320 सीढिय़ा है यहां-
ऐसा लगता है यहां पर आकर मानो देवी देवताओ ने आकर यहाँ इस क्षेत्र को बसाया हो सीढी से चढऩे पर मात्र 7 से 10 मिनट मे माता के दर्शन के लिए पहुंचा जा सकता है पहाड़ी के माँ शारदा के मन्दिर के लिए 320 सीढिया है, चैत्र एवं शारदेव नवरात्रि पर यहाँ पर यहाँ पर सिवनी जिले के ही नहीं वरन आसपास के राज्यों के लोग भी यहाँ पूजा अर्चना के लिए यहाँ आते है. इस मन्दिर के पहले रामेश्वर सेवादार थे लेकिन वर्तमान में वरघाट निवासी आधार सिंह मर्सकोले पहाड़ के उपर इन मंदिर की देखरेख करते हैं
तीन साल से कार्य अधूरे-
कांचना वन समिति के अध्यक्ष समानन्द गौतम एवं सचिव इंदर सिंह भोयर ने बताया कि ईको टुरिज्म के माध्यम से विकास को लेकर 97 लाख की स्वीकृति वर्ष 2017-18 से की गयी थी जिसमें लगभग 35 लाख के कार्य भी किये गये लेकिन वर्ष 2019- 20 में कोविड के चलते कार्य बन्द हो गया और शेष राशि का आज तक उपयोग नही किया जा सका।-वन विभाग की उदासीनता-
पहाडी पर मन्दिर का कार्य अधुरा है जिसे पूर्ण कराने की आवश्यक है यहा पर आने वाले लोगों को जानकारी के लिए बोर्ड एवं झूले के सामान रखे है मगर वन विभाग की उदासीनता के कारण कार्य बन्द है यहाँ पर स्थाई बिजली अथवा सौर ऊर्जा प्लाट भी लगाया जा सकता है। इस ग्राम के निवासी सोनू बघेल, अरविन्द वासनिक का कहना कि माँ शारदा का मन्दिर की प्रसिद्धि सिद्ध मन्दिर के रूप में है और यहा पर लोगो की मान्यता पूरी होती है. यहाँ पर कोई भी विधायक रहा हो चाहे कमल मसकोले या अर्जुन काकोडिया उन्होने रुचि नहीं ली जबकि सांसद डा. ढालसिंह विसेन अनेको बार आये और विधायक मंत्री तक बने है। संतोष राहगंडाले का कहना है कि इस पयर्टन स्थल के विकास से यहा पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, चूंकि इस पहाड़ी से लगा हुआ जलाशय है जिससे क्षेत्र के 26 गावों की नहरों के माध्यम से खेतो में पानी सप्लाई किया जाता है