- किसी समाज के पूर्ण एवं समावेशी विकास (Overall development) के लिए युवाओं को जीवन यापन करने, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने, सक्रिय नागरिक के रूप में समाज में सहभागिता एवं योगदान करने के लिए रोजगार की आवश्यकता होती है। कामकाजी युवा, समाज में एक मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव रखते हैं, जो राष्ट्र (Nation) के विकास के लिए आवश्यक है। उद्यमिता युवाओं के विकास का एक महत्वपूर्ण घटक है। युवाओं को अपने भविष्य का निर्माण स्वयं करने हेतु उद्यमिता कौशल विकसित करने के लिए कौशल विकास के पर्याप्त अवसर प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस नीति का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रदान करना, उद्यमी बनाना एवं जोखिम लेने के लिए तैयार करना, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर निर्मित करना है। असंगठित क्षेत्र 80 प्रतिशत से अधिक कार्यबल को रोजगार देता है, जिसमें गिग इकॉनमी एक उभरता हुआ क्षेत्र है। गिग इकॉनमी में कर्मचारी फ्रीलांस(freelance) , फ्लेक्सिबल (flexible) या पार्ट-टाइम जॉब (part time jobs) करते हैं। यह नीति गिग और अनौपचारिक श्रमिकों (informal workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा का प्रावधान करने पर जोर देगी। कौशल विकास केंद्रों की रोजगार योग्य बनाने में एक अहम् भूमिका होती है। इस नीति के माध्यम से रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास केन्द्रों के पुनर्गठन पर जोर दिया जाये ।
- युवा वर्तमान एवं भावी कार्यबल का अति आवश्यक और महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज का युवा उत्साह एवं रचनात्मकता से भरपूर है। वह नवप्रर्वतन नवाचार के लिये मानसिक रूप से तैयार तथा चुनौतियों का सामना करने और समाधान ढूँढने में सक्षम एवं सामाजिक-आर्थिक विकास में सक्रिय योगदान देने हेतु तत्पर है। अत: यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि युवाओं को स्वस्थ, सक्रिय और खुशहाल जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जाये। स्वास्थ्य निर्माण चिकित्सकीय व्यवस्था के अलावा उन स्थानों पर भी होता है जहां लोग रहते, सीखते तथा काम करते हैं। अत: गैर-चिकित्सकीय व्यवस्था के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य निर्माण तथा स्वस्थ आचरण को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि युवा बेहतर निर्णय लेने, सामाजिक संबंधों तथा जिम्मेदारियों के निर्वहन और गुणवत्तायुक्त जीवन यापन हेतु सक्षम बनें। बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य युवाओं को लगातार आगे बढऩे, उनके सपनों को पूरा करने तथा कामयाब होने में सक्षम बनाता है।
- बदलती जीवनशैली, कुपोषण, शैक्षणिक और रोजगार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, शारीरिक निष्क्रियता, स्वच्छता में कमी, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं, बदलती आहार आदतें, मादक पदार्थों की लत, कोविड महामारी के दुष्परिणाम तथा सोशल मीडिया पर बढ़ते स्क्रीन समय आदि ने भावनात्मक और मानसिक असंतुलन तथा तनाव बढ़ाया है। इसके कारण स्वयं को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति और गैर-संचारी रोगों के गंभीर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं और युवाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ रहा है। युवाओं के स्वास्थ्य एवं आरोग्य में लगातार निवेश करने से वर्तमान में स्वस्थ युवा, भविष्य में स्वस्थ वयस्क और स्वस्थ भावी पीढ़ी का निर्माण किया जा सकता है। आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान स्वास्थ्य में निवेश करने से स्वस्थ युवा एवं वयस्क तैयार होने की संभावना बढ़ती है। किशोरावस्था में स्वास्थ्य पर निवेश करने से सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग दस गुना रिटर्न मिलना अनुमानित है। अत: एक स्वस्थ युवा बनाने के लिए किशोरों के स्वास्थ्य और कल्याण विषयों को एकीकृत करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। युवा नेतृत्व एवं सामाजिक कार्य का मुख्य लक्ष्य मध्यप्रदेश के विकास की चुनौतियों का समाधान करने के लिये युवा नेतृत्व विकसित करना है। सरकार ने युवाओं के लिए कई स्वयंसेवी और नेतृत्व विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन पहलों को सुगम, विस्तारित एवं सशक्त किए जाने की आवश्यकता है। इससे युवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी एवं उनमें नेतृत्व विकास संभव होगा।
- युवाओं में रोजगारोन्मुखी शिक्षा का प्रभाव व्यापक और दूरगामी होता है। यह न केवल व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करती है, बल्कि समाज और राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए, रोजगारोन्मुखी शिक्षा को प्राथमिकता देना और इसे व्यापक रूप से लागू करना आवश्यक है।
- http://श्याम कुमार कोलारे