Seoni 10. September 2026
सिवनी यशो:- कृषि प्रधान सिवनी जिले में किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए विशेष महत्व रखने वाला पोला पर्व श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने अपने कृषि कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों एवं अन्य पशुधन की पूजा-अर्चना कर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।
इसी क्रम में केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह ने ग्राम बर्रा स्थित अपने गृह निवास पर पारंपरिक पोला पर्व श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया। उन्होंने विधि-विधान से बैलों की पूजा-अर्चना की, तिलक लगाया और उन्हें स्नेहपूर्वक सजाया। इस दौरान ग्रामीण संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़े इस पर्व का उल्लास दिखाई दिया।
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पोला पर्व के अवसर पर बैलों की पूजा-अर्चना करते केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह।[/caption]
किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है पोला पर्व
पोला केवल एक धार्मिक या पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि किसान और उसके पशुधन के बीच वर्षों से चले आ रहे आत्मीय संबंध का प्रतीक है। खेती-किसानी के कार्यों में बैलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। खेत की जुताई से लेकर कृषि के अनेक कार्यों में किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाले बैलों के सम्मान में यह पर्व मनाया जाता है।
पोला के अवसर पर किसान अपने बैलों को काम से विश्राम देते हैं। उन्हें नहलाकर साफ किया जाता है, सींगों और शरीर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है तथा नए साज-सज्जा के सामान पहनाए जाते हैं। इसके बाद परिवार के लोग विधि-विधान से उनकी पूजा कर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हैं।
बैलों को सजाकर खिलाए जाते हैं तरह-तरह के पकवान
पोला पर्व की सबसे खास परंपराओं में बैलों का श्रृंगार और पूजा शामिल है। किसान अपने पशुधन को विशेष रूप से सजाते हैं। बैलों के सींगों पर रंग लगाया जाता है और उन्हें आकर्षक रूप दिया जाता है। कई स्थानों पर बैलों को फूलों, कपड़ों और पारंपरिक आभूषणों से भी सजाया जाता है।
पूजा-अर्चना के बाद घरों में तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के पकवान और पारंपरिक व्यंजन बैलों को खिलाए जाते हैं। किसान इसे अपने पशुधन के प्रति प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने के अवसर के रूप में देखते हैं।
जिलेभर में श्रद्धा के साथ मनाया गया पर्व
सिवनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पोला पर्व का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। गांव-गांव में किसान अपने पशुधन की पूजा करते हैं और परिवार के साथ इस पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाते हैं।
किसानों के लिए यह दिन उनके जीवन और खेती से जुड़े पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर होता है। आधुनिक कृषि उपकरणों और बदलती खेती की पद्धतियों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पोला की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ कायम है।
यह पर्व नई पीढ़ी को भी ग्रामीण संस्कृति, कृषि परंपराओं और पशुधन के महत्व से जोड़ने का माध्यम बनता है।
कृषि संस्कृति और मानव-पशु संबंधों का उत्सव
पोला पर्व किसान और पशुधन के बीच केवल उपयोगिता का नहीं, बल्कि विश्वास, सहयोग और आत्मीयता का रिश्ता दर्शाता है। किसान वर्षभर अपने पशुधन के साथ खेती के कार्यों में जुटा रहता है और पोला के दिन उसके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।
इस अवसर पर विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह ने कहा कि पोला पर्व कृषि और ग्रामीण जीवन में पशुधन के महत्व को दर्शाने वाली हमारी समृद्ध लोक परंपरा एवं संस्कृति का प्रतीक है। यह पर्व किसानों और उनके सहयोगी पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने क्षेत्रवासियों को पोला पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
रिपोर्ट: नरेश उर्फ नीलू यादव, सिवनी