<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सांस्कृतिक स्वाधीनता दिवस &#8211; Dainik Yashonati</title>
	<atom:link href="https://dainikyashonnati.com/tag/%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://dainikyashonnati.com</link>
	<description>News Website</description>
	<lastBuildDate>Sun, 21 Jan 2024 18:27:51 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1</generator>

<image>
	<url>https://dainikyashonnati.com/wp-content/uploads/2025/07/dainik-yashonnati-450x450-1-150x150.png</url>
	<title>सांस्कृतिक स्वाधीनता दिवस &#8211; Dainik Yashonati</title>
	<link>https://dainikyashonnati.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या है राममय</title>
		<link>https://dainikyashonnati.com/the-whole-nation-is-ayodhya-and-ayodhya-is-rammay/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Dainik Yashonnati]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jan 2024 18:27:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[छिंदवाड़ा]]></category>
		<category><![CDATA[देश विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[नरसिंगपुर]]></category>
		<category><![CDATA[बालाघाट]]></category>
		<category><![CDATA[मंडला]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[विचार]]></category>
		<category><![CDATA[सिवनी]]></category>
		<category><![CDATA[#भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[22 जनवरी]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[अनुष्ठान]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या जी]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्याजी]]></category>
		<category><![CDATA[अशोक सिघंल]]></category>
		<category><![CDATA[इलाहाबाद हाईकोर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[उत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[उमा भारती]]></category>
		<category><![CDATA[एस.व्ही शेषाद्रि]]></category>
		<category><![CDATA[कारसेवक]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक अनुष्ठान]]></category>
		<category><![CDATA[नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[नैतिक मूल्य]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवीण तोगडिया]]></category>
		<category><![CDATA[बाबरी ढांचे]]></category>
		<category><![CDATA[भव्य -दिव्य]]></category>
		<category><![CDATA[महंत नृत्यगोपालदास]]></category>
		<category><![CDATA[मुलायम सिंह यादव]]></category>
		<category><![CDATA[रथयात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[रामभक्त]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्र का मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[लालकृष्ण आडवाणी]]></category>
		<category><![CDATA[विनय कटयार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीराम मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[साध्वी ॠतुम्भरा]]></category>
		<category><![CDATA[सांस्कृतिक स्वाधीनता दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[सिवनी भाजपा]]></category>
		<category><![CDATA[स्वतंत्रता दिवस]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://dainikyashonnati.com/?p=11091</guid>

					<description><![CDATA[नि:सन्देह श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के सचिव श्री चंपत राय जी के कहे गये शब्द शत प्रतिशत सही प्रतीत हो रहे हैं कि जिस तरह 15 अगस्त 1947 का स्वतंत्रता दिवस का दिन हमारे लिये महत्वपूर्ण दिन है उसी तरह 22 जनवरी 2024 का दिन भी महत्वपूर्ण दिवस है. वस्तुत: 22 जनवरी 2024 का दिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://dainikyashonnati.com/the-whole-nation-is-ayodhya-and-ayodhya-is-rammay/diwakar/" rel="attachment wp-att-11093"><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-11093" src="https://dainikyashonnati.com/wp-content/uploads/2024/01/diwakar.jpg" alt="सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या है राममय - Seoni News" width="600" height="322" title="सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या है राममय | Dainik Yashonnati"></a><br />
<strong>नि:सन्देह श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के सचिव श्री चंपत राय जी के कहे गये शब्द शत प्रतिशत सही प्रतीत हो रहे हैं कि जिस तरह 15 अगस्त 1947 का स्वतंत्रता दिवस का दिन हमारे लिये महत्वपूर्ण दिन है उसी तरह 22 जनवरी 2024 का दिन भी महत्वपूर्ण दिवस है.</strong><br />
<strong>वस्तुत: 22 जनवरी 2024 का दिन सारे राष्ट्र सहित विश्?व के रामभक्तों के लिये महत्व दीपावली से कम नहीं है. भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास वापसी के अवसर पर जिस तरह सारे अयोध्या में दीवावली का भव्य पर्व मनाया गया था वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से दर्ज है. इस बार पूरे 500 वर्ष के बाद भगवान श्रीराम के बालरूप नूतन विग्रह को अयोध्या में गर्भगृह में स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है तो रामभक्तों के उत्साह व उल्लास की पराकाष्ठा तो होनी ही है इसीलिये हम कह रहे हैं कि &#8220;सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या राममय &#8221; हो गई है. वस्तुत: 22 जनवरी 24 को &#8220;सांस्कृतिक स्वाधीनता दिवस&#8221; कहना उचित होगा. 500 वर्ष के बाद पहली बार आये अत्यंत शुभ मुहुर्त पर होने जा रही प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर सारे देश में अभूतपूर्व आनंद देखने को मिल रहा है. जहां देखों वहां श्री राम जय राम जय जय राम के विजय मंत्र का जाप हो रहा है तो कही हनुमान चालीसा का या सुंदरकांड का जाप हो रहा है कही पर रामकथा हो रही हे तो कही पर रामलीला हो रही है पूरा देश रामभक्ति से सराबोर हो गया है. निश्?चित रूप से यह राष्ट्र के सांस्कृतिक उत्थान का प्रतीत तो है ही साथ ही रामराज्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है.</strong></p>
<p><a href="https://dainikyashonnati.com/the-whole-nation-is-ayodhya-and-ayodhya-is-rammay/untitled-1-copy-13/" rel="attachment wp-att-11096"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-11096" src="https://dainikyashonnati.com/wp-content/uploads/2024/01/Untitled-1-copy-2.jpg" alt="सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या है राममय - Seoni News" width="450" height="800" title="सारा राष्ट्र अयोध्यामय और अयोध्या है राममय | Dainik Yashonnati"></a><br />
<strong>सारे राष्ट्र के इस आनंदमय वातावरण के पीछे रामभक्तों का लंबा संघर्ष व बलिदान का इतिहास रहा है. यूं तो अयोध्या में जन्में श्रीराम एवं श्रीराम मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. किंतु वर्तमान परीप्रेक्ष्य में हम चर्चा करेंगे. सन् 1526 में मुगल शासक बाबर भारत आया और 1528 में अवध (अयोध्या)पहुंचा. सन् 1528-29 में बाबर के सेनापति मीर बांकी ने एक मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई,जिसे बाबर का नाम दिया जाकर बाबरी मस्जिद कहा गया। वस्तुत: वह मस्जिद हिदुओ के मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी (यह कोर्ट द्वारा प्रमाणित भी हो चुका है कि वह भगवान श्री राम का जन्म स्थान है।)प्रारम्भ में यह ऐतिहासिक विषय धार्मिक रहा किन्तु बाद में धीरे धीरे निश्चित रूप से राजनैतिक भी हो गया।फिर विवादित तो हुआ ही।विवाद का मूल विषय यही रहा कि क्या हिदू मन्दिर तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनाई गई ?इसी विषय को हिन्दू मुस्लिम पक्ष आपस में उलझते रहे।कोर्ट कचहरी भी चलती रही। 1949 में विवाद के कारण जन्मभूमि में द्वार पर लगाये गये ताले को 1984 में श्रीराम भूूमि आंदोलन की घोषणा के बाद 1986 में अदालती आदेश से ताला खोला गया. 1989 में धर्मसंसद में लिये गये निर्णय के अनुसार अयोध्या में श्रीराम के जन्म स्थान पर कारसेवा का निर्णय लिया गया. इसी समय श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु गांव-गांव जागरण प्रांरभ कर दिया गया साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से एक-एक रूपया व एक शिला का संग्रह प्रारंभ कर दिया गया. </strong><br />
<strong>1990 में भाजपा के श्री लालकृष्ण आडवानी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर से अयोध्या तक रथयात्रा निकाली. इस यात्रा से भाजपा व आडवाणी जी को मिल रहे भारी जनसमर्थन से बिहार के तात्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने 22 अक्टूबर 1990 को आडवाणी जी को गिरफ्तार कर रथ यात्रा रोक दी.</strong><br />
<strong>धर्मसंसद में लिए गये निर्णय अनुसार आडवाणी जी 30 अक्टूबर 1990 को सांकेतिक कार सेवा का आव्हान कर चुके थे और सारे देश से रामभक्त कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचना प्रारंभ कर दिया था दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने बाबरी ढांचे की सुरक्षा हेतु &#8220;परिंदे भी पर न मार संके &#8216;की तर्ज पर पूरे अयोध्या को छावनी बना दिया था तो कारसेवक भी &#8220;मंदिर वहीं बनायेंगे &#8220;के उदघोष का संकल्प लेकर एकत्रित हो रहे थे. भारी सुरक्षा कड़े पहरे के बावजूद लगभग 10 हजार से ज्यादा कारसेवक जन्म भूमि परिसर के नजदीक पहुंच गये. इस बीच दो प्रमुख कारसेवकों श्रीराम कोठारी व श्री शरद कोठारी ने बाबरी ढांचे पर चढकर भगवा झंडा लहरा दिया. इसके बाद मुलायम सिंह का वह घिनौना कृत्य सारे देश ने देखा जिसे इतिहास के पन्नों पर काले धब्बे के रूप में देखा जायेगा. 2 नवम्बर 1990 को अयोध्या में एकत्रित हजारों की संख्या में कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने दे दिया. अश्रु गैस व लाठियों से कार सेवकों को खदेड़ा जाने लगा. कोठारी बंधुओं के एक भाई को बीच सड़क में पुलिस द्वारा गोली मार दी गई उसे बचाने आये दूसरे भाई को भी गोली मार दी गई. सारा अयोध्या गोलियों की आवाज से गूंज गया. सैकड़ों कार सेवकों को जान गंवानी पड़ी. सरयू नदी में मिली लाश गोलीकांड व पुलिस कार्यवाही की भयानकता को दर्शा रही थी. विश्व हिंदु परिषद के अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल भी पुलिस की लाठी से घायल हुये. 6 दिसंबर 1992 को श्रीराम मंदिर निर्माण द्वार सांकेतिक कार सेवा हेतु किये गए आव्हान पर सारे देश के लाखों कार सेवक एकत्रित हुये. प्रमुख नेताओ में सर्वश्री लालकृष्ण आडवाणी ,अशोक सिघंल, विनय कटयार, एस.व्ही शेषाद्रि ,उमा भारती ,साध्वी ॠतुम्भरा, महंत नृत्यगोपालदास, प्रवीण तोगडिया आदि भी उपस्थित थे. किसी को अंदाजा भी नही था कि क्या होने वाला है. नेताओं के लाख समझाने के बावजूद कार सेवक नहीं माने और सामूहिक रूप से उस बाबरी ढांचे के तीनों विशालकाय गुंबदों को लाठी भाले, सब्बल, हथौड़े से ध्वस्त कर दिया गया और वहां पर रामशिला की स्थापना कर दी गई. केंद्र में बैठी नरसिम्हाराव की सरकार ने उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार सहित मध्यप्रदेश राजस्थान की भाजपा सरकारों को बर्खास्त कर दिया. बावजूद इसके श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन को नई दिशा मिली.</strong><br />
<strong>इस तरह 134 वर्ष के अदालती उतार चढ़ाव के बाद 30 दिसंबर 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के एवं फिर 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्थिति स्पष्ट कर दी. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की बेंच जिसकी अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने की, ने निर्णय दिया कि ढहाये गये ढांचे के नीचे हिन्दु मंदिर ही था, इस्लामिक ढांचा नहीं था. वस्तुत: यही भगवान श्रीराम का जन्म स्थान है. इस तरह देश के इतिहास के सबसे अहम विवाद का अंत हुआ. सुुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में 15 सदस्यी &#8220;श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र &#8220;ट्रस्ट की घोषणा 5 फरवरी 2020 को कर दी. तत्पश्चात महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में ट्रस्ट ने कार्य प्रारंभ किया. इस तरह भाजपा ने अपने संकल्प के अनुसार श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त किया.</strong><br />
<strong>अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम के भव्य -दिव्य &#8211; नव्य मंदिर के प्रथम तल का निर्माण पूर्ण हो चुका है. सारे राष्ट्र का माहौल अभूतपूर्व उत्सवमय हो गया है. ऐसा लग रहा है मानो ब्रम्हाण्ड के सारे चांद सूरज और तारे अयोध्या में उतर आए हैं. जो धुन अयोध्या में गूंज रही है वह सारे राष्ट्र में गुंजायमान हो रही है. उत्तर से दक्षिण पूर्व से पश्चिम सारा वातावरण राम की भक्ति से सराबोर है.</strong><br />
<strong>देश के साधक, तपस्वी, यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तन,मन धन, चित्त, वित्त हित शुद्धि के लिए विगत ग्यारह दिनों से अनुष्ठान पर हैं. जब नेतृत्व अपने आचरण से देश के अध्यात्म, संस्कृति , नैतिक मूल्य व परम्पराओं के प्रति अपनी श्रद्धा प्रगट करता है, तो जनता में जागृति का आना भी स्वाभाविक है. इसलिए मुझे कहने से संकोच नहीं है कि मोदी न होते तो राम ठाठ से नहीं टाट पर होते ,अयोध्या सजती नहीं वरन् गुमसुम ही रहती. भगवान श्रीराम हमारे आस्था के केंद्र हैं उनके मंदिर निर्माण के मार्ग को चंद असुरो द्वारा अटकाया, लटकाया और भटकाया गया. उनके ऊपर लगे दागों को धोने का यह सुअवसर है कि वे भी रामभक्ति में निस्वार्थ भाव से लीन होकर &#8220;राष्ट्र के सांस्कृतिक स्वाधीनता दिवस&#8221; के उत्सव में शामिल हो जाये.।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
