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धनौरा में अवैध शराब बिक्री के विरोध में नारी शक्ति ने उठाई आवाज, भट्टी स्थानांतरण की माँग

Seoni 13 June 2025

सिवनी यशो:- जनपद क्षेत्र धनौरा में अवैध शराब की बिक्री और इसके बढ़ते प्रभाव के विरोध में महिलाओं का आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। नशा मुक्त गाँव, सुरक्षित समाज की दिशा में कार्यरत स्थानीय नारी शक्ति संगठन ने धनौरा मुख्य चौराहे पर स्थित देशी शराब दुकान (भट्टी ) को हटाने की माँग को लेकर बड़ी संख्या में धनौरा से कलेक्ट्रेड पहुँचकर महिलाओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उक्त महिलाओं द्वारा धनौरा शराब दुकान के समक्ष तीन बार भी प्रदर्शन किया गया ।

ज्ञापन में कहा गया है कि भट्टी के चलते आस-पास का माहौल अत्यंत असुरक्षित हो गया है। शराबियों की भीड़ के कारण महिलाओं, छात्राओं और आम नागरिकों को आवागमन में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। न सिर्फ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं बढ़ी हैं, बल्कि यह स्थिति नैतिक और सामाजिक मूल्यों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है।

महिलाओं का कहना है कि:

“हमारे बच्चे, युवा और पूरे समाज का भविष्य नशे की गिरफ्त में जा रहा है। कई सड़क दुर्घटनाएं शराब के नशे में हुई लापरवाही के चलते हो चुकी हैं। गाँव में बिना लाइसेंस के शराब की आपूर्ति आम हो गई है, जिससे कच्ची और पक्की दोनों तरह की शराब का खुलेआम व्यापार हो रहा है।”

नारी शक्ति संगठन की अगुवाई में 47 पंचायतों में नशा मुक्ति अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत घर-घर जाकर महिलाओं ने शराब के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक किया।

महिलाओं ने प्रशासन से माँग की है कि:

धनौरा चौराहे पर स्थित देशी शराब दुकान को 500 मीटर दूर स्थानांतरित किया जाए।

बिना लाइसेंस शराब बिक्री एवं आपूर्ति पर सख्त कार्यवाही की जाए।विद्यालयों, मुख्य बाजार, धार्मिक स्थलों के पास स्थित शराब दुकानों को तत्काल हटाया जाए।

महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो वे भूख हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन जैसे उग्र कदम उठाने को विवश होंगी।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रही नाराजगी

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के अंतर्गत शराब दुकानें शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, एवं घनी बस्ती से कम से कम 500 मीटर दूर स्थापित की जानी चाहिए। बावजूद इसके, धनौरा में यह नियम खुलेआम तोड़ा जा रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने किया समर्थन

इस आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है ताकि गाँव की सामाजिक संरचना और महिलाओं की गरिमा की रक्षा हो सके।

Dainikyashonnati

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