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		<title>पॉलीथिन पर्यावरण के लिये बड़ी चुनौती बन रही है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dainik Yashonnati]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Apr 2024 17:10:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पॉलीथिन पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. पॉलीथिन बैग पर्यावरण में सबसे ज़्यादा फैलते हैं और इनके विघटन की दर बहुत धीमी होती है. पॉलीथिन बैग मिट्टी में बने रहते हैं, मिट्टी की उर्वरता को कम करते हैं और पानी के रिसाव को रोकते हैं. पॉलीथिन के उपयोग से पानी, हवा, मिट्टी जैसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5 style="text-align: center;"><span style="color: #008080;"> पॉलीथिन पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. पॉलीथिन बैग पर्यावरण में सबसे ज़्यादा फैलते हैं और इनके विघटन की दर बहुत धीमी होती है. पॉलीथिन बैग मिट्टी में बने रहते हैं, मिट्टी की उर्वरता को कम करते हैं और पानी के रिसाव को रोकते हैं. पॉलीथिन के उपयोग से पानी, हवा, मिट्टी जैसे प्राकृतिक कारक प्रदूषित हो रहे हैं। पॉलीथिन को जलाकर नष्ट करने पर CO2 और CO जैसी गैसें उत्पन्न होती हैं. पॉलीथिन के रसायन आस-पास के परिवेश में घुलने लगते हैं. यह समय के साथ और छोटे-छोटे घटकों में टूटती जाती है और हमारी खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करती है. पॉलीथिन बैग जीवों के लिए भी बहुत खतरनाक हैं, क्योंकि अगर इनका सेवन किया जाए तो ये पाचन तंत्र में रह सकते हैं और बीमारियों का कारण बन सकते हैं. पॉलीथिन बैग को पुनर्चक्रित करना कठिन और महंगा है और अधिकांश लैंडफिल साइटों पर पहुंच जाते हैं जहां उन्हें फोटोडिग्रेड होने में लगभग 300 साल लग जाते हैं । </span>           <strong>एआई</strong></h5>
<h2><a href="https://dainikyashonnati.com/polythene-is-becoming-a-big-challenge-for-the-environment/polithin-2/" rel="attachment wp-att-12798"><img decoding="async" class="aligncenter size-large wp-image-12798" src="https://dainikyashonnati.com/wp-content/uploads/2024/04/polithin-2-1024x768.jpg" alt="पॉलीथिन पर्यावरण के लिये बड़ी चुनौती बन रही है - Seoni News" width="755" height="566" title="पॉलीथिन पर्यावरण के लिये बड़ी चुनौती बन रही है | Dainik Yashonnati"></a><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>पॉलीथिन का उपयोग निरंतर बढ़ते ही जा रहा है</strong></span></h2>
<p><strong>सिवनी यशो:- कागज के पुड़े बनाना बेरोजगारों को क्षेत्रीय स्तर पर एक रोजगार हुआ करता था, अनेक कामकाजी महिलाएँ घरों कागज के अलग अलग वजन के हिसाब से पुड़े बनाने का काम करती थी परंतु पिछले कुछ दशको में ही पालीथिन ने बाजार में ऐसा कब्जा जमा लिया कि पुड़े मार्केट से गायब हो गये और उपभोक्ता तथा दुकानदार दोनों को पालीथिन बेहद सुविधाजनक लगने लगी । हालांकि यहाँ बता दें कि पॉलीथीन (पीई) की खोज साल 1933 में रेजिनाल्ड गिब्सन और एरिक फ़ॉसेट ने की थी । तब इसके अविष्कारक को भी ऐसा ही लगा था कि पालीथिन बहुत उपयोगी सिद्ध होगी परंतु उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसका इतना अधिक उपयोग होगा कि यह पर्यावरण के लिये बड़ी समस्या का कारण बन जायेगी । आज पालीथिन पर आम आदमी इतना अधिक आश्रित हो गया है कि उसका इसके बिना काम नहीं चलना मुश्किल हो गया परंतु पालीथिन बहुत अधिक उपयोगी होने के साथ बेहद सस्ती होने से इसका दुरूपयोग हो रहा है यह आज युज एंड थ्रो के रूप में उपयोग हो रही है और यह अब बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है । </strong><br />
<strong>आज कचरे के रूप में पालीथिन का ही कचरा बहुत अधिक मात्रा में होता है । सब जानते है पॉलीथिन कभी नष्ट नहीं होती मवेशियों को इससे जान का खतरा रहता है पॉलीथिन से पर्यावरण को नुकसान होता है नालियां चोक हो जाती है। पेय पदार्थ पॉलीथिन में रखने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है ।</strong></p>
<h2>
<span style="color: #000080;"><strong>पर्यावरण को खतरा</strong></span></h2>
<p><strong>इसी तरह लोग सार्वजनिक कार्यक्रमों में डिस्पोजल पॉलीथिन का उपयोग करते है लेकिन लोग नही जानते कि शहर में अमानक पॉलीथिन और डिस्पोजल का उपयोग प्रतिबंधित है, 40 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन के उपयोग को प्रदूषण बोर्ड ने पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया है। प्लास्टिक बैग सामान्यत: पोलीप्रोपलाईन से बने होते हैं, जो कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से बनता है. यह दोनों ही अनवकरणीय जीवाश्म ईंधन है, और इनके निष्कर्षण से ग्रीन हाउस गैसें उत्पन्न होती है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है. </strong></p>
<h2>
<span style="color: #000080;"><strong>व्यवसायी नहीं आ रहे बाज</strong></span></h2>
<p><strong>आम तौर पर शहर की सड़कों की गलियों में पॉलीथिन पड़ी रहती है इससे नालियां भी चोक हो रही है, हाथ ठेले हो या दुकान सभी जगह पॉलीथिन का उपयोग जारी है शहर में डिस्पोजल का उपयोग बढ़ता जा रहा है चाहे चाय नाश्ते की हॉटल हो या पेय पदार्थ पॉलीथिन में देने से व्यवसायी बाज नहीं आ रहे है।</strong></p>
<h2>
<span style="color: #0000ff;"><strong>समय समय पर हो कार्यवाही</strong></span></h2>
<p><strong>हालात यह है कि बच्चो के कुरकुरे चिप्स, से लेकर दैनिक उपयोग के जीरे मिर्च, शक्कर जैसी सामग्री तक अब उपभोक्ता पॉलीथिन मे ले जाते है, और उपयोग के बाद उसे सड़कों पर फेंक रहे है जो चिंता का विषय है। इसे रोकने के लिए समाज के बीच जागरूकता और संकल्पित भाव पैदा करना होगा । पालीथिन का उपयोग नहीं अब दुरूपयोग हो रहा है और जिस तरह पालीथिन युज एंड थ्रो के रूप में उपयोग हो रही है, यह क्रम बहुत बड़े भू भाग को बंजर बनाने के लिये, पालतू पशुओं को मौत के आगोश में लेने के लिये काफी है । इसे रोकने के लिये उन आवश्यक है कि हम अपने घर से निकले तो साथ मे कपड़े का थैला लेकर निकले तथा जो वस्तुएँ कंपनियों द्वारा पालीथिन में बेची जा रही है उनका विरोध करना प्रारंभ करें । वर्तमान समय में तेल, दूध,घी, मसाले अनाज सहित अधिकांश पैक वस्तुएँ पालीथिन में पैक होकर आ रही है । सरकार को इस दिशा में कठोर कदम उठाना चाहिये और पालीथिन के उपयोग को कम करना चाहिये ।</strong></p>
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