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BRICS में PM मोदी का बड़ा संदेश: ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ को बनाना होगा ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Sep 13, 2026 03:07 pm / Post views : 8

BRICS में PM मोदी का बड़ा संदेश: ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ को बनाना होगा ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’
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BRICS में PM मोदी का बड़ा संदेश, UNSC में ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने’ विषय पर आयोजित ब्रिक्स सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार और ग्लोबल साउथ की अधिक प्रभावी भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। [caption id="attachment_51764" align="alignleft" width="150"]BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।[/caption] प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों का सामना करने में सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को बदलने की जरूरत है और ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ को ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ में बदलना होगा।

वैश्विक संस्थाओं में वास्तविकताओं के अनुरूप प्रतिनिधित्व जरूरी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक शासन व्यवस्था को आज की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में अधिक व्यापक और संतुलित प्रतिनिधित्व आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि नियम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने वाला पक्ष बनाया जाना चाहिए।

युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं को प्रशिक्षण देगा BRICS

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के माध्यम से ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति निर्माताओं की क्षमता बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इन्हें वार्ता कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कानूनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि वे वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

समुद्री नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यापार में समुद्री नाविकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय समुद्री नाविकों को अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने ‘समुद्री नाविक आपातकालीन सहायता नेटवर्क’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि जरूरत के समय नाविकों को प्रभावी और त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

‘भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए’

प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य का समापन साझा भविष्य की अवधारणा पर जोर देते हुए किया। उन्होंने कहा कि जब हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए—आवाज उठाने से लेकर प्रभाव छोड़ने तक और विशेषाधिकार से लेकर साझेदारी तक। सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने समावेशी वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा।

नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स घोषणापत्र अपनाया गया

सत्र का समापन नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणापत्र भविष्य में ब्रिक्स सहयोग की साझा प्राथमिकताओं, प्रतिबद्धताओं और दिशा को निर्धारित करेगा। स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), नई दिल्ली।

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