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Dainik Yashonnati
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.....और पूरे प्रदेश में छा गया चल गया शिवराज का "एम के वाय" फार्मूला

.....और पूरे प्रदेश में छा गया चल गया शिवराज का "एम के वाय" फार्मूला
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सिवनी यशो:- मध्य प्रदेश में 18 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की सत्ता में प्रचंड बहुमत के साथ जबरदस्ती वापसी के पीछे "एम के वाय" फेक्टर का सबसे बड़ा योगदान माना जा रहा है और इसी फेक्टर ने शिवराज सरकार की एंटी इंकबंसी को प्रो इंकबंसी में बदलने में सारे अनुमानों को ध्वस्त कर दिया । मध्यप्रदेश के परिणामों में एम के वाय फार्मूले ने भाजपा को जबदस्त समर्थन दिया । "एम के वाय" फार्मूला का मतलब प्रदेश की आधी आबादी महिला वर्ग के लिये आकर्षित करने वाली लाड़ली बहना योजना के का मतलब किसानों को आकर्षित करने वाले समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस की योजना जिसमें किसानों को गेहूँ का 2700 रूपये प्रति क्विँटल एवं धान का मूल्य 3100 रूपये देने की घोषणा एवं वाय मतलब युवाओं को रोजगार प्रदान करने की गारंटी वाली योजना सीखो सिखाओ कमाओं योजना ने भाजपा को प्रचंड बहुमत प्रदान का कामाल किया है । भारतीय जनता पार्टी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का इतना जबरदस्त अंडर करेंट रहेगा इसका किसी भी राजनैतिक विशलेषक को अनुमान नहीं था । प्रदेश में विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। राजनैतिक विशलेषक जनता को पढऩे में सफल नहीं रहे परिणामों ने सिद्ध कर दिया है कि मतदाता मतपेटियों में अपने मत को बंद कर देता है परंतु उसका सार्वजनिक प्रगटीकरण नहीं करता । एक साल पहले से राजनैतिक पंडित जनता की नब्ज टटोल रहे थे और मतदान के पश्चात तक सर्वे किये गये उसके बाद भी अंत तक बताया जाता रहा है कि भाजपा और कांग्रेस में सत्ता को लेकर कांटे की टक्कर है परंतु जब इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों से परिणाम आये तो परिणामों ने सभी को चौँका दिया । पूरे प्रदेश में भाजपा को मतगणना के प्रारंभिक चरण से भारी बहुमत प्रदान करने के संकेत प्रदान किये । डेढ वर्ष कमलनाथ सरकार के शासन को छोड़ दिया जाये तो 20 साल से सत्ता की बागडोर संभाल रही भाजपा के प्रति राजनैतिक पंडित साल भर से प्रचारित करते रहे कि शिवराज सरकार के प्रति प्रदेश में जनाक्रोश है मामा शिव ने साबित कर दिया कि सूबे में अब भी उनका ही राज रहने वाला है। बता दें कि 230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में अब तक आए चुनावी नतीजों पर नजर डाले तो भाजपा 130 से ज्यादा सीटों के साथ प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है।

युवाओं, किसानों एवं महिला सशक्तिकरण ने किया कमाल

मध्य प्रदेश में 18 साल तक सत्ता में रहने के बाद भी मामा शिवराज सिंह चौहान ने अपने खिलाफ बने एंटी इंकबंसी को प्रो इंकबंसी में बदल दिया। इसमें उनकी सरकार की तरफ से युवा के लिये सीखो कमाओ योजना, किसानों को समर्थन मूल्य के अतिरिक्त बोनस के माध्यम से गेंहूँ का मूल्य 2700 प्रति क्विंटल एवं धान का मूल्य 31 सौ रूपये प्रति क्विँटल देने की योजना के साथ लाड़ली बहना योजना ने अहम किरदार निभाया। बता दें कि मध्य प्रदेश की 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपये हर महीने दिये जा रहे हैं। इन योजनाओं ने शिवराज के लिए एक लाभार्यी वर्ग बना दिया। एमपी की 7 करोड़ आबादी में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों ने शिवराज को भर भर कर वोट दिया है। इन महिलाओं लड़कियों के लिए शिवराज का नाम एक भरोसा था, इस पर उन्होंने यकीन किया। अनुमान है कि बीजेपी अगर कांग्रेस का परंपरागत वोटर माने जाने वाले एससी-एसटी वोट में भी सेंध लगाती नजर आ रही है तो इसके पीछे लाडली बहना योजना बताई जा रही है। एमपी की बेटियों ने शिवराज की इस स्कीम को भविष्य की गारंटी समझा और वोट दिया।

कमलनाथ के 18 माह- शिवराज के 18 साल

इस चुनाव में शिवराज ने न सिर्फ योजनाओं को प्रचारित किया। बल्कि अपने पुराने रिकॉर्ड का भी हवाला दिया और भाजपा ने बताया कि उसके द्वारा गांव और शहर के लिये क्या क्या काम किये गये । मजदूरों किसानों, व्यापारियों एवं शासकीय सेवको के लिये किये गये काम का आंकडों के साथ रिकार्ड प्रस्तुत किया । अपने 18 साल के गवर्नेंस की दुहाई दी। इस दौरान शिवराज ने गांव की बेटी और लाडली लक्ष्मी योजना का हवाला दिया। वहीं, उन्होंने 2018 से 2020 तक चली कमलनाथ के सरकार को लेकर जमकर निशाना साधा। सरकार ने सड़के बनायी, बिजली देने में सफल रही, सिंचाई योजनाओं का ऐतिहासिक विकास किया । यह सभी कार्यो को आंकड़ो सहित बताया ।

सरकारी चौपालो का भी रहा व्यापक असर

शिवराज सरकार ने किये कार्यो को हर प्रकार के प्रचार तंत्र के माध्यम से आम जनता को बताया वहीं पिछले कुछ माहों में अनेक तरह की चौपालो के माध्यम से हर वर्ग को खुश करने का जो काम किया उसके परिणाम यह हुये कि जनता में व्यापक असर हुआ है । शिवराज ने कल्याणकारी घोषणाओं की बाढ़ लगा दी। उन्होंने राज्य के 30 लाख जूनियर स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन और भत्ते में वृद्धि की। आशा उषा कार्यकत्र्ताओं को मानदेय बढ़ाने की घोषणा की । कोटवारो की चौपाल लगायी और उनसे आत्मीय ढंग से मिले पत्रकारों की चौपाल में पत्रकार हितो की अनेक घोषणाएँ की , आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी तोहफा दिया और उनका वेतन 10,000 रुपये से बढ़ाकर 13,000 रुपये किया. इसके अलावा शिवराज ने रोजगार सहायकों का मानदेय दोगुना (9,000 रुपये से 18,000 रुपये) करने और जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और उपसरपंच और पंच जैसे नेताओं का मानदेय तीन गुना करने का भी वादा किया है। अनेक सामाजिक संगठनों, खेल प्रतिभाओं के लिये लोक लुभावनी घोषणाएँ की । वहीं कांग्रेस के नेता इन घोषणाओं पर प्रश्र खड़े करते रहे और प्रदेश के मुख्यमंत्री को घोषणावीर मुख्यमंत्री बताकर जनता की खुशी पर दुख प्रगट करने से जनता में कांग्रेस के प्रति द्वेष पैदा हुआ।

आस्था के केन्द्रो के प्रति भाजपा लगाव मतदाताओं में रहा प्रभावकारी

भारीतय जनता पार्टी ने धार्मिक आस्था के केन्द्रों के प्रति जो लगाव दिखाया उसका आम जनता पर व्यापक असर रहा वहीं सनातन का मुद्दा प्रदेश की जनता के मन मस्तिक पर बैठ गया और भाजपा की सनातन रक्षक छवि को अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ । प्रदेश में हिंदुत्व की जड़ें काफी गहरी हैं और हित्ववादी संगठनों का प्रभाव भी प्रदेश में उसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस हिन्दुत्व को छेडऩे में अपनी दुर्दशा को भांप चुकी थी परंतु चोरी छिपे गैर हिन्दुवादी संगठनों से चर्चा कर जो बाते कांग्रेसी नेता कहते थे वह सार्वजनिक या प्रयोजित तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल होते रही है । कथित सेकुलर कांग्रेस को भी एमपी में सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे चलना पड़ा। लेकिन मतदाताओं को जब चुनने की जरूरत हुई तो उन्होंने बीजेपी को प्राथमिकता दी । शिवराज राज्य में मंदिरों का कायाकल्प हुआ । उन्हें आध्यात्मिकता के साथ साथ आधुनिकता का कलेवर दिया और केंद्र की बीजेपी भी इसी नीति पर चल रही है। उज्जैन कॉरिडोर इसी का उदाहरण है। इसके अलावा शिवराज ने राज्य के चार मंदिरों- सलकनपुर में देवीलोक, ओरछा में रामलोक, सागर में रविदास स्मार्क और चित्रकूट में दिव्य वनवासी लोक के विस्तार और स्थापना के लिए 358 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इसके अलावा शिवराज ने उत्तर प्रदेश की तरह अपने यहां भी बुलडोजर ब्रांड की राजनीति का इस्तेमाल किया। उज्जैन में शोभायात्राओं पर पत्थर फेंकने वालों के घर बुलडोजर चले। उज्जैन में ही बच्ची के साथ रेप के आरोपी का घर बुलडोजर से ढहा दिया गया।

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