मध्यप्रदेशसिवनी

निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली व पुस्तकों-यूनिफॉर्म में एकाधिकार के खिलाफ ज्ञापन सौंपा

सिवनी यशो :-  निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूली, पुस्तकों एवं यूनिफॉर्म के लिए निर्धारित दुकानों से खरीद का अनैतिक दबाव बनाए जाने तथा नए शैक्षणिक सत्र से पूर्व प्रभावी प्रशासनिक तैयारी की मांग को लेकर
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, महाकोशल प्रांत की ओर से
मध्यप्रदेश शासन के नाम जिला कलेक्टर महोदय सिवनी के माध्यम से एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।

संगठन द्वारा ज्ञापन में निजी विद्यालयों से जुड़ी वास्तविक एवं तथ्यपरक समस्याओं को रेखांकित करते हुए बताया गया कि वर्तमान में अभिभावक गंभीर आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

Akhil Bharatiya Grahak Panchayat submitting memorandum to Seoni Collector against private school fee hike and book uniform monopoly
निजी विद्यालयों की मनमानी फीस और किताब-यूनिफॉर्म एकाधिकार के खिलाफ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा जिला कलेक्टर सिवनी के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपते पदाधिकारी।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख समस्याएँ

  • मनमानी फीस वृद्धि : बिना सक्षम प्राधिकरण की अनुमति के प्रतिवर्ष ट्यूशन फीस, वार्षिक शुल्क, गतिविधि शुल्क एवं अन्य मदों में अनुचित वृद्धि की जा रही है।
  • पुस्तक एवं यूनिफॉर्म में एकाधिकार : विद्यालय विशेष प्रकाशक या निर्धारित दुकानों से ही पुस्तकें एवं यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाते हैं, जिससे मुक्त प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और अभिभावकों को अधिक मूल्य चुकाना पड़ता है।
  • अभिभावकों की विवशता : बच्चों की पढ़ाई एवं भविष्य प्रभावित होने के भय से अधिकांश अभिभावक विरोध दर्ज नहीं करा पाते, जिससे यह शोषण निरंतर जारी रहता है।
  • मानसिक एवं सामाजिक प्रभाव : अनावश्यक आर्थिक बोझ के कारण अभिभावकों में तनाव, पारिवारिक असंतुलन तथा बच्चों पर मनोवैज्ञानिक दबाव उत्पन्न हो रहा है, जो शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत है।
  • उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन : शिक्षा सेवा प्राप्त करने वाले अभिभावक उपभोक्ता की श्रेणी में आते हैं, परंतु निजी विद्यालय उनकी पसंद और स्वतंत्रता को सीमित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री महोदय से की गई सशक्त मांगें

  1. नए शैक्षणिक सत्र के पूर्व प्रदेश के सभी जिलों में स्पष्ट एवं कठोर निर्देश जारी किए जाएँ कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तक, यूनिफॉर्म अथवा अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा।
  2. विद्यालयों को केवल पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराने हेतु बाध्य किया जाए, किसी भी दुकान, प्रकाशक या विक्रेता का नाम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से न जोड़ा जाए।
  3. फीस निर्धारण एवं वृद्धि पर जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी समिति सक्रिय की जाए तथा नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
  4. प्रत्येक जिले में कलेक्टर महोदय के अधीन एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए, जिससे अभिभावक बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
  5. परीक्षा परिणाम, प्रमोशन अथवा नई कक्षा में प्रवेश को फीस, पुस्तकों या यूनिफॉर्म की खरीद से जोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
  6. आदेशों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विद्यालय की मान्यता निलंबन अथवा निरस्तीकरण तक की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की जिला इकाई सिवनी के
जिला अध्यक्ष दीपक तिवारी सहित विधि प्रकोष्ठ के सदस्य
अधिवक्ता अदीप आर्य, आशीष महुले, श्रेयांश शुक्ला, नीरज मिश्रा, आशीष सोलंकी एवं आशीष पाठक उपस्थित रहे।

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