पटवारियों पर कार्रवाई का सिलसिला—महज संयोग या राजस्व विभाग की बड़ी मुहिम?
सिवनी में सात पटवारियों की वेतनवृद्धि रोकी, जबलपुर-रीवा-अनूपपुर में भी कार्रवाई; छिंदवाड़ा में पटवारी की संपत्तियों को लेकर उठ रहे सवाल—क्या प्रदेशभर में राजस्व अमले की जवाबदेही तय करने का दौर शुरू?
मध्यप्रदेश में पटवारियों पर कार्रवाई का सिलसिला, सिवनी में 7 की वेतनवृद्धि रोकी
सिवनी यशो :- मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में पटवारियों के विरुद्ध सामने आ रही लगातार कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सिवनी में अवैध वृक्ष कटाई से जुड़े प्रकरण में एक साथ सात पटवारियों की दो-दो वेतनवृद्धियां रोकने और तत्कालीन एसडीएम के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू किए जाने की कार्रवाई सामने आई है। वहीं, जबलपुर, रीवा और अनूपपुर सहित अन्य जिलों में भी अलग-अलग मामलों में पटवारियों के विरुद्ध कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह महज संयोग है या मध्यप्रदेश में राजस्व अमले की जवाबदेही तय करने के लिए किसी व्यापक अभियान की शुरुआत हो चुकी है?
सिवनी में सात पर कार्रवाई ने बढ़ाई चर्चा
बरघाट तहसील के अवैध वृक्ष कटाई प्रकरण में जांच के दौरान पटवारियों द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आने के बाद कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने सात पटवारियों की दो-दो वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोक दीं। वहीं, तत्कालीन एसडीएम संदीप श्रीवास्तव के विरुद्ध भी संभागायुक्त जबलपुर ने विभागीय जांच शुरू की है।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक मामला सीमित नहीं रहा, बल्कि तत्कालीन एसडीएम की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।
जबलपुर, रीवा और अनूपपुर में भी कार्रवाई
सिवनी की कार्रवाई के बीच प्रदेश के अन्य जिलों में पटवारियों के विरुद्ध अलग-अलग कारणों से हो रही कार्रवाई ने तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है। कहीं राजस्व अभिलेखों में लापरवाही, कहीं शासकीय भूमि से जुड़े मामले तो कहीं कर्तव्यों के निर्वहन में अनियमितता को लेकर कार्रवाई की जा रही है।
अब सवाल यह है कि क्या इन मामलों के पीछे स्थानीय स्तर पर हुई अलग-अलग शिकायतें हैं अथवा राजस्व विभाग ने पटवारी से लेकर ऊपर तक जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है?
छिंदवाड़ा में संपत्ति को लेकर भी सवाल
इसी बीच छिंदवाड़ा में पटवारी याचना सोनी की संपत्ति को लेकर उठ रहे सवालों ने भी चर्चा को नया आयाम दिया है। खजरी हल्के में कथित अवैध कॉलोनी में करीब 4,000 वर्गफुट भूखंड खरीदे जाने के मामले में एसडीएम द्वारा नोटिस जारी कर जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद वर्ष 2021 में लोनियाकरबल की भायदे कॉलोनी में खरीदे गए मकान का मामला भी चर्चा में आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मकान की रजिस्ट्री 31 लाख 21 हजार रुपये में हुई थी, जबकि उसके वास्तविक सौदे का मूल्य करीब 50 लाख रुपये बताया जा रहा है।
हालांकि, केवल रजिस्ट्री मूल्य और बताए जा रहे सौदे के मूल्य में अंतर के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए रजिस्ट्री दस्तावेज, बाजार मूल्य, भुगतान का स्रोत, आय के ज्ञात साधन और संबंधित संपत्ति के आधिकारिक अभिलेखों की जांच जरूरी है।
क्या प्रदेश में राजस्व अमले की निगरानी बढ़ी?
यही वह बिंदु है जहां इन घटनाओं को एक साथ रखकर देखने की जरूरत महसूस होती है। सिवनी में सात पटवारी, जबलपुर-रीवा-अनूपपुर में कार्रवाई और छिंदवाड़ा में संपत्ति को लेकर उठते सवाल—क्या ये सभी घटनाएं अपने-अपने स्थानीय कारणों से हुई हैं या इनके पीछे कोई व्यापक प्रशासनिक संदेश है?
यदि यह विभागीय स्तर पर चल रही मुहिम है, तो इसका उद्देश्य राजस्व रिकॉर्ड, भूमि संबंधी मामलों और सरकारी संपत्तियों से जुड़े कामकाज में जवाबदेही बढ़ाना हो सकता है। लेकिन यदि कार्रवाई केवल अलग-अलग शिकायतों और स्थानीय जांचों का परिणाम है, तो भी इतनी घटनाओं का एक ही समय में सामने आना अपने आप में पड़ताल का विषय है।
असली सवाल—आदेशों की कड़ियां क्या कहती हैं?
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित जिलों में जारी कार्रवाई के आदेशों को सामने रखकर उनकी तारीख, आरोप, जांच अधिकारी, कार्रवाई का आधार और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश की तुलना की जाए।
क्या सभी मामलों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई गई?
क्या कहीं विभागीय स्तर से विशेष निर्देश जारी हुए?
क्या कार्रवाई का दायरा केवल पटवारियों तक है या आरआई, तहसीलदार और एसडीएम स्तर तक भी जवाबदेही तय की जा रही है?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या मध्यप्रदेश के राजस्व विभाग में अब “काम में लापरवाही” पर कार्रवाई का नया दौर शुरू हो गया है, या फिर अलग-अलग जिलों की घटनाओं को एक बड़े अभियान के रूप में देखना जल्दबाजी होगी?
इन सवालों के जवाब संबंधित विभागीय आदेश और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल इतना जरूर है कि पटवारियों पर लगातार हो रही कार्रवाई ने प्रदेश के राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।



