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TET की अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली कूच, सिवनी के शिक्षकों को छिंदवाड़ा में रोका

पातालकोट एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे शिक्षकों को पुलिस ने पकड़ा, लखनवाड़ा थाने लाकर छोड़ा; नौकरी बचाने के लिए सत्याग्रह का ऐलान

TET आंदोलन: सिवनी के शिक्षकों को छिंदवाड़ा में रोका, लखनवाड़ा थाने पहुंचाया; नौकरी सुरक्षा की मांग

Seoni 29 August 2026
सिवनी यशो:-शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर देशभर में चल रही बहस अब सिवनी तक पहुंच गई है। अपनी नौकरी की सुरक्षा और सेवा शर्तों को लेकर आंदोलन की राह पर उतरे सिवनी जिले के शिक्षकों का एक समूह दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हुआ, लेकिन छिंदवाड़ा में पुलिस द्वारा उन्हें रोक लिए जाने से मामला गरमा गया।

शिक्षकों के अनुसार पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना पहुंचाया, जहां बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, उन्हें आगे दिल्ली जाने की अनुमति नहीं दी गई।

आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे किसी उग्र प्रदर्शन में शामिल होने नहीं जा रहे थे, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से दिल्ली जा रहे थे। शिक्षकों का दावा है कि देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।

नौकरी की सुरक्षा बनी आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा

शिक्षकों के अनुसार TET को लेकर बने मौजूदा नियम और न्यायालय के निर्णय के बाद लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हुई है। इसी के चलते शिक्षक संगठन केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कानूनी कदम उठाए। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे TET की अनिवार्यता के कारण वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के रोजगार पर संकट न आए।

आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से केंद्र सरकार से अध्यादेश अथवा उपयुक्त कानूनी प्रावधान लाने की मांग भी की जा रही है।

दिल्ली में प्रस्तावित है बड़ा आंदोलन

शिक्षकों के अनुसार TET के मुद्दे को लेकर दिल्ली में बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी की गई है। आंदोलन में देशभर से शिक्षक शामिल होने की बात कही जा रही है। सिवनी जिले से भी शिक्षक इसी आंदोलन में सहभागिता के लिए दिल्ली रवाना हुए थे।

बताया गया कि शिक्षक पातालकोट एक्सप्रेस से दिल्ली की ओर जा रहे थे। छिंदवाड़ा पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद उन्हें सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना लाया गया। शिक्षकों के अनुसार उन्हें बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन दिल्ली जाने की अनुमति नहीं दी गई।

पुलिस कार्रवाई को लेकर फिलहाल स्थानीय स्तर पर शिक्षकों का पक्ष सामने आया है। पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारणों अथवा हिरासत की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

 TET आंदोलन : शिक्षकों को दिल्ली जाने से रोके जाने की सूचना
सिवनी। TET की अनिवार्यता के विरोध और नौकरी की सुरक्षा की मांग को लेकर जिले के शिक्षक दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होने रवाना हुए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ शिक्षक ट्रेन से, जबकि कुछ विशेष बसों के माध्यम से दिल्ली जा रहे थे। ट्रायबल क्षेत्र के शिक्षकों के लिए दिल्ली जाने हेतु बस सुविधा उपलब्ध कराए जाने की जानकारी है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक बस को छिंदवाड़ा के आगे रोककर वापस सिवनी भेजे जाने की सूचना है।
वहीं कुछ आंदोलनकारी शिक्षकों को छिंदवाड़ा पुलिस द्वारा रोककर लखनवाड़ा थाना लाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। मामले में जानकारी लेने के लिए आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।

‘उग्र नहीं, सत्याग्रह के रास्ते पर होगा आंदोलन’

TET आंदोलन को लेकर शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करना नहीं है। आंदोलन से जुड़े पदाधिकारियों ने शिक्षकों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आंदोलन करने का आह्वान किया है।

शिक्षकों के अनुसार दिल्ली में आंदोलन को सत्याग्रह के स्वरूप में किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार के उग्र व्यवहार, तोड़फोड़ अथवा हिंसा से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

आंदोलनकारियों ने कहा है कि अपनी मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा, लेकिन रास्ता लोकतांत्रिक ही रहेगा। सत्याग्रह के दौरान ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की तैयारी है।

‘नौकरी बचाने के लिए अंतिम दम तक लोकतांत्रिक संघर्ष’

आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दी हैं। अब नौकरी की सुरक्षा को लेकर पैदा हुई स्थिति उनके लिए केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि परिवार और भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन गई है।

शिक्षकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर अंतिम स्तर तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। उनका कहना है कि सरकार से टकराव उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसा समाधान चाहते हैं जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की नौकरी—दोनों का संतुलन बना रहे।

TET आंदोलन को लेकर क्या है मामला?

TET की अनिवार्यता का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद खास तौर पर चर्चा में आया है। शीर्ष अदालत ने RTE के दायरे में आने वाले गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए TET को आवश्यक पात्रता के रूप में माना है। इसके बाद लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों और उनके संगठनों की ओर से राहत की मांग उठाई गई।

बाद की न्यायिक कार्यवाही में भी TET संबंधी व्यवस्था को लेकर शिक्षकों की ओर से पुनर्विचार की मांग की गई। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना रुख बरकरार रखते हुए अनुपालन की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई।

यही वजह है कि शिक्षकों के बीच अब भी अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है और वे केंद्र सरकार से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

25 लाख शिक्षकों का दावा, आधिकारिक आंकड़ा अलग विषय

TET आंदोलन से जुड़े शिक्षक देशभर में बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं। विभिन्न शिक्षक संगठनों की ओर से करीब 25 लाख शिक्षकों के आंदोलन से जुड़े होने की बात कही जा रही है।

हालांकि यह संख्या आंदोलनकारी संगठनों द्वारा बताई गई अनुमानित संख्या है। इसे केंद्र सरकार का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। इसलिए इस दावे को आंदोलनकारियों के हवाले से ही देखा जाना उचित होगा।

सिवनी में कार्रवाई के बाद बढ़ी हलचल

दिल्ली TET आंदोलन में शामिल होने निकले शिक्षकों को छिंदवाड़ा में रोके जाने और लखनवाड़ा थाना लाए जाने की घटना के बाद जिले में शिक्षक समुदाय के बीच चर्चा तेज हो गई है। शिक्षक इसे अपनी मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष का हिस्सा बता रहे हैं।

अब नजर इस बात पर है कि दिल्ली में प्रस्तावित आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है और TET की अनिवार्यता तथा नौकरी की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की ओर से क्या रुख सामने आता है।

फिलहाल सिवनी के आंदोलनकारी शिक्षकों का संदेश साफ है—मांग नौकरी की सुरक्षा की है, रास्ता लोकतांत्रिक होगा और संघर्ष सत्याग्रह के जरिए जारी रहेगा।

नोट

छिंदवाड़ा में शिक्षकों को रोके जाने और उन्हें लखनवाड़ा थाना लाए जाने की जानकारी आंदोलनकारी शिक्षकों के पक्ष पर आधारित है। पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर खबर में उसे भी शामिल किया जाना उचित रहेगा।

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https://www.swadeshnews.in/pradesh/tet-not-mandatory-until-scs-final-verdict/239633

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