Wed, 21 Oct 2026 | 10:22:55 AM
Dainik Yashonnati
Breaking News Exclusive
आंदोलन समाधान के लिए हों, समाज में विभाजन के लिए नहीं गरबा आयोजन में पार्किंग व्यवस्था ध्वस्त, डिंडौरी नाका से बिनेका तक वाहनों की लंबी कतारें मध्यप्रदेश में करीब 750 पुलिस पदों पर होगी भर्ती, हर जिले में बनेगा पुलिस बैंड पुलिस लाइन में विजयादशमी पर विधि-विधान से हुआ शस्त्र पूजन, कलेक्टर और एसपी ने निभाई परंपरा आज सिवनी सहित जिलेभर में दशहरे की धूम, 51 फीट के रावण का होगा दहन सिवनी में आज गूंजेगा जय श्रीराम! गंगा आरती की तर्ज पर महाआरती, 51 फीट के रावण का होगा दहन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा भारत : डॉ. मोहन यादव नवरात्रि में सांवरी पुलिस की अनूठी पहल, बालिकाओं को बांटे निःशुल्क हेलमेट खेतों से बोरवेल की लीड चुराने वाले चार आरोपी गिरफ्तार, देहात पुलिस ने 1.21 लाख रुपये का माल किया जब्त कांग्रेस पदाधिकारी के कथित अपहरण और मारपीट पर भड़के नकुलनाथ, पुलिस को तीन दिन का अल्टीमेटम आंदोलन समाधान के लिए हों, समाज में विभाजन के लिए नहीं गरबा आयोजन में पार्किंग व्यवस्था ध्वस्त, डिंडौरी नाका से बिनेका तक वाहनों की लंबी कतारें मध्यप्रदेश में करीब 750 पुलिस पदों पर होगी भर्ती, हर जिले में बनेगा पुलिस बैंड पुलिस लाइन में विजयादशमी पर विधि-विधान से हुआ शस्त्र पूजन, कलेक्टर और एसपी ने निभाई परंपरा आज सिवनी सहित जिलेभर में दशहरे की धूम, 51 फीट के रावण का होगा दहन सिवनी में आज गूंजेगा जय श्रीराम! गंगा आरती की तर्ज पर महाआरती, 51 फीट के रावण का होगा दहन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा भारत : डॉ. मोहन यादव नवरात्रि में सांवरी पुलिस की अनूठी पहल, बालिकाओं को बांटे निःशुल्क हेलमेट खेतों से बोरवेल की लीड चुराने वाले चार आरोपी गिरफ्तार, देहात पुलिस ने 1.21 लाख रुपये का माल किया जब्त कांग्रेस पदाधिकारी के कथित अपहरण और मारपीट पर भड़के नकुलनाथ, पुलिस को तीन दिन का अल्टीमेटम

नर्मदा परिक्रमा – माँ की गोद में विनम्रता का पाठ

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Jul 02, 2025 12:46 am / Post views : 568

नर्मदा परिक्रमा – माँ की गोद में विनम्रता का पाठ
शेयर करें:

भाग 13 : कपिल पांडे की आध्यात्मिक यात्रा की अगली कड़ी

✍️ कपिल पांडे की यात्रा-वृत्तांत पर आधारित
स्थान: रामानंद आश्रम से हनुमनतेश्वर तक

प्रातः का सौंदर्य और माँ का आशीर्वाद

रामानंद आश्रम में जब सुबह आँख खुली, तो लगा मानो स्वयं प्रकृति ने माँ नर्मदा के मस्तक पर तिलक कर दिया हो। सूर्य की पहली किरण जैसे आशीर्वाद बनकर उतरी थी।
घाट पर चेतावनी दिखी – "मगर से सावधान" – अतः हमने जल-स्नान की योजना स्थगित कर, केवल नमन किया और आश्रम में ही स्नान व ध्यान संपन्न किया।

[caption id="attachment_32088" align="alignright" width="300"] रामानंद आश्रम सुबह सुबह[/caption]

विनम्रता का पाठ: माँ की भिक्षा को अस्वीकार मत करना

मंदिर में पूजा करते समय एक वृद्ध माता जी ने हमारी थाली में ₹100 रख दिए। हमने हाथ जोड़कर विनम्रता से अस्वीकार किया।
परंतु उनके साथ आए वृद्ध ने दृढ़ वाणी में कहा –

"तुम होते कौन हो मना करने वाले? यह तुम्हें नहीं, माँ नर्मदा को दिया गया है!"

उस एक वाक्य ने भीतर तक झकझोर दिया। अहंकार का लेशमात्र भी न रहा।
मन ही मन प्रतिज्ञा ली –
"माँ! अब हम तेरे भिक्षुक हैं, जो भी तेरा है, वही हमारा है।"
और तभी अंतर से स्वर गूंजा –

"अमरकंटक से अरब सागर तक – नर्मदे हर!"

कृषक सत्कार: माँ की परीक्षा या सत्संग?

थोड़ी दूर चले तो एक किसान भाई ने रास्ता झाड़ते हुए कहा –

"आप हमारे लिए तीर्थ समान हैं!"
उनके घर पर सत्कार, नाश्ता, चाय और आत्मीय विदाई – यह कोई साधारण आतिथ्य नहीं, माँ की एक और परीक्षा थी।

संत का संग और शिष्टाचार की शिक्षा

रास्ते में वाराणसी से आए एक साधु मिले। उन्होंने परिक्रमा के आचरण, संन्यासियों के नियम, और आश्रम शिष्टाचार की बातें साझा कीं – जैसे माँ स्वयं ज्ञान दे रही हो।

[caption id="attachment_32086" align="alignleft" width="300"] भव्य दर्शन: नीलकंठ और हनुमनतेश्वर[/caption]

भव्य दर्शन: नीलकंठ और हनुमनतेश्वर

स्वामीनारायण ट्रस्ट द्वारा निर्मित नीलकंठ मंदिर का भव्य परिसर चित्त को शांति से भर गया। वहीं पता चला –

"पास में हनुमनतेश्वर मंदिर है, जहाँ श्री हनुमान ने ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त होने तपस्या की थी।"

हमने तुरंत निर्णय लिया – "माँ की परिक्रमा में कोई भी रास्ता दूर नहीं।"
हनुमनतेश्वर मंदिर का ऊर्जा-पूर्ण वातावरण, वहाँ की वृद्ध माता जी द्वारा सुनाया गया इतिहास, और श्रीराम के साथी नल-नील द्वारा स्थापित मंदिरों के दर्शन – यह सब रोमांचकारी और अध्यात्मिक रूप से सघन अनुभव था।

माँ का संकेत: फिर वही रास्ता, फिर वही मंदिर

लौटते समय रास्ता भटक गए। घूमते हुए फिर से वही मंदिर, वही मोड़।
क्या माँ बुला रही थी? या परीक्षा ले रही थी?
शायद दोनों...

मंदिर में विश्राम: सेवा, श्रम और संतोष

अंततः शाम को एक दुकानवाले से पता चला –

"5 किलोमीटर अंदर एक हनुमान मंदिर है, वहीं रुक जाइए।"

खेतों के बीच वह हरियाली से घिरा सौम्य मंदिर – वहाँ पहुँचकर थकान गायब हो गई।
सेवकों ने कच्चा अन्न दिया – हमने स्वयं भोजन बनाया, भोग लगाया और फिर सत्संग के साथ भोजन किया।

[caption id="attachment_32085" align="alignright" width="300"] पूर्ण तृप्ति: माँ की शरण में समर्पण[/caption]

रात्रि विश्राम से पहले मन में एक ही भाव था –
"थकावट शरीर में थी, पर मन पूर्णत: तृप्त था। हम माँ के एक और पथ पर चल चुके थे। अब हर कदम केवल माँ की शरण में समर्पित था।"

अगले चरण की प्रतीक्षा

"नर्मदे हर! कल फिर मिलेंगे..."

श्रद्धा-संदेश:

"नर्मदा परिक्रमा केवल यात्रा नहीं, यह आत्मा के संस्कारों का पुनर्जन्म है। यहाँ हर मोड़ पर विनम्रता, सेवा और समर्पण की शिक्षा माँ स्वयं देती हैं।" – कपिल पांडे

Live

लाइव क्रिकेट Score

Live

दैनिक राशिफल Daily

ज्योतिष