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जैन तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर समर्पित किया गया निर्वाण लाडू

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Mar 09, 2025 03:46 pm / Post views : 225

जैन तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर समर्पित किया गया निर्वाण लाडू
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Seoni 09 March 2025 सिवनी यशो:- आठवें वे जैन तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रात: काल की बेला में स्थानीय श्री दिगंबर जैन छोटे बड़े एवं गुरुकुल दिगंबर जैन मंदिर जी में स्थापित भगवान चंद्रप्रभ स्वामी जी का भव्य महाभिषेक शांतिधारा पूजन कर श्रद्धालु जनों द्वारा भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव पर निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। निर्वाण लाडू के साथ काजू बादाम अखरोट किशमिश खारक पिस्ता नारियल गोला, लौंग इलायची आदि उत्कृष्ट पदार्थों से भरे थाल भक्ति भाव पूर्वक श्रद्धालुओ ने समर्पित किए। शाश्वत सिद्ध क्षेत्र सम्मेद शिखर के ललित कूट से तीर्थंकर महाप्रभु ने निर्वाण की प्राप्ति की थी। उल्लेखनीय है कि जैन संस्कृति के आठवे तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभ स्वामी चंद्रपुरी नगरी के पराक्रमी इक्ष्वाकु वंशी राजा महासेन एवं लक्ष्मणा महारानी के सुपुत्र थे। युवराज से महाराज बन वर्षो तक राजपाट में सुशासन की स्थापना कर शनै शनै उस भोगविलास भरे जीवन से विरक्ति भाव धारण कर जीवन को राग से वैराग्य पथ की ओर मोड दिगम्बरी मुनि दीक्षा धारण कर सघन वन में तपारूढ़ हों गए उपरांत क्रमश: केवल्य की प्राप्ति कर सम्मेद शिखर स्थित ललित कूट से अनेक कोड़ा कोड़ी मुनिराजों के संग निर्वाण की प्राप्ति की कर तीर्थंकर पद की प्राप्ति की स्मृति स्वरूप आज भी सम्मेद शिखर तीर्थ राज स्थित ललितकूट में महाप्रभु के चरण चिन्ह प्रतिष्ठित है। अर्द्ध चंद्रमा आपकी प्रतिमा का मुख्य चिन्ह है । भगवान चंद्रप्रभ स्वामीकी भव्य प्रतिमाएं सिवनी के बड़े जैन मंदिर में कठवा वाली श्रीमंत परिवार की वेदिका में व स्फटिक मणि से निर्मित श्री जी की प्राचीन प्रतिमा बाझल जी की वेदिका में एवं श्वेत प्रस्तर से निर्मित भव्य अतिशयकारी मूल प्रतिमा छोटे जैन मंदिर जी में विराजित है। भगवान चंद्रप्रभ के अतिशय से पल्लवित भारत वर्ष के विभिन्न प्रांतों में अनेक तीर्थ स्थापित है इनमें सोनागिरी,देहरा तिजारा,चंद्रपुरी, हटा बुंदेलखंड,चंद्रपुरी, सम्मेद शिखर आदि अनेक तीर्थों पर प्रभु की विशेष कल्याणक तिथियों पर श्रद्धालु जन पहुंचकर महाभिषेक पूर्वक दिव्य महा आराधना किया करते है।