महिला अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी से मातृ शक्ति संगठन नाराज, महिला आयोग से कार्रवाई की मांग
कर्तव्य पर तैनात शासकीय महिलाओं के सम्मान का मामला गरमाया, अध्यक्ष सीमा चौहान बोलीं—असहमति का अधिकार है, अपमान की छूट नहीं
महिला अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी से मातृ शक्ति नाराज, आयोग से कार्रवाई की मांग
Seoni, 13 September 2026
सिवनी यशो:- शासकीय दायित्वों का निर्वहन कर रही महिला अधिकारी एवं कर्मचारियों के प्रति किसान नेता द्वारा की गई कथित अभद्र एवं आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मातृ शक्ति संगठन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसकी घोर निंदा की है। संगठन ने मामले में महिला आयोग से संज्ञान लेकर तथ्यों की जांच और नियमानुसार उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
मातृ शक्ति संगठन का कहना है कि संबंधित महिला अधिकारी एवं कर्मचारी किसी व्यक्तिगत विवाद का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि अपने शासकीय उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर रही थीं। ऐसे में ड्यूटी पर तैनात महिलाओं को अपमानजनक अथवा अशोभनीय शब्दों से संबोधित करना उनकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ शासकीय सेवा में कार्यरत महिलाओं के मनोबल और कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाला व्यवहार है।
संगठन की अध्यक्ष सीमा चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी प्रशासनिक निर्णय या कार्यप्रणाली पर असहमति व्यक्त करने का अधिकार प्रत्येक नागरिक को है, लेकिन असहमति और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के बीच स्पष्ट मर्यादा है। किसी अधिकारी के पद, निर्णय अथवा कार्यप्रणाली से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसके आधार पर व्यक्तिगत अथवा अशोभनीय टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ प्रशासन, पुलिस, सेना, न्यायपालिका और शासन-व्यवस्था सहित प्रत्येक क्षेत्र में पूरी निष्ठा और साहस के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ऐसे में कर्तव्य पर तैनात महिला कर्मचारियों एवं अधिकारियों का सम्मान और मनोबल बढ़ाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
‘नारी सम्मान नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए’
मातृ शक्ति संगठन ने कहा कि नारी सम्मान केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सार्वजनिक जीवन और दैनिक व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों से समाज संयमित, जिम्मेदार और मर्यादित भाषा की अपेक्षा करता है।
संगठन ने कथित टिप्पणी को महिला सम्मान, सामाजिक मर्यादा और शासकीय महिला कर्मचारियों के मनोबल के प्रतिकूल बताते हुए महिला आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेने, तथ्यों की जांच कराने तथा नियमानुसार उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
मातृ शक्ति संगठन ने स्पष्ट कहा—
“महिलाएं जब राष्ट्र निर्माण के लिए अपने कर्तव्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हों, तब उनके सम्मान की रक्षा करना केवल महिलाओं की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।”
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