मंडलामध्यप्रदेश

जब कलेक्टर ने पीठ फेरी, जनता माँ नर्मदा के चरणों में पहुंची”

मंडला में रेलवे मांगों का अनोखा विरोध, प्रशासनिक संवेदनहीनता पर मौन तमाचा

🚆 रेल हक़ पर प्रशासन मौन क्यों?

मंडला में कलेक्ट्रेट का दरवाज़ा बंद, जनता ने माँ नर्मदा को सौंपा ज्ञापन

मंडला में रेलवे विकास की लंबित मांगों को लेकर जनसुनवाई के दिन कलेक्ट्रेट परिसर में
विशाल धरना-प्रदर्शन हुआ। कलेक्टर द्वारा ज्ञापन न लिए जाने से नाराज़ नागरिक
महिष्मती घाट पहुंचे और माँ नर्मदा को ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष समिति ने अब “मंडला बंद”, चक्का जाम और रेल रोको आंदोलन की चेतावनी दी है।

स्थान: मंडला | मुद्दा: रेलवे विकास व प्रशासनिक जवाबदेही

मंडला कलेक्ट्रेट में रेलवे विकास मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन
रेलवे मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते आंदोलनकारी

मंडला | विशेष रिपोर्ट

मंडला जिले में रेलवे विकास की वर्षों पुरानी और अत्यंत आवश्यक मांगों को लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर जनआक्रोश का केंद्र बन गया। जनसुनवाई के दिन आयोजित इस विशाल धरना-प्रदर्शन में जनता ने स्पष्ट संदेश दिया—

मंडला कलेक्ट्रेट में रेलवे विकास मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन
रेलवे मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते आंदोलनकारी

“अब आश्वासन नहीं, निर्णय चाहिए।”

रेलवे संघर्ष समिति के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं और आम नागरिकों की भारी भागीदारी रही। धरना शांतिपूर्ण था, लेकिन सवाल बेहद तीखे थे—

जब पूरा जिला सड़क पर है, तो कलेक्टर जनता से मिलने से क्यों बच रहे हैं?

कलेक्टर मौजूद, फिर भी जनता से दूरी क्यों?

धरने के उपरांत प्रतिनिधिमंडल रेल मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचा। संघर्ष समिति ने साफ कहा कि

“ज्ञापन केवल कलेक्टर महोदय को ही सौंपा जाएगा, किसी अधीनस्थ अधिकारी को नहीं।”

मंडला कलेक्ट्रेट में रेलवे विकास मांगों को लेकर विशाल धरना प्रदर्शन
रेलवे मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते आंदोलनकारी

हालांकि प्रशासन ने अन्य अधिकारियों को भेजा, लेकिन कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहने के बावजूद कलेक्टर स्वयं बाहर नहीं आए।

लंबे इंतज़ार के बाद यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासन जनता की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है।

इस रवैये से प्रदर्शनकारियों में गहरी नाराज़गी और अपमान की भावना देखी गई।

प्रशासन नहीं सुना, तो माँ नर्मदा के दरबार में रखी बात

कलेक्ट्रेट से निराश होकर आंदोलनकारी महिष्मती घाट पहुंचे और माँ नर्मदा को ज्ञापन समर्पित किया।

जनता ने प्रार्थना की कि—

“जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि और रेल मंत्रालय को सद्बुद्धि मिले, ताकि मंडला की उपेक्षा समाप्त हो।”

यह दृश्य प्रशासनिक संवेदनहीनता पर मौन आरोप-पत्र जैसा था।

 रेलवे मांगें नहीं रियायत, मंडला का हक़ हैं

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि ये मांगें कोई नई या अव्यावहारिक नहीं हैं, बल्कि मंडला जैसे आदिवासी, पर्यटन और धार्मिक महत्व वाले जिले के लिए न्यूनतम आवश्यकताएँ हैं—

मंडला फोर्ट स्टेशन को टर्मिनल बनाना, नई ट्रेनें, दोहरी रेल लाइन और अमरकंटक रेल मार्ग जैसे प्रस्ताव वर्षों से फाइलों में दबे पड़े हैं।

 अब चेतावनी नहीं, ऐलान

रेलवे संघर्ष समिति ने दो टूक कहा—

“यदि अब भी ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो अगला चरण ‘मंडला बंद’, चक्का जाम और रेल रोको आंदोलन होगा।

इस बार सिर्फ ज्ञापन नहीं, पूरा जिला सड़कों पर होगा।”

धरना शांतिपूर्वक समाप्त हुआ, लेकिन संदेश साफ है—

अब प्रशासन की चुप्पी, आंदोलन को और उग्र बनाएगी।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!