39.85 लाख की वसूली, FIR और कार्रवाई पर हाईकोर्ट का स्टे! शिकारा पंचायत मामले में अब सामने आएगी पूरी तस्वीर
जिला पंचायत के आदेश के बाद कार्रवाई पर सवाल; जनपद सीईओ आकाश जैन बोले—‘स्टे निरस्त कराने कोर्ट में दिया आवेदन’, कार्यालय दिवस में कोर्ट आदेश और जवाब की प्रति देने की बात
39.85 लाख वसूली की कार्रवाई हाईकोर्ट स्टे से अटकी, शिकारा पंचायत मामला
Seoni 03 October 2026
सिवनी घंसौर यशो:- जनपद पंचायत घंसौर की ग्राम पंचायत शिकारा में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब जिला पंचायत के आदेश, हाईकोर्ट के स्थगन आदेश और उसके बाद की कार्रवाई के बीच उलझा हुआ है। जिला पंचायत सिवनी ने मामले में पुलिस प्रकरण दर्ज कराने, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई तथा 39,85,835 की राशि की वसूली के निर्देश दिए हैं। वहीं जनपद पंचायत घंसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश जैन के अनुसार संबंधितों ने हाईकोर्ट से स्टे प्राप्त किया है और उसे निरस्त कराने के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अनियमितताओं की शिकायत शिकारा ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 5 के पंच शेख निजाम मंसूरी द्वारा की गई थी। शिकायत के बाद मामले में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
जिला पंचायत ने दिए थे FIR और प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश
जिला पंचायत सिवनी के आदेश पत्र क्रमांक 1655, दिनांक 13 जुलाई 2026 में ग्राम पंचायत शिकारा में प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितता पाए जाने के मामले में तत्कालीन रोजगार सहायक एवं प्रभारी सचिव अजय डेहरिया के विरुद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे।
इसके साथ ही संबंधित बीसी आवास, उपयंत्री और पंचायत समन्वय अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश सामने आने के बाद सवाल उठा कि आखिर इन निर्देशों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
39.85 लाख की वसूली का आदेश भी
मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी के 2 जुलाई 2026 के आदेश क्रमांक 1446/1447 में 39,85,835 की राशि की वसूली के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है।
आदेश में निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं होने की स्थिति में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई तथा राजस्व नियमों के अनुसार वसूली की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है—इतनी बड़ी राशि की वसूली के आदेश के बाद वसूली की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंची?
सीईओ बोले—हाईकोर्ट से स्टे है, निरस्तीकरण के लिए आवेदन दिया
जनपद पंचायत घंसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश जैन ने कार्रवाई में देरी के संबंध में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधितों ने जिला पंचायत के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया है।
उन्होंने बताया कि इस स्टे को निरस्त कराने के लिए उनके द्वारा न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है और स्टे निरस्त होने के बाद ही कार्रवाई संभव होगी।
इस संबंध में सीईओ ने कार्यालय दिवस में हाईकोर्ट के आदेश की प्रति तथा उनके द्वारा न्यायालय में दिए गए जवाब की प्रति उपलब्ध कराने की बात भी कही है।
अब इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाईकोर्ट ने किन बिंदुओं पर और किस सीमा तक स्थगन दिया है तथा विभाग ने न्यायालय के समक्ष अपना क्या पक्ष रखा है।
शिकायतकर्ता कौन और शिकायत पर क्या हुआ?
शिकारा ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 5 के पंच शेख निजाम मंसूरी द्वारा पंचायत में कथित अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद मामले की जांच की गई और उसके आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई के आदेश सामने आए।
अर्थात मामला केवल किसी बाहरी शिकायत या आरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायत के बाद जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया विभागीय स्तर पर आगे बढ़ी है।
अब विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले न्यायालयीन दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट होगा कि वर्तमान में कार्रवाई किस कानूनी स्थिति में है।
अब चार सवालों के जवाब का इंतजार
मामले में फिलहाल चार प्रमुख सवाल बने हुए हैं—
पहला— हाईकोर्ट ने किस आदेश के तहत स्टे दिया और उसका दायरा क्या है?
दूसरा— जिला पंचायत के FIR और प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश पर स्टे का प्रभाव कितना है?
तीसरा— 39,85,835 की वसूली की प्रक्रिया किस स्तर पर है?
चौथा— स्टे निरस्त कराने के लिए जनपद पंचायत की ओर से दायर आवेदन पर न्यायालय में अब तक क्या प्रगति हुई है?
इन सवालों के जवाब हाईकोर्ट के आदेश और जनपद सीईओ द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत जवाब की प्रति सामने आने के बाद ज्यादा स्पष्ट हो सकेंगे।
अब दस्तावेजों से साफ होगी कार्रवाई की दिशा
शिकारा पंचायत मामले में एक ओर जिला पंचायत के आदेशों में FIR, प्रशासनिक कार्रवाई और 39.85 लाख की वसूली के निर्देश हैं, तो दूसरी ओर संबंधितों द्वारा हाईकोर्ट से स्टे लिए जाने की बात सामने आई है।
वहीं शिकायतकर्ता शेख निजाम मंसूरी की शिकायत के आधार पर जांच और कार्रवाई जारी होने की जानकारी भी विभागीय स्तर से सामने आई है।
ऐसे में अब मामला केवल ‘कार्रवाई क्यों नहीं हुई’ तक सीमित नहीं है। असली तस्वीर यह दस्तावेज तय करेंगे कि हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया, जनपद पंचायत ने न्यायालय में क्या जवाब दिया और जिला पंचायत के आदेशों पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासन के पास क्या कानूनी रास्ता बचा है।
कार्यालय दिवस में कोर्ट के आदेश और जनपद सीईओ के जवाब की प्रति उपलब्ध होने के बाद इस मामले की अगली कड़ी और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
इनका कहना
“मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिवनी के आदेश के विरुद्ध संबंधितों ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। इस स्टे को निरस्त कराने के लिए मैंने कोर्ट में आवेदन दिया है। कोर्ट के द्वारा स्टे निरस्त करने पर ही कार्रवाई संभव है। कार्यालय दिवस में कोर्ट के आदेश की कापी एवं मेरे द्वारा कोर्ट में दिए गए जवाब की प्रति उपलब्ध करा दी जाएगी।”
— आकाश जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत घंसौर
शिकारा ग्राम पंचायत के वार्ड क्रमांक 5 के पंच शेख निजाम मंसूरी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जांच एवं कार्रवाई जारी है।
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