भारतीय संस्कृति का मूल तत्व है – ‘संगठन और समर्पण’। जब-जब समाज विखंडित हुआ, आत्मविश्वास डगमगाया और पराधीनता की बेड़ियाँ मजबूत हुईं, तब-तब इस भू-भाग ने कोई न कोई शक्ति उत्पन्न की। इस शक्ति ने राष्ट्र को जाग्रत कर आत्मविश्वास का संचार किया। ऐसी ही शक्ति का स्वरूप है – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। इतिहास केवल अतीत का ब्योरा भर नहीं है, बल्कि यह वर्तमान और भविष्य के निर्माण का मार्गदर्शक है। संस्कृत में “इतिहास” का अर्थ ही है – “इति-ह-आस” अर्थात् ऐसा ही हुआ। राष्ट्र जीवन के उत्थान और पतन के पीछे कुछ गहरे कारण छिपे रहते हैं।लेखक – विनोद कुमार (महाकौशल प्रांत प्रचार प्रमुख)
लेखक – विनोद कुमार (महाकौशल प्रांत प्रचार प्रमुख)