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कलेक्टर सुश्री जैन ने मिट्टी का बाघ बनाकर "बाघदेव अभियान का किया शुभारंभ

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / May 22, 2025 10:20 pm / Post views : 306

कलेक्टर सुश्री जैन ने मिट्टी का बाघ बनाकर "बाघदेव अभियान का किया शुभारंभ
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Seoni 22 May 2025
 सिवनी यशो:- बाघों के संरक्षण महत्व एवं आदिवासी संस्कृति को सम्मान देते हुए बाघों की शक्ति के प्रति उनके विश्वास को नई पहचान देने के उद्देश्य से पेंच प्रबंधन द्वारा "बाघदेव अभियान "की पहल की गई हैं। 22 मई अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर कलेक्टर कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा मिट्टी से बाघ बनाकर की गई। साथ ही कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन, फील्ड डारेक्टर रजनीश सिंह एवं सीईओ जिला पंचायत नवजीवन विजय ने भी मिट्टी से बाघ की प्रतिकृति बनाई। इस अवसर पर कलेक्टर सुश्री जैन ने जिलेवासियो से भी विश्व बाघ दिवस 29 जुलाई तक की अवधि के लिए चलने वाले अभियान के दौरान बढ़-चढ़ के हिस्सा लेने की अपील की।
      उल्लेखनीय हैं कि वन्यजीवों विशेषकर बाघों से मानव संस्कृति का जुड़ाव सदियों पुराना है। मानव समुदायों ने वन्यजीवों विशेषकर बाघों को पूजनीय मानते हुए उन्हें अपने लोकाचार में सदैव ही उच्च विशिष्ट स्?थान प्रदान किया है। संभवत: यही कारण है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी न केवल बाघ और उनके रहवास भारत में सुरक्षित रहे हैं, बल्कि विश्व में सर्वाधिक बाघ भारत में ही हैं। बाघों के संरक्षण में स्थानीय, विशेष कर आदिवासी समुदायों की भूमिका सदैव से अति महत्वपूर्ण रही है, दैनिक रीति-रिवाजों से लेकर जीवन के अनेकों पहलुओं में बाघ के महत्व को स्वीकार करते हुए इन समुदायों ने बाघ को "बाघदेव" के रूप मे स्वीकार किया हुआ है।
         बाघों के संरक्षण महत्व को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने की दृष्टि से प्रतिवर्ष 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है द्य यह एक ऐसा अवसर होता है ज़ब संपूर्ण विश्व बाघ संरक्षण के प्रति अपने प्रयासों और प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करने का प्रयास करता है, इसी उद्देश्य से एक कदम और आगे जाते हुए पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी, मध्यप्रदेश का प्रबंधन भी इस अवसर को आदिवासी संस्कृति को सम्मान देने और बाघों की शक्ति के प्रति उनके विश्वास को नई पहचान देने के अवसर के रूप मे आयोजित करने जा रहा है।
         इस वर्ष पेंच प्रबंधन अंतर्राष्?ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई से विश्?व बाघ दिवस 29 जुलाई तक की अवधि के लिए एक नया अभियान का आरम्भ करने जा रहा है जिसे नाम दिया गया है -

"बाघदेव"

            आज भी " बाघदेव "को ग्रामीण क्षेत्रों में देवता के रूप पूजा जाता है और उनसे मन्नते मांगी जाती हैँ, वरदान मांगे जाते हैं। यह परम्?परा सतत् रूप से आज भी प्रचलित है।"बाघदेव"अभियान के अंतर्गत बफर क्षेत्र की समस्?त 130 इको विकास समितियों में मिट्टी से बाघ बनाने की मुहीम चलाई जाएगीद्यइसके अंतर्गत समिति सदस्य अपने हाथो से मिट्टी के बाघ बनाएंगे। उन्?हें इस कार्य में ग्राम पचधार के मिट्टी के बर्तन और खिलौने बनाने वाले विशेषज्ञ कुम्हार सहायता करेंगेद्य इस दौरान पेंच प्रबंधन द्वारा समिति सदस्?यों को पोस्टर आदि के माध्यम से जागरूक किया जाएगा कि बाघों से ही हमें अपनी प्राणवायु ऑक्सीजन, भोजन, पानी और ऐसे ही बहुत सारे वरदान मिलते हैं। इस अवसर पर ग्रामीण मिट्टी के बाघ बनाकर उससे प्रकृति के इन तत्वों को वरदान के रूप में या फिर कोई अन्य वरदान भी मांग सकते हैं।
            इस प्रकार बने बाघों को पार्क प्रबंधन द्वारा एकत्रित कराकर भट्टी में पकाया जायेगा जिन्हें खवासा में निर्माणाधीनस्टील स्क्रैप से बन रही बाघ कलाकृति के पास स्थापित कर एक नए आस्था स्थल में संजोया जाएगा। पेंच प्रबंधन का प्रयास इस वर्ष टेराकोटा (मिट्टी)के अधिकाधिक बाघ कलाकृति बनाने का हैं । इको विकास समिति के सदस्यों के साथ-साथ पर्यटक एवं अन्य बफर क्षेत्र के बाहर के रहवासी भी इस मुहीम से जुड़ कर अपने हाथ से बाघ बना कर उसमे अपना नाम लिखकर अपनी मनोकामना बाघ देव से मांग सकेंगे द्यबाघ संरक्षण में समुदायों के भावनात्मक जुडाव के साथ यह पचधार के मूर्तिकारों के लिये रोजगार के नये आयाम भी खोलेगा।              

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