स्वस्थ और सुखी परिवार में माता की भूमिका विषय पर अपना वक्तव्य देते हुए ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने बताया कि जिस प्रकार कहा जाता है मां बच्चे की प्रथम गुरु है उसी अनुसार बच्चा मां के हर कर्तव्य को देखकर सीखता है इसलिए हर एक मां को अपने जीवन में वह सभी चीजें प्रैक्टिकल करनी चाहिए ,जो वह अपने बच्चों से उम्मीद रखती हैं। यदि हम चाहते हैं कि हमारा बच्चा हर स्थिति में पॉजिटिव (positive) रहे तो उसके लिए हमें भी उसकी हर एक्टिविटी (activity) को देखते पॉजिटिव रहना होगा। एप्रिशिएट (appreciate) करना होगा, उसकी हर अच्छी बुरी एक्टिविटी को स्वीकार करते हुए ,भविष्य के लिए शिक्षा देना होगा द्य इस तरह परिवार की महिला का जीवन प्रेरणा स्रोत के रूप में हो तो वह अपने परिवार को खुशहाल बना सकती है। ब्रह्माकुमारी संस्थान की महिला प्रभाग की क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी ज्योति दीदी जी ने सभी मातृ शक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने परिवार को खुशहाल बनाने के लिए त्याग भावना, सहनशीलता और मनोबल की आवश्यकता होती है द्य आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोगा मेडिटेशन हमारे जीवन में मनोबल, सहनशीलता और त्याग भावना को जागृत करता है द्य इसके थ्रू हम अपने परिवार को खुशहाल बना सकते हैं।
कार्यक्रम को मनोरंजक (entertaining) बनाने के लिए मां अपने बच्चों के लिए जो ममतामई कर्तव्य करती है उसे नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया द्य और साथ ही साथ मां कैसी होती है इस पर बहुत सुंदर एक्टिविटी प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम के अंत में शहर के वरिष्ठ चिकित्सक भ्राता डॉ. राम रजक जी की आत्मा शांति के लिए सभी ने 3 मिनट मौन रखकर आत्म शांति के वाइब्रेशन फैलाएं।