कलकुही घाट राख के गुबार में तब्दील, फ्लाई ऐश से भरा हाइवा पलटने के बाद मचा हड़कंप
सड़क और आसपास फैली राख, हवा में उड़ते रहे गुब्बार; ओवरलोड परिवहन और सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
कलकुही घाट पर फ्लाई ऐश से भरा हाइवा पलटा, ओवरलोड परिवहन पर उठे सवाल
Seoni 03 October 2026
सिवनी /घंसौर यशो:- बरेला स्थित झाबुआ पावर प्लांट से निकलने वाले भारी वाहनों की आवाजाही के बीच 1 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 8 से 8:30 बजे के बीच कलकुही घाट पर फ्लाई ऐश से भरा एक हाइवा पलट गया। हादसे के बाद वाहन में भरी राख सड़क और आसपास के क्षेत्र में फैल गई तथा हवा में राख के गुबार उठने लगे। घटना ने फ्लाई ऐश परिवहन में अपनाई जा रही व्यवस्था, वाहनों की क्षमता और निगरानी तंत्र को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया गया कि हाइवा क्रमांक एमपी 09 एचएच 9364 फ्लाई ऐश लेकर जबलपुर की ओर जा रहा था। कलकुही घाट के पास वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन के पलटते ही उसमें भरी राख सड़क किनारे और आसपास फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कुछ समय के लिए मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और राख उड़ने से आसपास का वातावरण धूलमय हो गया।
फ्लाई ऐश कचरा नहीं, उपयोगी औद्योगिक सामग्री; लेकिन सुरक्षित प्रबंधन जरूरी
फ्लाई ऐश का उपयोग केवल अपशिष्ट के रूप में निस्तारण तक सीमित नहीं है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत फ्लाई ऐश मिशन/फ्लाई ऐश यूनिट की पहल के तहत इसके लाभकारी उपयोग और उचित प्रबंधन के लिए विभिन्न तकनीकों को विकसित किए जाने पर जोर दिया गया है।
फ्लाई ऐश में विभिन्न ऑक्साइड पाए जाते हैं और इसका उपयोग निर्माण सहित अनेक क्षेत्रों में कच्चे माल के रूप में किया जा सकता है। फ्लाई ऐश ईंटों, ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री में इसके उपयोग को भी बढ़ावा दिया गया है। एनबीसीसी सहित विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों के उपयोग के उदाहरण सामने आते हैं।
यानी फ्लाई ऐश का उपयोग अपने आप में समस्या नहीं है। असल सवाल उसके परिवहन, भंडारण और उपयोग के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था का है। कलकुही घाट की घटना इसी पहलू की जांच की जरूरत को सामने लाती है।
300 किलोमीटर के दायरे में फ्लाई ऐश आधारित निर्माण सामग्री के उपयोग का प्रावधान
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी प्रावधानों में थर्मल पावर प्लांट से 300 किलोमीटर के दायरे में होने वाले निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। इनमें फ्लाई ऐश ईंटें, ब्लॉक, टाइल्स तथा अन्य फ्लाई ऐश आधारित निर्माण सामग्री शामिल हैं।
ऐसे में फ्लाई ऐश का संयंत्र से विभिन्न निर्माण परियोजनाओं तक परिवहन स्वाभाविक रूप से आवश्यक है। लेकिन इस परिवहन के दौरान वाहन की निर्धारित क्षमता, सुरक्षित लोडिंग, दस्तावेज, मार्ग सुरक्षा और राख को फैलने से रोकने की व्यवस्था का पालन होना भी महत्वपूर्ण है।
हादसे के बाद पहुंची जेसीबी, हटाया गया दुर्घटनाग्रस्त हाइवा
दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाने के लिए जेसीबी क्रमांक एमपी 20 जेड डी 2823 को मौके पर पहुंचाया गया। इसके बाद वाहन को हटाने की कार्रवाई की गई।
हालांकि, हादसे के बाद वाहन हटाने की व्यवस्था तत्काल कर दी गई, लेकिन इससे फ्लाई ऐश लेकर चलने वाले भारी वाहनों की निर्धारित क्षमता, परमिट, दस्तावेज, सुरक्षित परिवहन और नियमित जांच को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
ओवरलोडिंग की जांच हुई थी या नहीं?
स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि दुर्घटनाग्रस्त हाइवा निर्धारित क्षमता से अधिक फ्लाई ऐश लेकर चल रहा था, तो उसकी जांच किस स्तर पर हुई थी?
हालांकि इस घटना के आधार पर ओवरलोडिंग अथवा किसी अधिकारी-कर्मचारी की मिलीभगत की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दुर्घटना ने संबंधित परिवहन व्यवस्था की जांच की जरूरत जरूर पैदा कर दी है।
प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि वाहन में वास्तविक रूप से कितनी मात्रा में फ्लाई ऐश थी, वाहन की स्वीकृत क्षमता कितनी थी, उसका वास्तविक वजन कितना था और उसके पास परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एवं अनुमति मौजूद थी या नहीं।
भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क सुरक्षा पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरेला क्षेत्र से होकर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क पर बढ़ते दबाव और सड़क की स्थिति को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
ऐसे में कलकुही घाट पर फ्लाई ऐश से भरे हाइवा के पलटने की घटना ने भारी वाहनों के संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन करे जांच, सामने आए वास्तविक स्थिति
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि 1 अक्टूबर को कलकुही घाट पर हुई घटना की जांच करते हुए दुर्घटनाग्रस्त हाइवा की लोड क्षमता, वास्तविक वजन, परिवहन दस्तावेज, फ्लाई ऐश के स्रोत एवं गंतव्य तथा संबंधित अनुमति-पत्रों की जांच की जाए।
इसके साथ ही बरेला से जबलपुर की ओर नियमित रूप से जाने वाले फ्लाई ऐश वाहनों की भी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
फ्लाई ऐश के उपयोग को सरकार द्वारा निर्माण एवं अन्य क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है, ऐसे में उसका सुरक्षित और नियमसम्मत परिवहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कलकुही घाट की घटना इसी व्यवस्था की जमीनी निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस घटना को केवल एक सड़क दुर्घटना मानकर छोड़ता है या फ्लाई ऐश परिवहन की पूरी व्यवस्था की जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है।
यह भी पढ़े :-
रेड स्टार क्लब की शानदार जीत, सिवनी इलेवन को 4-0 से दी करारी शिकस्त
महंगे शौक पूरे करने रेंट पर कार ली, नंबर प्लेट बदली और छिंदवाड़ा में कर दी चेन स्नैचिंग
कान्हीवाड़ा में सेवा संकल्प अभियान के तहत आंगन मिलन कार्यक्रम आयोजित
आज गांधी-शास्त्री जयंती मनाएगी कांग्रेस, जिला-ब्लॉक मुख्यालयों पर होंगे कार्यक्रम



