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सोशल मीडिया पर नाबालिगों के अकाउंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का स्वागत

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वीमेन चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था को बताया जरूरी

सोशल मीडिया पर नाबालिगों के अकाउंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का स्वागत

Seoni, 30 September 2026
सिवनी यशो: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों के अकाउंट और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वीमेन चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट ने स्वागत किया है। इस संबंध में कार्यक्रम समन्वयक जिला सिवनी संजय मिश्रा के द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बच्चों को ऑनलाइन शोषण और डिजिटल खतरों से बचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों के अनुरूप संचालित किया जाना आवश्यक है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे वैधानिक प्रावधानों पर विचार करने को कहा है, जिनके माध्यम से नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। संगठन ने न्यायालय के इस रुख का स्वागत करते हुए इसे बाल अधिकारों की ऑनलाइन सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस (JRC) की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नाबालिगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाने की मांग की गई थी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नाबालिगों में अनुबंध करने की कानूनी क्षमता नहीं होने के कारण ऑनलाइन सेवाओं तक उनकी पहुंच को लेकर विशेष सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।

कार्यक्रम निदेशक दीप्ति दिवान के हवाले से विज्ञप्ति में कहा गया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत के कानूनों का उल्लंघन न करें। आज ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने कई तरह के खतरे मौजूद हैं। नाबालिगों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण, ट्रैफिकिंग और सेक्सटॉर्शन जैसी गतिविधियों में फंसाया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों के निजी डेटा के दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसे खतरे भी सामने आते हैं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर अभिभावकों, संस्थाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म सभी को जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है। संगठन के अनुसार, प्रभावी नियम और उनके पालन की व्यवस्था से बच्चों को ऑनलाइन शोषण तथा अन्य डिजिटल जोखिमों से बचाने में मदद मिल सकती है।

विज्ञप्ति में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि न्यायालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा के पालन की आवश्यकता पर विचार किया है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने केंद्र सरकार से इंटरमीडियरी नियमों के तहत आवश्यक निर्देशों को शामिल करने पर विचार करने को कहा। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने की बात कही।

संजय मिश्रा, कार्यक्रम समन्वयक जिला सिवनी, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वीमेन चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट के द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि संगठन बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े डिजिटल मुद्दों को भी गंभीरता से उठाया जा रहा है।

विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वीमेन चाइल्ड एंड यूथ डेवलपमेंट, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस का सहयोगी संगठन है तथा बाल अधिकारों के संरक्षण को लेकर विभिन्न स्तरों पर अभियान संचालित कर रहा है।

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