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दीप मालिकाएँ देती है अंधियारे से लडऩे का संदेश,समाज की बेहतरी के लिये हो संगठित प्रयास

देश का गौरव बढ़ाने वाले, संस्कृति और संस्कारों की बेहतरी की चिंता करने वाले के पास हो राजनैतिक सत्ता

दीपावली पर्व मनाने के पीछे अनेक धार्मिक मान्यताएँ है जिसमें से एक मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम रावण सहित अन्य राक्षसी ताकतो का वध कर अयोध्या वापिस लौटे और अध्योध्यावासियों ने भगवान राम के आगमन पर दीप जलाकर खुशियाँ मनायी इसी प्रकर की विजय और व्यापक सामाजिक हितों के लिये कार्य करने वाली ईश्वरीय सत्ता से संबंधित कथाएँ है और उसी आधार पर पूरे हिन्दुस्तान में दीपवली पर्व मनाया जाता है । काली अंधेरी अमावस की रात को दीपो के प्रकाश से जगमगा दिया जाता है । अंधेरी रात को हम छोटे छोटे दीपको के माध्यम से प्रकाशवान कर देते है । इन छोटे छोटे दीपको के माध्यम से प्रकाश फैलाकर जो मूल संदेश दिया जाता है वह है कि हम समाज के सभी लोग मिलकर बड़ी से बड़ी मुश्किलो का सामना कर लेंगे हर चुनौती का सामना कर लेंगे यह संदेश है परंतु अब हम दीपक तो जला रहे है पर दीपक जलाने का जो मूल भाव है उसका विस्मरण होने लगा है हम केवल उत्साह से पर्व मनाते है पर्व के पीछे का चिंतन भूल रहे है परिणाम स्पष्ट है परिवारो में विघटन, सामाजिक तानाबाना छिन्न भिन्न हो गया है, सब आजाद हो गये है, हर व्यक्ति एक इकाई हो गया है । पर्व एक परेंपरा बन गया है और सब इस परंपरा को निभा रहे है । यदि राम राज्य लाने की कल्पना है तो राम को जानना पड़ेगा, राम की बात माननी पड़ेगी राम के जैसे नहीं तो उसकी प्रजा के जैसे चरित्र तो बनाना पड़ेगा अपने संकल्प के प्रति हमें सुनिश्चितता रखनी पड़ेगी ।
जब जब छोटे छोटे दीपक गहन अंधियारे से लडऩे की सक्षमता रखते है तो हमे एक जुटता से चुनौतियों से लडऩे के लिये संकल्पित होने की आवश्यकता है । भगवान राम ने सज्जनों की मदद की सज्जनों से मदद ली और दुर्जनों का नाश कर जनकल्याण किया ऐसा हमें बताया गया है यह बार बार बताने और समझाने के पीछे जो भाव होता है उसका मूल उद्देश्य केवल बेहतर समाज का निर्माण करना आने वाली पीढिय़ों को बेहतर देकर जाने की मंशा होती है ।
आने वाली पीढि़ को संस्कार, चरित्र, संस्कृति का हस्तांतरण होता है । सनातन धर्म संस्कार संस्कृति का हस्तांतरण शताब्दियों से कर रहा है और सनातन संस्कृति के संस्कार इतने मजबूत है कि हजारों आक्रमणों के बाद भी यह संस्कृति नहीं मिटी ।
इस संस्कृति को मिटाने और समूल नष्ठ करने की हाल ही में अलगाव वाली ताकतो ने चुनौती दी है । हालांकि इस प्रकार की चुनोतियाँ पहले भी देने वालो की कमी नहीं रही है परंतु ऐसी ताकतो का राजनैतिक सक्षमता वाले व्यक्तियों ने समर्थन करने से परहेज किया और जनमानस से कड़ा विरोध किया परंतु इस बार राजनैतिक सत्ता के लिये झटपटा कुछ राजनैतिक दल सनातन को समाप्त करने की बात करने वाली ताकतो का साथ दे रहे है और बड़े जनाधार वाली राजनैतिक सत्ता सनातन के पक्ष में भी खड़ी है परंतु समाज और सनातन के पक्षधरों को भी सनातन सनातन समर्थकों के साथ एक जुटता से रहना चाहिये और छोटे छोटे दीपक की भांति सनातन विरोधियों से मुकाबला करना चाहिये ।
यह गौरव का विषय है कि देश आज पूरी दुनिया में सम्मानजनक स्थिती में पहुँच चुका है यह नेतृत्व की ताकत होती है और यह ताकत देने का काम छोटे छोटे दीपक की भांति एक एक मतदाता देता है । सत्ता के शीर्ष में सज्जन शक्तियाँ काबिज हो यह चिंता होने को ही भारत माता की जय करना कहते है ।
कुछ वर्षो पूर्व भारत देश की स्थिती बहुत दुर्दशा पूर्ण रही है । भ्रष्टाचार, घोटाले, दलाली के खुलासे आये दिन होते है जिसमें बड़े बडे नेता आरोपित होते रहे अनेक तो जेल भी गये । भारत दुनिया के सामने शर्मिंदा हो रहा था परंतु उस काले अंधियारे को दूर करने में देश की जनता ने अपने जागृत स्वरूप का परिचय दिया और बेहतर नेतृत्व को लाकर देश की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया ।
भारत एक लोकतांत्रिक देश है जिसकी ताकत जनता के पास होती है परंतु लोभ,झूठ, लालच, भय आदि के सहारे गलत व्यक्ति इस ताकत के मालिक बन जाते है और फिर सत्ता का संचालन मनमाने तरीके से होता है जनकल्याण और विकास के रास्ते से देश और प्रदेश भटक जाते है । इसलिये हर मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुये ऐसी ताकतो को सत्ता की चाबी देना चाहिये जो प्रदेश का देश का गौरव बढ़ाये, जनता के कल्याण को प्राथमिकता देें, विकास के प्रति सजग रहे, धर्म संस्कृति, संस्कारों की रक्षक हो, मातृशक्ति का सम्मान करें कृषि प्रधान इस देश के किसानों की चिंता करें । दीपावली की अनंत शुभकामनाओं के साथ आने वाली सरकार प्रदेश के व्यापक हित में काम करें ऐसी मनोकामना के साथ समस्त मतदाताओं से मतदान करने का विनम्र आग्रह है ।

Dainikyashonnati

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