सरकारी जमीन बेचने के आरोपों के बावजूद महेश माधवानी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
14 जुलाई को सौंपी स्थल पंचनामा रिपोर्ट में शासकीय भूमि पर कब्जे और छोटे-छोटे भूखंड बेचने का उल्लेख; छिंदवाड़ा हल्के के पटवारी द्वारा इसी भूमि पर 4 हजार वर्गफुट प्लॉट खरीदने का भी दावा
सरकारी जमीन बेचने के आरोप, महेश माधवानी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
Chhindwara 04 October 2026
छिंदवाड़ा यशो:- शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई तब शुरू होती है, जब भूमाफिया जमीन के बड़े हिस्से को भूखंडों में बेच चुका होता है और इसके बाद बची सड़क, नाली अथवा शासकीय भूमि पर प्रशासनिक रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इससे अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने की सरकारी मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला खजरी क्षेत्र में महेश माधवानी द्वारा कथित रूप से विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी से जुड़ा सामने आया है। शिकायत के बाद जांच दल द्वारा तैयार की गई स्थल पंचनामा रिपोर्ट में शासकीय भूमि पर कब्जे तथा भूखंडों के रूप में जमीन बेचे जाने का उल्लेख होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट 14 जुलाई को शासन को सौंपे जाने के बावजूद अब तक एफआईआर नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
जांच रिपोर्ट में शासकीय भूमि पर कब्जे का उल्लेख
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खजरी हल्का पटवारी अश्विन माहोरे द्वारा शिकायत के बाद स्थल पंचनामा तैयार किया गया था। इसके बाद भूमाफिया द्वारा पटवारी पर कथित रूप से एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाए गए। विवाद के बाद पटवारी ने तहसीलदार रत्नेश ठवरे द्वारा गठित जांच दल से खुद को अलग कर लिया।
इसके बाद दो आरआई सतीश चौधरी और राजाराम सिंगोर तथा पटवारियों राहुल ठाकुर, शरद सूर्यवंशी, राजेश चौरसिया और सुनील पाल सहित अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में दोबारा स्थल जांच एवं पंचनामा तैयार किया गया।
बताया गया कि पंचनामा में शासकीय भूमि पर कब्जा पाए जाने तथा जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में बांटकर बेचे जाने का उल्लेख किया गया है।
1.288 हेक्टेयर निजी जमीन और 1.264 हेक्टेयर शासकीय भूमि का मामला
जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, खसरा नंबर 317/1/1/2/1/1/1/2/2 की करीब 1.288 हेक्टेयर भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचे जाने की बात सामने आई है। वहीं करीब 1.264 हेक्टेयर शासकीय भूमि के अंश पर कथित अतिक्रमण कर भूखंड काटकर बेचे जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित रूप से शासकीय भूमि पर कब्जा कर वहां सड़क और नाली का निर्माण कर दिया गया, जबकि संबंधित निजी भूमि का अधिकांश हिस्सा भूखंडों के रूप में बेचा जा चुका है।
14 जुलाई को पंचनामा सौंपा, फिर एफआईआर क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब जांच दल द्वारा तैयार स्थल पंचनामा 14 जुलाई को ही शासन को सौंप दिया गया था, तो इसके बाद भी कथित शासकीय भूमि कब्जे और बिक्री के मामले में आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
वर्तमान में नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि केवल नोटिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में शासकीय भूमि पर कब्जे और उसे भूखंडों के रूप में बेचने की पुष्टि हुई है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
पटवारी द्वारा इसी जमीन पर प्लॉट खरीदने का आरोप
मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि छिंदवाड़ा हल्के के एक पटवारी ने कथित रूप से इसी विवादित क्षेत्र में करीब 4 हजार वर्गफुट का प्लॉट खरीदा।
शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित पटवारी ने 4 नवंबर 2025 को पंजीयन कार्यालय में उक्त प्लॉट की रजिस्ट्री कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, जिस क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग की जांच चल रही थी, उसी क्षेत्र में राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारी द्वारा प्लॉट खरीदना जांच का विषय होना चाहिए।
शिकायत में संबंधित पंजीयन की कीमत को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि वर्तमान समय में इस क्षेत्र में जमीन की कीमत करीब 2 हजार रुपये प्रति वर्गफुट तक बताई जा रही है। ऐसे में संबंधित प्लॉट की वास्तविक स्थिति, रजिस्ट्री मूल्य, भूमि की प्रकृति और पंजीयन प्रक्रिया की भी जांच की मांग की गई है।
एक कॉलोनी का पंचनामा बनाने वाले पटवारी पर दूसरी कॉलोनी की जानकारी छिपाने का सवाल
शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि संबंधित पटवारी द्वारा दूसरी कॉलोनी के मामले में पंचनामा बनाकर प्रशासन को अवैध कॉलोनी की जानकारी दी गई, लेकिन जिस क्षेत्र में उनके द्वारा स्वयं प्लॉट खरीदे जाने का आरोप है, वहां की कथित अवैध कॉलोनी की जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं दी गई?
क्या प्लॉट खरीदने से पहले संबंधित अधिकारी से कोई अनुमति या जानकारी मांगी गई थी? यदि हां, तो उसका रिकॉर्ड क्या है? और यदि नहीं, तो राजस्व विभाग के कर्मचारी द्वारा विवादित भूमि पर प्लॉट खरीदने की परिस्थितियों की जांच किस स्तर पर होगी—इन सवालों के जवाब अब प्रशासन से मांगे जा रहे हैं।
प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं दस्तावेजी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। विशेष रूप से पंचनामा में दर्ज तथ्यों, खसरा रिकॉर्ड, भूमि की वास्तविक प्रकृति, कथित प्लॉटों की रजिस्ट्री, पंजीयन मूल्य और संबंधित पटवारी द्वारा खरीदी गई भूमि के दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
सवाल यह भी है कि यदि जांच में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और उसकी प्लॉटिंग की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कब तक आपराधिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई होगी। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
नोट: इस समाचार में महेश माधवानी और संबंधित पटवारी के विरुद्ध लगाए गए आरोप शिकायत, जांच एवं पंचनामा से जुड़े दावों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित सरकारी अभिलेख, जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से होगी।
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