरपंच का बताया जा रहा है। यह घटना न केवल प्रशासन की नाकामी दर्शाती है बल्कि यह भी संकेत देती है कि अब माफिया को जंगल तक में कोई भय नहीं रहा।

फॉरेस्ट नाले से रेत चोरी, ट्रैक्टर बरामद

सूत्रों के अनुसार, बीती रात कोपीझोला स्थित वन क्षेत्र के एक नाले से अवैध रूप से रेत भरते हुए ट्रैक्टर को पकड़ा गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर ट्रैक्टर को जब्त कर बरघाट रेंज कार्यालय में खड़ा कर दिया है। यह ट्रैक्टर कोपीझोला सरपंच का बताया जा रहा है, जिससे इस मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।

वन विभाग की ढुलमुल कार्यवाही पर सवाल

बरघाट रेंजर पीयूष गौतम ने बताया कि "ट्रैक्टर जब्त कर लिया गया है, उच्च अधिकारियों से बात करके निर्णय लिया जाएगा कि आगे क्या करना है।" यह बयान स्वयं में वन विभाग की निष्क्रियता को उजागर करता है, क्योंकि फॉरेस्ट अधिनियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में राजसात की प्रक्रिया, एफआईआर व जुर्माने की तत्काल कार्यवाही अनिवार्य होती है, परंतु यहां निर्णय 'ऊपरÓ से आने की प्रतीक्षा की जा रही है।

माफिया को प्रशासन और राजनीति की छतरी?

अब जब रेत माफिया वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में भी घुसपैठ कर चुके हैं, और वहां भी कार्रवाई शिथिल हो रही है, तो सवाल उठता है कि क्या इन माफियाओं को प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? ग्रामीणों का आरोप है कि नाम उजागर न करने की शर्त पर कई प्रभावशाली जनप्रतिनिधि व स्थानीय अधिकारियों की मौन स्वीकृति से ही यह कारोबार फलफूल रहा है।

वन संपदा को भी खतरा

वन क्षेत्रों में इस प्रकार का खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि प्राकृतिक जल स्रोतों, वन्य जीवों और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में बरघाट अंचल अपनी हरियाली और नदियों को खो सकता है। अब ग्रामीणों का एक सुर - सरकार अगर नहीं जागी तो आंदोलन की ज्वाला हम जलाएंगे" अवैध खनन से त्रस्त ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो वे वन विभाग, खनिज विभाग और प्रशासन के खिलाफ सामूहिक विरोध-प्रदर्शन, ज्ञापन और धरना देंगे। रेत माफिया को हर हाल में रोकना होगा - चाहे वह गांव में हो या जंगल में - यह अब पूरे बरघाट क्षेत्र की आवाज बन चुकी है

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