पेंच से रामगढ़ बाघ स्थानांतरण में बड़ी सफलता—बाघिन को लगाया गया रेडियो कॉलर[/caption]
सुबह एआई-सक्षम कैमरा ट्रैप सिस्टम से मूवमेंट अलर्ट मिलने पर संयुक्त टीमों ने संभावित क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज किया। हाथी दस्तों की सहायता से बाघिन का लोकेशन हासिल किया गया, जिसके बाद टीम ने उसकी पहचान की पुष्टि की।
पहचान होने के बाद विशेष प्रशिक्षित पशु चिकित्सक दल—डॉ. अखिलेश मिश्रा के नेतृत्व में तथा डॉक्टर अमित कुमार ओड की उपस्थिति में—ने बाघिन को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत ट्रेंकुलाइज किया। इसके बाद स्थापित वन्यजीव मानकों के अनुसार विशेषज्ञों ने उसे रेडियो कॉलर पहनाया।
प्रक्रिया पूर्ण होने पर बाघिन को सुरक्षित रूप से पुनः जागृत कर जंगल में छोड़ दिया गया।
रेडियो कॉलर से अब उसकी गति,
स्वास्थ्य,
व्यवहार और
मूवमेंट पैटर्न की 24×7 निगरानी की जाएगी।
इन आंकड़ों का विश्लेषण कर ही आगामी दिनों में राजस्थान स्थानांतरण की अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि अंतरराज्यीय समन्वय, वैज्ञानिक प्रबंधन और फील्ड टीमों की निरंतर मेहनत का परिणाम है, जो बाघ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। प्रदेश सरकार ने 2600 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का निर्णय लिया