क्या है पूरा मामला?
कोर्ट ने अपने फैसलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत टीईटी को अनिवार्य बताते हुए कहा कि—- कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए TET जरूरी
- 5 साल से कम सेवा शेष: बिना TET रिटायर हो सकते हैं, लेकिन प्रमोशन नहीं
- 5 साल से अधिक सेवा शेष: 2 साल में TET पास करना अनिवार्य, अन्यथा अनिवार्य सेवानिवृत्ति
मध्यप्रदेश में बढ़ा असंतोष
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख का सीधा असर अब मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है।- जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक शिक्षकों का आंदोलन तेज
- राज्यपाल, शिक्षा मंत्री और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं
- मांग: सरकार कोर्ट में हस्तक्षेप कर TET अनिवार्यता खत्म कराए
सिवनी में हजारों शिक्षक सड़कों पर
सिवनी जिले में भी यह मुद्दा जोर पकड़ चुका है—- हजारों शिक्षक आंदोलन में शामिल
- कलेक्ट्रेट और ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन
- विभिन्न कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन
- कई चरणों में ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं
10 अप्रैल का फैसला बना निराशा का कारण
10 अप्रैल 2026 को याचिका खारिज होने के बाद सिवनी सहित पूरे मध्यप्रदेश के शिक्षकों में गहरी निराशा देखी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि—- लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए TET अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं
- सरकार को उनके पक्ष में ठोस कदम उठाना चाहिए
क्या हैं आगे के संकेत?
- TET अब शिक्षा व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बन चुका है
- राज्यों के पास राहत दिलाने के सीमित विकल्प
- शिक्षकों को अब परीक्षा पास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं