सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और मल्चर से फसल अवशेषों के प्रबंधन की दी जानकारी; कम पानी वाली फसलों और ड्रिप सिंचाई अपनाने पर जोर
Seoni, 24 October 2026
सिवनी यशो:- खेतों में फसल कटने के बाद बची नरवाई को जलाना मिट्टी की सेहत और खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता के लिए नुकसानदायक है। इससे मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। किसानों को इस नुकसान से बचाने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से जिले के तीन विकासखंडों में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत प्रशिक्षण आयोजित किए गए।
इनमें किसानों को नरवाई जलाने के बजाय फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने, प्राकृतिक खेती अपनाने और पानी बचाकर बेहतर उत्पादन लेने के तरीके बताए गए।
कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशानुसार तथा उपसंचालक कृषि एवं परियोजना संचालक, आत्मा, सिवनी के मार्गदर्शन में कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम (आत्मा) के अंतर्गत ये प्रशिक्षण बरघाट विकासखंड की ग्राम पंचायत कोसमी, धनौरा विकासखंड के ग्राम कुड़ारी और कुरई विकासखंड के ग्राम जिलापुर में आयोजित किए गए।
नरवाई का समाधान बताएंगे कृषि यंत्र
प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि नरवाई जलाना समस्या का समाधान नहीं है। फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और मल्चर जैसे कृषि यंत्रों तथा जैव अपघटक के उपयोग की जानकारी दी गई। इन उपायों के जरिए नरवाई जलाने की प्रवृत्ति को कम करने और खेतों की मिट्टी को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया गया।
किसानों को मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, कम लागत में उत्पादन और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल नरवाई जलाने से रोकना ही नहीं, बल्कि ऐसी खेती को प्रोत्साहित करना भी रहा, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो और लंबे समय तक खेतों की उत्पादकता बनी रहे।
कम पानी में उगने वाली फसलों पर जोर
रबी मौसम में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को चना, अलसी, सरसों और सूरजमुखी जैसी कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी गई। साथ ही फसल विविधीकरण के महत्व को समझाते हुए किसानों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार खेती की पद्धति में बदलाव करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण में उद्यानिकी विभाग ने टपक सिंचाई, फव्वारा सिंचाई और मिनी फव्वारा सिंचाई उपकरणों पर शासन की ओर से दिए जाने वाले अनुदान की जानकारी भी दी। फल, फूल और सब्जियों के बीजों की उपलब्धता से किसानों को अवगत कराया गया, ताकि वे संबंधित योजनाओं का लाभ लेकर उत्पादन और आय बढ़ाने के विकल्प तलाश सकें।
किसानों ने ली नरवाई नहीं जलाने की शपथ
कार्यक्रम के अंत में किसानों को नरवाई नहीं जलाने की शपथ दिलाई गई। किसानों ने संकल्प लिया कि वे अपने खेतों में नरवाई नहीं जलाएंगे, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करेंगे और दूसरे किसानों को भी इसके नुकसान के प्रति जागरूक करेंगे।
अब अभियान की असली सफलता इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण में लिया गया संकल्प खेतों में कितना उतरता है। यदि किसान नरवाई जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को अपनी खेती का हिस्सा बनाते हैं, तो इससे मिट्टी की सेहत बचाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।