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आस्था का अनोखा मेघनाद मेला, रोंगटे खडे कर देता है इसका दृश्य

आस्था का अनोखा मेघनाद मेला, रोंगटे खडे कर देता है इसका दृश्य
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सिवनी यशो:- मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में आदिवासी परंपरा के अनुसार होली के दूसरे दिन मेघनाद मेले का आयोजन किया जाता है जो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में कहीं सुनने को नहीं मिलता यह मेला बहुत ही आश्चर्यचकित करने वाला होता है । इस मेले की मान्यता भी परंपरा और विश्वास का ऐसा पहलू है जिस पर आदिवासी समाज ही नहीं क्षेत्रीयजनों की अटूट श्रद्धा है । इस मेले के बारे में जब स्थानीय और क्षेत्रीय अखबार प्रकाशित करते है तो पाठकों की हमेशा यह प्रतिक्रिया रही है कि ऐसा भी होता है क्या ? लेकिन यह सच है। जिले में होली के ठीक दूसरे दिन मेले का आयोजन होता है जिसे मेघनाथ मेला कहा जाता है। इसकी वजह है कि रावण के पुत्र मेघनाद को आदिवासी ना केवल अपना आराध्य मानते हैं बल्कि उन्हें पूजते भी है। यही कारण है कि होलिका दहन के दूसरे दिन यानी धुलेंड़ी को मेघनाद के नाम पर बाकायदा एक बड़े मेले का आयोजन करते है। दरअसल, आदिवासी लोग अपने आराध्य देव मेघनाद की पूजा लिए होलिका दहन के दूसरे दिन करते है। मेघनाद के पूजने के लिए एक ऐसा ही मेला सिवनी जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर केवलारी विकासखण्ड के ग्राम पांजरा में धुरेंडी को लगता है और इस क्षेत्र में मेघनाद मेले के कारण अनेक ग्रामों में धुरेंडी दूसरे दिन मनायी जाती है ।

एशिया का सबसे बड़ा मेला

  क्षेत्रीय आदिवासी परंपरा का यह मेला एशिया का सबसे बड़ा मेघनाद मेला है ऐसा दावा किया जाता है । इस ऐतिहासिक मेले की खासियत यह है कि इसमें अनेक ग्रामों और जिलों के आदिवासी एकत्रित होते है । https://youtube.com/shorts/dGOhI1I783Y

खंभा होता है पूजा का प्रतीक

यूं तो मेघनाद की कोई प्रतिमा नहीं है लेकिन पूजा के प्रतीक के रूप में 60 फीट ऊंचाई वाले खंभें को गांव के बाहर गाड़ा जाता है। वहीं, इस खंभे पर चढऩे के लिए लगभग 30 फीट की खूंटी लगाई जाती हैं। एक तरह से यह मचान तैयार हो जाती है। जिस पर तीन लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाती है। आदिवासी इसी खंभे के नीचे पूजा अर्चना करते हैं।

मनोकामनाएँ होती है पूरी

आदिवासी समाज के लोग मेघनाद पूजा पर अनेक प्रकार की मन्नते मानते है और मन्नत पूरी होने पर एक 60 फिट के खंभे पर उन्हें आदिवासी पुजारियों द्वारा लटका कर घूमाया जाता है जो विशेष आकर्षण का केन्द्र तो होता ही है देखने वाले इस तरह के दृश्य से आश्चर्यचकित भी होते है । मेघनाद मेले में मनोकामना पूरी होने पर एक खास रस्म को पूरा किया जाता है। जिन महिला-पुरुषों की मनोकामना पूरी होती है उनको मचान पर ले जाकर पेट के सहारे लिटाया जाता है। इसके बाद खम्भे के ऊपरी सिरे में लगी चारों तरफ घूमने वाली लकड़ी से बांधकर घुमाया जाता है। अपनी मन्नतों के आधार पर उसे 60 फीट ऊंचे मंच में घूमना होता है जो मेले का बड़ा आकर्षण होता है। झूलते समय मन्नत वाले व्यक्ति के ऊपर से नारियल फेंका जाता है। इस दौरान आदिवासी हक्कड़े बिर्रे का जयघोष करते हुए वातावरण को गुंजायमान करते हैं। इस आयोजन में दूर-दूर से लोग मेले का आनंद उठाने बड़ी संख्या में पहुंचे।

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