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चार महीने से मानदेय अटका, रसोइयों की दिवाली पर संकट! उधारी में बच्चों को भोजन खिला रहे स्व-सहायता समूह

मिर्च-मसाला की लागत राशि भी लंबित, करीब चार हजार रसोइयों के परिवार आर्थिक तंगी से परेशान; कलेक्टर-CEO को ज्ञापन देकर भुगतान की मांग, आश्वासन के बाद अब आंदोलन की चेतावनी

मण्डला यशो  :- स्कूलों में बच्चों को भोजन परोसने वाले रसोइयों और मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले स्व-सहायता समूहों के सामने अब आर्थिक संकट गहराने लगा है। मध्यान्ह भोजन (पोषण शक्ति) योजना में कार्यरत लगभग चार हजार रसोइयों का मानदेय और समूहों की मिर्च-मसाला सहित भोजन तैयार करने की लागत राशि कथित तौर पर चार महीने से लंबित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिनके भरोसे स्कूलों में बच्चों की थाली सजती है, वे खुद अपने परिवार की जरूरतें कैसे पूरी करें?

मंडला में 4 महीने से रसोइयों का मानदेय लंबित, दिवाली पर संकट
मंडला में लंबित मानदेय और मध्यान्ह भोजन की लागत राशि के भुगतान की मांग को लेकर रसोइया उत्थान संघ समिति ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

रक्षाबंधन के बाद अब दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार सामने हैं, लेकिन भुगतान नहीं होने से रसोइयों और समूहों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रसोइया उत्थान संघ समिति ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन सौंपा और लंबित राशि का तत्काल भुगतान कराने की मांग की।

दुकानदारों ने उधार देने से किया किनारा, भोजन व्यवस्था पर असर

संघ के अनुसार, मानदेय नहीं मिलने से रसोइयों के परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वहीं स्व-सहायता समूहों के सामने बच्चों के लिए निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन तैयार कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। समूहों को गैस सिलेंडर, दाल, सब्जी, तेल-मसाले और अन्य जरूरी सामग्री उधारी में खरीदनी पड़ रही है।

मंडला में 4 महीने से रसोइयों का मानदेय लंबित, दिवाली पर संकट
मंडला में लंबित मानदेय और मध्यान्ह भोजन की लागत राशि के भुगतान की मांग को लेकर रसोइया उत्थान संघ समिति ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

लगातार उधारी बढ़ने के कारण दुकानदार भी अब सामान देने में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में स्कूलों में बच्चों को नियमित और मीनू आधारित भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

संघ ने सवाल उठाया कि महंगाई के दौर में जब एक सामान्य परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है, तब बिना समय पर भुगतान के सैकड़ों बच्चों के भोजन की व्यवस्था संभालना समूहों के लिए कितना कठिन होगा।

चार महीने का मानदेय और लागत राशि तत्काल जारी करने की मांग

रसोइया उत्थान संघ समिति ने जून से अक्टूबर तक के लंबित मानदेय एवं समूहों की लागत राशि का भुगतान करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जून माह का मानदेय पिछले कई वर्षों से लंबित रहने की समस्या भी बनी हुई है, जबकि स्कूल खुलने के साथ ही 16 जून से मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम शुरू हो जाता है।

संघ ने मांग की है कि पिछले पांच वर्षों से लंबित जून माह के मानदेय का भी भुगतान किया जाए। साथ ही, भोजन संचालन के लिए आवश्यक लागत राशि हर महीने अग्रिम रूप से उपलब्ध कराई जाए और भुगतान की एक निश्चित तारीख निर्धारित की जाए, ताकि रसोइयों एवं समूहों को बार-बार आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

 ज्ञापन के बाद भुगतान का आश्वासन, आंदोलन की चेतावनी

जिला पंचायत के मध्यान्ह भोजन प्रभारी ऋषभ सिंह को ज्ञापन सौंपने पर संगठन को इसी सप्ताह भुगतान प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन मिलने की बात कही गई है। हालांकि, लगातार लंबित भुगतान से परेशान संगठन अब केवल आश्वासन के भरोसे इंतजार करने को तैयार नहीं है।

संघ ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि दशहरे तक भुगतान नहीं होने पर कलेक्ट्रेट के सामने अनशन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि रसोइयों और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक परेशानी को देखते हुए प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

मुख्यमंत्री तक पहुंचाई गई मांग, फिर भी भुगतान लंबित

संघ के अनुसार, जून माह के मानदेय सहित अन्य लंबित भुगतानों के संबंध में मुख्यमंत्री तक भी ज्ञापन भेजा जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से रसोइयों और समूहों में नाराजगी है।

रसोइया उत्थान संघ समिति के बैनर तले संस्थापक-संयोजक पी.डी. खैरवार के मार्गदर्शन और जिलाध्यक्ष कुंवर सिंह मरकाम के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जयंती अहिरवार, सुरेश बघेल, कृष्णा धार्वैया, गंगोत्री विश्वकर्मा, प्रीति विश्वकर्मा, रमेश मरावी सहित बड़ी संख्या में रसोइया उपस्थित रह

त्योहार से पहले भुगतान की आस

रसोइयों और स्व-सहायता समूहों की मांग केवल बकाया राशि पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समयबद्ध भुगतान व्यवस्था चाहते हैं, जिससे बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी निभाने के साथ अपने परिवारों की जरूरतें भी पूरी कर सकें।

अब निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर हैं। देखना होगा कि इसी सप्ताह भुगतान शुरू करने का दिया गया आश्वासन कितना प्रभावी साबित होता है और क्या रसोइयों तथा समूहों को त्योहार से पहले राहत मिल पाती है।

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