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	<title>Seoni CMO &#8211; Dainik Yashonati</title>
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		<title>सिवनी नगर पालिका में कौन बचा रहा है दागी CMO को? EOW FIR के बाद भी कुर्सी बरकरार, सक्षम अधिकारी को प्रभार क्यों नहीं?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Dainik Yashonnati]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Aug 2026 13:36:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सिवनी]]></category>
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					<description><![CDATA[सिवनी नगर पालिका CMO दिशा डेहरिया पर EOW FIR, प्रभार पर उठे सवाल Seoni 13 August 2026 सिवनी यशो:- सिवनी नगर पालिका परिषद में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल विकास, सफाई या राजस्व का नहीं, बल्कि एक विवादित प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी की कुर्सी और उसे बचाने वाले तंत्र का बन गया है। सवाल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3 style="text-align: right;"><span style="color: #003366;"><strong>सिवनी नगर पालिका CMO दिशा डेहरिया पर EOW FIR, प्रभार पर उठे सवाल</strong></span></h3>
<p><strong>Seoni 13 August 2026</strong><br />
<strong>सिवनी यशो:- सिवनी नगर पालिका परिषद में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल विकास, सफाई या राजस्व का नहीं, बल्कि एक विवादित प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी की कुर्सी और उसे बचाने वाले तंत्र का बन गया है।</strong></p>
<p><strong>सवाल सीधा है—जिस अधिकारी के विरुद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में FIR दर्ज की है, जिसके खिलाफ अलग-अलग नगर निकायों में गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सरकारी स्तर पर पत्राचार और प्रतिवेदन तलब किए गए हैं, क्या उसे प्रथम श्रेणी की नगर पालिका के महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक पद का प्रभार दिया जाना चाहिए?</strong></p>
<p><strong>और इससे भी बड़ा सवाल—जब हाईकोर्ट से स्थगन लेकर आए विशाल मर्सकोले के पास संबंधित पद का प्रभार संभालने की पदीय पात्रता होने का दावा किया जा रहा है, तो आखिर उन्हें प्रभार दिलाने में किसकी दिलचस्पी नहीं है?</strong></p>
<p><strong>सिवनी में अब यही सवाल गलियों से निकलकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गया है।</strong></p>
<h3><span style="color: #003366;"><strong>EOW की FIR कोई राजनीतिक आरोप नहीं, सरकारी जांच का दस्तावेज है</strong></span></h3>
<p><strong>दिशा डेहरिया के खिलाफ सबसे गंभीर मामला आय से अधिक संपत्ति का है। उपलब्ध NCRB/IIF-I दस्तावेज के अनुसार आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच के बाद उनके विरुद्ध अपराध क्रमांक 15/2025, दिनांक 28 जनवरी 2025 दर्ज किया गया।</strong></p>
<p><strong>FIR में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) का उल्लेख है।</strong></p>
<p><strong>EOW की जांच में 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2024 तक का चेक पीरियड निर्धारित किया गया था। जांच दस्तावेज में कुल वैधानिक आय ₹63,16,477 और कुल व्यय ₹1,37,91,216 बताया गया।</strong></p>
<p><strong>जांच अधिकारी की गणना के अनुसार ₹74,74,739 का अंतर सामने आया, जिसे दस्तावेज में वैधानिक आय से लगभग 220 प्रतिशत अधिक बताया गया है।</strong></p>
<p><strong>यही वह बिंदु है जहां सिवनी की जनता का सवाल और तल्ख हो जाता है—</strong></p>
<h5 style="text-align: center;"><span style="color: #003366;"><strong><mark>दिशा डेहरिया पर EOW FIR</mark> के बाद भी क्या प्रथम श्रेणी नगर पालिका का वित्तीय प्रभार सामान्य प्रशासनिक मामला मान लिया जाए?</strong></span></h5>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>संपत्तियों का ब्यौरा भी जांच दस्तावेज में दर्ज</strong></span></h3>
<p><strong>EOW के दस्तावेज में छिंदवाड़ा में दो निर्मित मकानों की खरीद का उल्लेख है। एक संपत्ति वर्ष 2018 में लगभग ₹27.57 लाख और दूसरी वर्ष 2023 में लगभग ₹48.29 लाख में खरीदे जाने का विवरण है।</strong></p>
<p><strong>दस्तावेज में ₹30 लाख के बैंक ऋण, परिवार के सदस्यों के नाम संपत्तियों, दुकान और वाहनों का भी उल्लेख किया गया है।</strong></p>
<p><strong>EOW जांच दस्तावेज में आगे अन्य संपत्तियों, आभूषणों और निवेश की संभावना से इनकार नहीं किए जाने तथा तलाशी की आवश्यकता का भी उल्लेख है।</strong></p>
<p><strong>यानी मामला केवल किसी विरोधी नेता की शिकायत तक सीमित नहीं है। यहां सरकारी जांच एजेंसी द्वारा दर्ज FIR और उसकी जांच का दस्तावेज मौजूद है।</strong></p>
<h3><span style="color: #003300;"><strong>बालाघाट का अध्याय भी कम गंभीर नहीं</strong></span></h3>
<p><strong>दिशा डेहरिया के खिलाफ उपलब्ध शिकायत दस्तावेजों में बालाघाट नगर पालिका से जुड़े कई गंभीर आरोप दर्ज हैं।</strong></p>
<p><strong>सबसे चर्चित आरोप श्रीमती माधुरी खोबरागढ़े की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जनवरी 2024 में प्रभारी CMO रहते हुए नियम विरुद्ध नियुक्ति की गई और इसके लिए ₹10 लाख की कथित रिश्वत ली गई।</strong></p>
<p><strong>इस मामले को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास के संयुक्त संचालक, जबलपुर संभाग ने 30 जनवरी 2025 को समय-सीमा वाला स्मरण पत्र जारी किया था। पत्र में तथ्यात्मक प्रतिवेदन और संबंधित अभिलेख तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।</strong></p>
<p><strong>इससे भी पहले संभागायुक्त कार्यालय द्वारा 28 जनवरी 2025 को संबंधित मामले में जांच प्रतिवेदन के लिए पत्र जारी किए जाने का दस्तावेज उपलब्ध है।</strong></p>
<h4><span style="color: #003366;"><strong>आठ महीने तक रिपोर्ट नहीं आई तो संभागायुक्त कार्यालय ने जताई नाराजगी</strong></span></h4>
<p><strong>संभागायुक्त कार्यालय के पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि पूर्व में जांच प्रतिवेदन मांगा गया था, लेकिन करीब आठ माह बाद भी रिपोर्ट नहीं भेजी गई। संबंधित अधिकारी को जांच प्रतिवेदन के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।</strong></p>
<p><strong>यह सवाल यहीं से उठता है—</strong></p>
<p><strong>जब सरकारी कार्यालय स्वयं किसी शिकायत पर लगातार प्रतिवेदन मांग रहा था, तो फिर ऐसे आरोपों से घिरी अधिकारी को बाद में सिवनी जैसी महत्वपूर्ण प्रथम श्रेणी नगर पालिका का प्रभार देने का निर्णय किस स्तर पर और किन आधारों पर हुआ?</strong></p>
<h3><span style="color: #993300;"><strong>1.10 करोड़ के भुगतान और जांच में कथित पक्षपात का आरोप</strong></span></h3>
<p><strong>मलाजखंड नगर पालिका से जुड़े दस्तावेज में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की निविदा और करीब ₹1.10 करोड़ के भुगतान को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।</strong></p>
<p><strong>शिकायत में एकल निविदा, भुगतान प्रक्रिया और बाद की जांच पर सवाल उठाते हुए दावा किया गया कि इस मामले की जांच में कथित रूप से पक्षपात किया गया।</strong></p>
<p><strong>इसी शिकायत में दिशा डेहरिया पर जांच के पक्ष में प्रतिवेदन देने के बदले ₹3 लाख की कथित रिश्वत लेने का आरोप भी लगाया गया है।</strong></p>
<p><strong>इन आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच अथवा न्यायालय से होना शेष है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इस मामले को लेकर पत्राचार और जांच की मांग का होना अपने आप में गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है।</strong></p>
<h3><span style="color: #003300;"><strong>38 लाख और ₹70 लाख के भुगतान पर भी उठे सवाल</strong></span></h3>
<p><strong>बालाघाट नगर पालिका की जल आवर्धन योजना के तहत भुगतान को लेकर शिकायत में ₹38 लाख की राशि के कथित अनियमित भुगतान का आरोप लगाया गया है।</strong></p>
<p><strong>एक अन्य मामले में करीब ₹70 लाख के बिलों के भुगतान को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं।</strong></p>
<p><strong>शिकायत का आरोप है कि जिन भुगतानों पर पहले आपत्ति थी, वे बाद में प्रभारी CMO के कार्यकाल में किए गए।</strong></p>
<p><strong>यदि ये आरोप गलत हैं तो संबंधित विभाग के पास फाइलें, तकनीकी रिपोर्ट, माप पुस्तिका, बिल, भुगतान स्वीकृति और बैंक रिकॉर्ड मौजूद हैं।</strong></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>फिर जांच से डर कैसा?</strong></span></h3>
<p><strong>यही वह सवाल है जिसका जवाब सिवनी के नागरिक चाहते हैं।</strong></p>
<h3><span style="color: #003366;"><strong>30 लाख की कथित हेराफेरी का आरोप भी शिकायत में</strong></span></h3>
<p><strong>शिकायत में सड़क पर व्यवसाय करने वाले हितग्राहियों के प्रशिक्षण से जुड़ी योजना में भी कथित अनियमितता का आरोप है।</strong></p>
<p><strong>शिकायतकर्ता के अनुसार बिना प्रशिक्षण कराए हितग्राहियों के नाम दर्ज किए गए और कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर करीब ₹30 लाख का भुगतान किया गया।</strong></p>
<p><strong>इस मामले में वास्तविक हितग्राहियों, उनके बैंक खातों, हस्ताक्षरों और भुगतान अभिलेखों की जांच से स्थिति साफ हो सकती है।</strong></p>
<h3><span style="color: #0000ff;"><strong>अब असली सवाल: विशाल मर्सकोले को प्रभार क्यों नहीं?</strong></span></h3>
<p><strong>पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है।</strong></p>
<p><strong>दावा किया जा रहा है कि विशाल मर्सकोले हाईकोर्ट से स्थगन आदेश लेकर आए हैं और उनके पास CMO पद का प्रभार संभालने की पदीय क्षमता है।</strong></p>
<p><strong>यदि यह स्थिति दस्तावेजों से प्रमाणित है, तो सवाल यह है कि—</strong></p>
<p><strong>जब एक ओर सक्षम अधिकारी उपलब्ध है और दूसरी ओर वर्तमान प्रभारी CMO के खिलाफ EOW की FIR तथा विभिन्न शिकायतों का रिकॉर्ड मौजूद है, तो फिर दिशा डेहरिया को ही प्रभार पर बनाए रखने की प्रशासनिक मजबूरी क्या है?</strong></p>
<p><strong>क्या यह केवल प्रशासनिक सुविधा है?</strong></p>
<p><strong>या फिर इसके पीछे कोई और कारण है?</strong></p>
<p><strong>सिवनी की जनता अब यही जानना चाहती है।</strong></p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>एक तरफ अध्यक्ष हटे, दूसरी तरफ अधिकारी पर मेहरबानी क्यों?</strong></span></h3>
<p><strong>सिवनी नगर पालिका की राजनीति में एक और विरोधाभास चर्चा का विषय बना हुआ है।</strong></p>
<p><strong>निर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष शफीक खान को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पद से हटाया गया और वर्तमान में भाजपा पार्षद ज्ञानचंद सनोडिया को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।</strong></p>
<p><strong>वहीं दूसरी ओर, दिशा डेहरिया के खिलाफ EOW FIR और अन्य शिकायतों के बावजूद उन्हें नगर पालिका के महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय पद पर बनाए रखने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।</strong></p>
<p><strong>यहां एक राजनीतिक आरोप भी सामने आया है कि शफीक खान के खिलाफ कार्रवाई में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर सवाल उठाए गए और जिम्मेदार अधिकारियों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।</strong></p>
<p><strong>इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।</strong></p>
<p><strong>लेकिन जनता का सवाल बेहद साफ है—</strong></p>
<h5><span style="color: #800000;"><strong>यदि भ्रष्टाचार के आरोप किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कुर्सी से हटाने के लिए पर्याप्त हैं, तो आर्थिक अपराध की FIR का सामना कर रहे अधिकारी के मामले में वही कठोरता क्यों नहीं दिखाई जा रही?</strong></span></h5>
<h3><span style="color: #0000ff;"><strong>किसके संरक्षण में चल रहा है खेल?</strong></span></h3>
<p><strong>सिवनी नगर पालिका अब केवल एक अधिकारी की पदस्थापना का मामला नहीं रह गया है।</strong></p>
<p><strong>यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और शासन की कथित जीरो टॉलरेंस नीति की अग्निपरीक्षा बन चुका है।</strong></p>
<p><strong>अगर</strong> <mark>दिशा डेहरिया पर EOW FIR </mark><strong>में दर्ज तथ्यों को शासन गंभीर मानता है, तो सवाल उठता है कि संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण वित्तीय अधिकारों वाले निकाय में प्रभार देने से पहले क्या इन तथ्यों की समीक्षा की गई?</strong></p>
<p><strong>अगर समीक्षा नहीं की गई तो किसने नहीं की?</strong></p>
<p><strong>अगर समीक्षा की गई तो फिर क्या निर्णय लिया गया?</strong></p>
<p><strong>और अगर निर्णय लेने के बाद भी दिशा डेहरिया को प्रभार पर बनाए रखा गया, तो उस निर्णय की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?</strong></p>
<h3><span style="color: #000000;"><strong>सिवनी पूछ रहा है—कुर्सी बड़ी है या नियम?</strong></span></h3>
<p><strong>सिवनी नगर पालिका कोई छोटा कार्यालय नहीं है। प्रथम श्रेणी के इस निकाय में करोड़ों रुपये का बजट, विकास कार्य, ठेके, भुगतान, राजस्व और सरकारी योजनाएं संचालित होती हैं।</strong></p>
<p><strong>ऐसे में CMO की कुर्सी केवल प्रशासनिक पद नहीं बल्कि बड़े वित्तीय अधिकारों और सार्वजनिक धन की निगरानी की जिम्मेदारी भी है।</strong></p>
<p><strong>इसलिए सवाल किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।</strong></p>
<p><strong>यदि दिशा डेहरिया के खिलाफ लगे आरोप निराधार हैं, तो शासन को खुली जांच कराकर उन्हें क्लीन चिट देने में देर नहीं करनी चाहिए।</strong></p>
<p><strong>और यदि आरोपों में प्रथमदृष्टया दम है, तो फिर उन्हें महत्वपूर्ण वित्तीय प्रभार पर बनाए रखने का औचित्य सार्वजनिक किया जाना चाहिए।</strong></p>
<h4><span style="color: #000080;"><strong>अब गेंद शासन के पाले में</strong></span></h4>
<p><strong>सिवनी के नागरिकों को अब भाषण नहीं, जवाब चाहिए।</strong></p>
<p><strong>EOW FIR पर सरकार का रुख क्या है?</strong></p>
<p><strong>बालाघाट और मलाजखंड की शिकायतों पर अंतिम जांच रिपोर्ट क्या है?</strong></p>
<p><strong>15 जून 2026 के आदेश में दिशा डेहरिया को सिवनी का प्रभार देने का आधार क्या था?</strong></p>
<p><strong>विशाल मर्सकोले की हाईकोर्ट से मिली राहत के बावजूद उन्हें प्रभार क्यों नहीं दिया गया?</strong></p>
<p><strong>क्या दिशा डेहरिया की पदस्थापना से पहले उनके विरुद्ध लंबित आपराधिक/विभागीय प्रकरणों की जांच की गई थी?</strong></p>
<p><strong>और सबसे बड़ा सवाल—</strong></p>
<h4><span style="color: #003366;"><strong>अगर शासन की नीति भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की है, तो सिवनी नगर पालिका में यह &#8216;डबल स्टैंडर्ड&#8217; क्यों?</strong></span></h4>
<p><strong>अब जरूरत किसी को बचाने या हटाने की नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष, दस्तावेज आधारित और समयबद्ध जांच की है।</strong></p>
<p><strong>क्योंकि सवाल एक CMO की कुर्सी का नहीं है।</strong></p>
<p><strong>सवाल उस कुर्सी से जुड़े करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन और सिवनी की जनता के भरोसे का है।</strong></p>
<h5><span style="color: #ff0000;">यह भी पढ़े :-</span></h5>
<p><a href="https://dainikyashonnati.com/questions-raised-again-on-purchase-in-barghat-district-after-pad-machine-and-solar-light-now-issue-of-purchase-of-urine-house-heated-up/">बरघाट जनपद में खरीदी पर फिर उठे सवाल: पैड मशीन और सोलर लाइट के बाद अब ‘पेशाब घर’ खरीदी का मामला गरमाया</a></p>
<p><a href="https://dainikyashonnati.com/cmo-gets-lokayuktas-assets-over-230-percent-income/">सीएमओ के पास EOW को मिली 230 प्रतिशत आय से अधिक संपत्ति</a></p>
<p><a href="https://dainikyashonnati.com/seoni-nagar-palika-lease-vivad/">सिवनी नगर पालिका लीज विवाद: पहले विरोध, अब समर्थन – करोड़ों के खेल का खुलासा!</a></p>
<p><a href="https://dainikyashonnati.com/chhindwara-eow-raid-cmo-disha-dehria-turns-out-to-be-a-millionaire/">छिंदवाड़ा ई.ओ.डब्ल्यू का छापा… करोड़पति निकली सीएमओ दिशा डेहरिया</a></p>
<p><a href="https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/seoni/mp-nagar-palika-employees-union-came-out-in-support-of-lakhnadon-cmo-in-seoni-gave-warning-of-agitation-know-reason/articleshow/112352050.cms" target="_blank" rel="noopener">https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/seoni/mp-nagar-palika-employees-union-came-out-in-support-of-lakhnadon-cmo-in-seoni-gave-warning-of-agitation-know-reason/articleshow/112352050.cms</a></p>
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