भोपाल में राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 का शुभारंभ, देश में 198 लाख टन और मध्यप्रदेश में 4.45 लाख टन मत्स्य उत्पादन
भोपाल यशो :- मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में निवेश, रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को विस्तार देने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।
सम्मेलन का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका को मजबूत करना है। मत्स्य पालन आज देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ तीन करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने, प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार और बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
देश में 198 लाख टन मत्स्य उत्पादन
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन मत्स्य उत्पादन दर्ज किया। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक योगदान अंतर्देशीय मत्स्यिकी का रहा। देश में नदियों, तालाबों, जलाशयों और अन्य अंतर्देशीय जल संसाधनों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं।
केंद्र सरकार ने पिछले दशक में मत्स्य क्षेत्र में 39,272 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। इस निवेश का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन, आधारभूत सुविधाओं, रोजगार और बाजार व्यवस्था को मजबूत करना है। निवेशक सम्मेलन के माध्यम से इस क्षेत्र में निजी निवेश और निर्यात संबंधी अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मध्यप्रदेश में 4.45 लाख टन उत्पादन
मध्यप्रदेश ने वित्त वर्ष 2024-25 में 4.45 लाख टन मत्स्य उत्पादन किया। राज्य में जलाशयों, तालाबों और अन्य जल संसाधनों की उपलब्धता मत्स्य पालन के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। प्रदेश में 910 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और मत्स्य निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन नीति-2026 जैसी पहलों के जरिए इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
भोपाल के निकट हलाली जलाशय स्थित 316 केज वाले क्लस्टर को भी मत्स्य उत्पादन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया है। केज कल्चर के माध्यम से जलाशयों में नियंत्रित परिस्थितियों में मछली पालन किया जा सकता है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने और मत्स्य पालन को व्यावसायिक गतिविधि के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बनती हैं।
49 जलाशयों और पांच अमृत सरोवरों के विकास का प्रावधान
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 88.25 करोड़ रुपये की लागत से 49 जलाशयों और पांच अमृत सरोवरों के विकास का प्रावधान किया गया है। इन जल संसाधनों का बेहतर उपयोग मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने में सहायक हो सकता है।
मत्स्य क्षेत्र के विकास से मछुआरों, मत्स्य पालकों, प्रसंस्करण इकाइयों, परिवहन और विपणन से जुड़े लोगों को लाभ मिलने की संभावनाएं हैं। उत्पादन के साथ गुणवत्ता, शीत भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात मानकों पर ध्यान दिया जाए तो प्रदेश के मत्स्य उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
राष्ट्रीय फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 को इसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब इन नीतिगत प्रयासों का वास्तविक लाभ निवेश, उत्पादन, रोजगार और मछुआरों की आय में होने वाली वृद्धि से आंका जाएगा।