गरीबी के अंधेरे से निकला उजाला: मजदूर मां का बेटा बना प्रदेश टॉपर, देवेंद्र बैरागी ने रचा इतिहास
पिता का साया नहीं, मां की मेहनत और बेटे की लगन ने लिखी सफलता की नई कहानी
देवेंद्र बैरागी 10वीं टॉपर सिवनी – गरीबी को मात देकर इतिहास रचने वाला छात्र
छींदा (सिवनी) यशो :- कहते हैं कि जहां संसाधनों की भरमार होती है, वहां भी सफलता मेहनत के अभाव में दूर हो जाती है, लेकिन जहां गरीबी और अभाव होते हैं, वहां मेहनत और लगन सफलता को अपने कदमों में झुका देती है। ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल पेश की है छींदा क्षेत्र के एक होनहार छात्र ने।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय छींदा के प्रतिभावान छात्र देवेंद्र दास बैरागी ने कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश की प्रावीण सूची में 5वां स्थान प्राप्त कर न केवल अपने विद्यालय, बल्कि पूरे जिले और क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।
संघर्ष से सफलता तक की मार्मिक कहानी
देवेंद्र की सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष, त्याग और अटूट संकल्प की कहानी है। पिता का साया सिर पर नहीं है, और उनकी मां श्रीमती आजनवती बैरागी मजदूरी कर अपने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं।
आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद देवेंद्र ने हार नहीं मानी और दिन-रात मेहनत कर वह मुकाम हासिल किया, जो कई सुविधाओं के बावजूद भी बहुत से छात्र नहीं पा पाते।
छोटे गांव भाटा से प्रदेश स्तर तक का सफर
देवेंद्र दास बैरागी, ग्राम छींदा के समीप स्थित छोटे से गांव भाटा के निवासी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन जीवन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा सफलता के रास्ते में नहीं आ सकती।
विद्यालय परिवार में खुशी की लहर
देवेंद्र की इस अभूतपूर्व सफलता पर विद्यालय परिवार में हर्ष का माहौल है। शिक्षकों ने छात्र की कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि देवेंद्र जैसे छात्र न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
प्रेरणा: हालात नहीं, हौसले तय करते हैं मंजिल
देवेंद्र की यह सफलता उन सभी छात्रों के लिए एक मजबूत संदेश है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं। यह कहानी बताती है कि अगर मेहनत, लगन और आत्मविश्वास हो, तो गरीबी भी सफलता के आगे झुक जाती है।
मजदूर मां की मेहनत और बेटे के जुनून ने मिलकर वह कर दिखाया, जो कई बार बड़े-बड़े संसाधन भी नहीं कर पाते। देवेंद्र बैरागी आज पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।





