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Dainik Yashonnati
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रेबीज एक अनजाना खतरा : पशु चिकित्सक ने जारी की एडवाइजरी

रेबीज एक अनजाना खतरा : पशु चिकित्सक ने जारी की एडवाइजरी
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छपारा यशो:- बरसात के मौसम में सक्रिय होने वाला संक्रामक रोग है रेबीज जो पशुओं के काटने से मनुष्य में फैलता है विशेष तौर पर श्वान के काटने से मनुष्यो में रेबीज का संक्रमण होता है। इस विषय को लेकर पशु चिकित्सक डॉक्टर एस के गौतम ने लोगों को जागरूक करने को उद्देश्य से जानकारी दी है, उन्होंने बताया कि रेबीज एक वायरस जनित बीमारी है जो रेबीज से ग्रसित जानवर के किसी भी पशु या मानव जाति को काटने से फैलती है। रेबीज का पूरा नाम है rabies =rabid animal biting induced encephalomyelitis syndrome. अर्थात यह बीमारी रेबीज से ग्रसित पशु के दूसरे पशु को काटने के कारण होती है। प्रति वर्ष भारत मे करीब 72 हजार मौते इस बीमारी से हो जाती है। इसके साथ ही ऐसे लोग जिन्होंने अपने घर में कुत्ते पाले है उन्हें भी अपने कुत्ते को प्रतिवर्ष एंटी रेबिस टीका लगवाना सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही यह भी देखने में आया है कि लोग अपने कुत्ते को बच्चो के खेलने के मैदान में छोड़ देते है,तब कुत्ते बच्चो पर अटेक कर देते है हाल ही में छपारा नगर की एक घटना प्रकाश में आई जिसमे नगर के खेरमाई मंदिर के पास खेल रहे राजा नाम के बच्चे को कुत्ते ने बुरी तरह नोच लिया। ऐसे मामलो में कुत्ते के मालिक पर एफ. आई.आर. दर्ज करवाई जा सकती है, अत: वह सभी लोग जिन्होंने अपने घरों में कुत्ते पाले है वे अपने पशु को सार्वजानिक स्थान पर खुला न छोड़े अन्यथा उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वही देखा गया की मानव जाति के मुकाबले रैबीज से संक्रमित होकर मरने वाले पशुओं की मृत्यु संख्या का रेकॉर्ड नही रखा जाता, इसी वजह से यह संख्या अप्राप्त है, किंतु मौते पशुओ में भी देखी जाती है। मेरे द्वारा भ्रमण के दौरान देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रो में खासकर जंगल से लगे इलाको में पशुओ में खासकर गाय और भैंसों में रेबीज जैसे लक्षण देखे जा रहे है। इस साल भी ग्राम पायली खुर्द से लेकर उमरिया ग्राम और वंहा से कुकलाह तक के बहुत से जानवरो को एक पागल कुत्ते ने काट लिया था साथ ही अलोनिया ग्राम के दो व्यक्ति जो इस पागल कुत्ते के शिकार हुए वह सिवनी के जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इसी वजह से ऐसी स्थिति होने पर सभी को टीका लगवाने की सलाह दी जाती है । साथ ही इस सम्बंध में सभी लोगो को सलाह दी जाती है कि अपने पालतू कुत्तो और बिल्लियों को प्रति वर्ष रेबीज का टीका अवश्य लगवाए एवम जो लोग जंगलो के किनारे अपने पशुओ को चराने लेकर जाते है उन्हें विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है। हो सकता है कोई जंगली जानवर सियार या भेडिय़ा आपके पशु को काट ले और आपको पता ही नही चले। इस स्थिति में किसान को तब पता चलता है जब पशु में रेबीज के लक्षण उत्पन्न हो जाते है। चुकी यह बीमारी लाइलाज है अत: एक बार रेबीज के लक्षण आ जाने के बाद उपचार संभव ही नही है। रेबीज के मुख्य लक्षण है जानवर के स्वभाव मे अचानक परिवर्तन आना उसका अपने मालिक के इशारे नही मानना। हमला करना, हर चीज को काटने की कोशिश करना। बहुत सारी लार टपकाना। अगर आपके पशु में ऐसे लक्षण दिखे तो समझना चाहिए कि उसे रेबीज भी हो सकता है। चुकी जानवर अपने को किसी पागल कुत्ते या अन्य पशु द्वारा काटा जाना बता नही सकते अत: जंगल के नजदीक पशु चराने लेकर जाने वाले पशु पालकों को नियमित रूप से शाम को अपने पशुओ की जांच करनी चाहिए कि कंही उसे किसी हिंसक जीव ने तो नही काटा है या पशु के शरीर पर दांतो के निशान तो नही है। ऐसे निशान देखने पर तुरंत निकट के पशु औषधालय या चिकित्सालय में संपर्क करें।ताकि उस पशु को सुरक्षा के लिए रेबीज का टिका लगवाया जा सके। जंगलो के नजदीक चरने वाले पशुओ में सियार या लोमड़ी या ऐसे अन्य जीव जो रेबीज फैला सकते है से भिड़ंत की ज्यादा संभावना होती है। चुकी रेबीज का इलाज सिर्फ टीकाकरण है अत: पशुओ में दांतो के काटे जाने का निशान दिखने पर तुरन्त रेबीज का टीका लगवाए। ऐसा करके आप अपने पशु को अकाल मृत्यु से बचा सकते है और स्वयं आर्थिक हानि से बच सकते है।

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