छह महीने से प्राचार्य की गैरहाजिरी? एक हजार विद्यार्थियों वाले विद्यालय की व्यवस्था पर सवाल
सांदीपनि विद्यालय घुटास में प्राचार्य की नियमित अनुपस्थिति को लेकर उठी निष्पक्ष जांच की मांग
सांदीपनि विद्यालय घुटास में प्राचार्य की अनुपस्थिति पर सवाल, जांच की मांग
Mandla 27 August 2026
भुआ-बिछिया यशो:- विकासखंड मवई के शासकीय सांदीपनि विद्यालय घुटास में प्राचार्य की नियमित अनुपस्थिति को लेकर विद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार जनवरी 2026 से प्राचार्य विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कक्षा 6वीं से 12वीं तक संचालित इस विद्यालय में एक हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। इतने बड़े शिक्षण संस्थान में प्राचार्य की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि शैक्षणिक अनुशासन और विद्यालय संचालन के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में लंबे समय से प्राचार्य की कथित अनियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अभिभावकों में भी चर्चा, व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
सूत्रों का कहना है कि प्राचार्य की अनियमित उपस्थिति का असर विद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों पर पड़ने की चर्चा है। वहीं विद्यार्थियों के अभिभावकों के बीच भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। सवाल यह है कि यदि प्राचार्य लंबे समय से नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं हैं तो विद्यालय की दैनिक प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है?
उपस्थिति पंजिका से सामने आ सकता है सच
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए शिक्षा विभाग से विद्यालय की उपस्थिति पंजिका, अवकाश संबंधी अभिलेख और अन्य संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। इन अभिलेखों के परीक्षण से यह स्पष्ट हो सकता है कि प्राचार्य की जनवरी 2026 से अब तक विद्यालय में उपस्थिति की वास्तविक स्थिति क्या रही है और अनुपस्थिति की स्थिति में विभागीय स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
यदि जांच में नियमों के विपरीत लंबे समय तक अनियमित अनुपस्थिति की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग भी जोर पकड़ सकती है।
हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल
एक हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय से जुड़ा यह मामला महज एक अधिकारी की उपस्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है। ऐसे में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शिक्षा विभाग विद्यालय के अभिलेखों की जांच कर सच्चाई सामने लाएगा या फिर विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा यह सवाल फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
यह भी पढ़े:-
महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल, बाजार में बांटी शक्कर
एसआई की बेटी निशु ने रचा इतिहास, खेल अधिकारी पद पर चयन
खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, ₹3.61 लाख की अमानक सामग्री जब्त
नेपाल में फंसे MP के लोगों के लिए सरकार ने खोला कंट्रोल रूम, CM मोहन यादव ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर



