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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष -

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Jul 08, 2026 07:19 pm / Post views : 21

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती विशेष -
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डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती 2026: जीवन, बलिदान और राष्ट्रीय एकता का संकल्प
हेमेन्द्र क्षीरसागर पत्रकार, लेखक एवं स्तंभकार, बालाघाट (मध्य प्रदेश) डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति, शिक्षा और राष्ट्रवाद के इतिहास के प्रमुख व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं। वे शिक्षाविद्, लेखक, सांसद, प्रशासक और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रति उनका समर्पण भारतीय जनजीवन में आज भी स्मरण किया जाता है। डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और वर्ष 1934 में वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम आयु के कुलपति बने। यह उपलब्धि उनकी विद्वता और प्रशासनिक क्षमता का प्रमाण मानी जाती है। स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक दौर में वे केंद्र सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे। बाद में तत्कालीन नीतियों, विशेषकर पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदू शरणार्थियों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर मतभेद के कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनका त्यागपत्र भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। मंत्रीमंडल से अलग होने के बाद उन्होंने एक सशक्त विपक्ष की आवश्यकता महसूस की। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से अक्टूबर 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इसके प्रथम अध्यक्ष बने। आगे चलकर यही राजनीतिक धारा भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित हुई। डॉ. मुखर्जी का सबसे चर्चित आंदोलन जम्मू-कश्मीर के विशेष प्रावधानों के विरोध से जुड़ा रहा। उस समय जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान, अलग ध्वज और अलग प्रधानमंत्री की व्यवस्था थी। उन्होंने इसका विरोध करते हुए प्रसिद्ध नारा दिया— "एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान, एक देश में दो विधान—नहीं चलेंगे।" उन्होंने घोषणा की कि वे बिना परमिट के जम्मू-कश्मीर जाएंगे। 11 मई 1953 को लखनपुर में उन्हें गिरफ्तार कर श्रीनगर ले जाया गया। 23 जून 1953 को हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी ऐतिहासिक और राजनीतिक विमर्श का विषय बनी हुई है। लेखक का मत है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और भारतीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके विचारों और संघर्ष ने भारतीय राजनीति को नई दिशा प्रदान की। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए हटाए जाने को लेखक डॉ. मुखर्जी के संकल्प की पूर्ति के रूप में देखते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पण का प्रेरक उदाहरण माना जाता है। उनके विचार और योगदान आज भी भारतीय लोकतंत्र और राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: यह एक लेखक के निजी विचारों पर आधारित विशेष लेख है।

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