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माधवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’: राष्ट्र जीवन में अप्रतिम योगदान

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Feb 18, 2026 09:39 pm / Post views : 398

माधवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’: राष्ट्र जीवन में अप्रतिम योगदान
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हेमेन्द्र क्षीरसागर, पत्रकार, लेखक, स्तंभकार, बालाघाट, मध्यप्रदेश
[caption id="attachment_41867" align="alignright" width="300"]माधवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’ का राष्ट्र जीवन में योगदान हेमेन्द्र क्षीरसागर, पत्रकार, लेखक, स्तंभकार, बालाघाट, मध्यप्रदेश[/caption]

राष्ट्रऋषि माधवराव गोलवलकर का जन्म 19 फरवरी 1906 को नागपुर में हुआ। बचपन से ही मेधावी और सशक्त व्यक्तित्व वाले गोलवलकर ने शिक्षा, खेल और संगीत में उत्कृष्टता प्राप्त की। बाद में उनका सम्पर्क संघ से हुआ और वे राष्ट्र के प्रेरक पुंज बन गए। उनका जीवन समर्पण और राष्ट्रसेवा का जीवंत उदाहरण है।

बाल्यावस्था और शिक्षा

उनके पिता सदाशिव गोलवलकर रामटेक में अध्यापक थे। माधवराव बचपन से अत्यंत मेधावी थे। कक्षा में सभी प्रश्नों का उत्तर वे सबसे पहले देते थे। इतना ही नहीं, गणित के एक कठिन प्रश्न का हल भी उन्होंने एक बार अकेले किया, जब किसी और को उत्तर नहीं सूझा।

सर्वांगीण प्रतिभा

माधवराव ने पाठ्यक्रम के अतिरिक्त अन्य पुस्तकें पढ़ी, हॉकी, टेनिस खेला, सितार और बाँसुरी वादन में दक्ष हुए। उच्च शिक्षा के लिए काशी गए और वहीं उनका संपर्क संघ से हुआ। डा. हेडगेवार से मिलकर उनका संघ के प्रति विश्वास और दृढ़ हो गया।

राष्ट्र के प्रेरक पुंज

माधवराव गोलवलकर 'गुरूजी' ने नागपुर लौटकर संघ कार्य में संपूर्ण समर्पण दिखाया। 1939 में डा. हेडगेवार ने उन्हें सरकार्यवाह का दायित्व दिया और 21 जून 1940 से वे सरसंघचालक बने। स्वतंत्रता और विभाजन की कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने संघ को दिशा दी और 1948 में जेल जाने के बाद भी धैर्य से संगठन का संचालन किया।

विचार दृष्टि और योगदान

गुरुजी का धर्मग्रंथों और हिन्दू दर्शन पर अधिकार था। उन्हें शंकराचार्य की पदवी के लिए नाम प्रस्तावित किया गया था, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। उनका अध्ययन और चिंतन सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए प्रेरक और दिशा-निर्देशक बन गया।

महाप्रयाण और विरासत

1970 में कैंसर से पीड़ित गुरुजी ने शल्य चिकित्सा के बाद भी प्रवास जारी रखा। शरीर की सीमाओं के बावजूद उन्होंने संघ कार्य और राष्ट्रसेवा में योगदान दिया। 5 जून 1973 को उन्होंने शरीर छोड़ दिया। उनका राष्ट्रजीवन और विचार दृष्टि सदैव प्रेरणा स्रोत रहेंगे।

गुरूजी का अमर योगदान

माधवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’ ने अपने समर्पण, शिक्षा और संगठन क्षमता के माध्यम से राष्ट्र जीवन में अद्वितीय योगदान दिया। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं।

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