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भारतीय महिला का चिंतन पाश्चात्य संस्कृति से भिन्न - मेघा पवार

भारतीय महिला का चिंतन पाश्चात्य संस्कृति से भिन्न - मेघा पवार
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भारतीय नारी वैदिक संस्कारों से संस्कारित

सिवनी यशो :- भारतीय सामाजिक व्यवस्था में महिलाओ का चिंतन पश्चात्य चिंतन से भिन्न है पाश्चात्य चिंतन महिला का व्यक्तिगत जीवन होता है पंरतु भारतीय महिलाएँ वैदिक संस्कृति के महानतम विचारों से संस्कारित होती है वह राष्ट्र की छोटी इकाई परिवार की मुख्य धुरी होती है परिवारों में संस्कार को को दृढता प्रदान करने के साथ उन्हें पीढिय़ो को हस्तांरित करने की महत्ती जिम्मेदारी निभाती है । भारतीय महिलाओं का चिंतन पश्चिम दृष्टिकोण से बिल्कुल भिन्न है और इसी कारण भारत में मातृशक्ति को पूज्य माना गया है । हमारी वैदिक संस्कृति की महानता है कि भारत मे महिला और पुरुष दोनो समान है। हम अर्धनारीश्वर की कल्पना को मानते हैं एक पुरुष है तो एक प्रकृति है। एक शिव है तो दूसरी शक्ति। हमे अपने व्यवस्थाओ में पुन: स्थापित होने की आवश्यकता है । इस आशय के उद्गार बाल संरक्षण आयोग मध्य प्रदेश शासन की सदस्य, महिला समन्वय की प्रांत संयोजिका श्रीमती मेघा पवार दीदी,भोपाल ने रविवार को सिवनी नगर के राशि लाँन में नारी शक्ति संगम महाकौशल प्रांत के तत्वाधान में आयोजित मातृशक्ति शक्ति संगम कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की आसंदी से व्यक्त किये। आपने आगे कहा की कुटुंब प्रबोधन मे महिलाओ की विशेष भुमिका है.परिवार ना टुटे और बच्चो की शिक्षा किस तरह से हो, इसकी चिंता हम महिलाओ को रखना है।.कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, आदर्श नागरिक। इन पांचो बिंदुओ पर भारतीय परिवारो मे चिंतन कर अनुसरण करना है। उल्लेखनीय है कि पूरे भारतवर्ष में भारतीय चिंतन में महिला, वर्तमान में महिलाओं की स्थिति और समाधान तथा देश के विकास में महिलाओं की भूमिका, इन विषयों को लेकर के नारी शक्ति सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं, इसी श्रृंखला में सिवनी जिले का वृहद नारी शक्ति संगम सम्मेलन का आयोजन रविवार को श्रीमती रूकमणी सनोडिया के संयोजकत्व में स्थानीय राशि लाँन मेंं संपन्न हुआ। आयोजित कार्यक्रम प्रात: 11:00 बजे से प्रारंभ हुआ जिसमें जिले भर से लगभग दो हजार मातृशक्ति ने सहभागिता की । सम्मेलन तीन सत्रों में आयोजित हुआ प्रथम सत्र भारतीय चिंतन में महिलाएँ जिसमें मुख्य वक्ता श्रीमती मेघा पवार एवं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती रश्मि गौर रही। दूसरा सत्र महिलाओं के विषय में चर्चा जिसमें महिलाओं से संबंधित समस्याएँ एवं उनके समाधान के पर चर्चा हुई महिलाओं ने चर्चा सत्र में बढ़चढ़कर भाग लिया । उन्होंने ने समस्याएँ बतायी तो चर्चा के दौरान उन समस्याओं के समाधान भी बताया गया । इस सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती मेघा पवार एवं सत्र की अध्यक्ष निर्मला नायक अधिवक्ता जबलपुर द्वारा की गयी । तीसरा सत्र भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर आयोजित हुआ । जिसमें श्रीमती लता एलकर बालाघाट मुख्य वक्ता रही और सत्र की अध्यक्षता ब्रम्हकुमारी नीतू दीदी द्वारा की गयी । भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका विषय पर श्रीमती एलकर द्वारा विस्तार से प्रकाश डालते हुये कहा गया कि देश की आवश्यकताओ के हिसाब से महिलाओं ने अपनी भूमिका का निर्माण किया और पुरातन काल से आज तक महिलाएँ समाज के विकास में अपनी श्रेष्ठता प्रदर्शन कर रही है देश की आजादी में उनकी भूमिका रही है तो आज वर्तमान में राजनैतिक सामाजिक, प्रशासनिक, सेवा आदि के क्षेत्र में महिलाओं ने उत्कृष्ट भूमिका का निर्वाह किया है आज देश के राष्ट्रपति पद पर भी महिला ही शोभित है पायलट, वैज्ञानिक आंतरिक्ष में महिलाओं ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया है श्रीमती एलकर ने महिलाओं से आग्रह किया कि वह अपने परिवार में ज्यादा समय दें, नई टेक्नोलॉजी के तहत हम सब मोबाइल से जुड़े हैं किंतु वर्तमान समय में हम महिलाओं को अपने परिवार में ज्यादा समय देने की आवश्यकता है और महिलाएं स्वयं सक्षम हों, जिससे किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना वे खुद कर सकें। कार्यक्रम में महिला विषयक प्रदर्शनी स्वदेशी वस्तुओं के स्टॉल, वीरागंनाओं की मनमोहक झांकी,प्रभु श्रीराम की आकर्षक झांकी ने सभी को अपनी ओर आकषित किया। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति पूर्ण गौंडी नृत्य नाटिका का प्रदर्शन कुरई खंड द्वारा किया गया । कार्यक्रम संचालन सुश्री कीर्ति ठाकुर द्वारा किया गया । आभार प्रदर्शन श्रीमती रूकमणी सनोडिया द्वारा किया गया । नारी शक्ति संगम टोली की सभी महिलाओं ने पूर्ण निष्ठा के साथ कार्यक्रम में सहभाग और सहयोग किया । कार्यक्रम में श्रीमती सपना गौतम, श्रीमती सोनू अग्रवाल, श्रीमती सरिता अंाधवान, श्रीमती ममता शर्मा सहित अनेक महिलाओं का सराहनीय योगदान रहा ।

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