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आपस में मतभेद पैदा करने वाला व्यक्ति,शंकराचार्य का भक्त नहीं हो सकता शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी

सिवनी यशो:- भारतवर्ष देवताओं के अवतरण का धरा धाम है। *संत महात्मा परमात्मा के चल- विग्रह स्वरूप हैं। सिवनी जिले की पुण्य धरा में हमारे पूज्य गुरुदेव द्वि पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने अवतार लिया । जो संतआपस में मतभेद पैदा करें ,वह अद्वैत को मानने वाले शंकराचार्य का भक्त नहीं हो सकता । उक्त आशय के प्रेरक उद्गार *पूज्य द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज* के मुखारविंद से नि:सृत हुए ।
सिवनी नगर के काली चौक स्थित *डॉ श्रीमती श्रुति / डॉ.श्री कामेश्वर अवस्थी के निवास पर* भिक्षा ( भोजन) के विनम्रआग्रह पर आप श्री पहुंचे। इस अवसर पर सतसंग प्रसंग में, महाराज श्री ने कहा की हमें धर्म का पालन तथा अधर्म का त्याग करना चाहिए । आपश्री ने कहा कि, गेरुआ वेशधारी महात्मा का सम्मान करना हमारा सनातन संस्कार है। किंतु,जो महात्मा हमारे धर्म शास्त्रों के विरुद्ध स्वतंत्र रूप से मनमाना उपदेश करें उसे नहीं मानना चाहिए। महात्मा का वेश धारण करने वाले व्यक्ति को महात्मा वेश की मर्यादा का पालन करना चाहिए एवम शास्त्र सम्मत उपदेश देना चाहिए।
महाराज श्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सनातन धर्मावलंबियो में, धर्मकर्म के प्रति रुझान बढा है। देश के पुण्य तीर्थ स्थलों, माघ मेला , कुंभ तथा मठ मंदिरों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं का जन सैलाब दिख रहा है । धर्म के प्रति बढे रुझान में संत महात्माओं के साथ ही टीवी के माध्यम से रामायण और महाभारत सीरियल का भी योगदान रहा है ।
प्रसंगवश महाराज श्री ने कहा कि, वैदिक सनातन धर्म विश्व की अनूठी जीवन पद्धति है।जिसमें चराचर विश्व की मंगल कामना का भाव निहित है। तथा प्रत्येक सनातनी के संस्कार में रची बसी है। सत्संग प्रसंग के अवसर पर, बालक *चिरंजीव गणेश अवस्थी* ने सस्वर संगीतमय भजन की प्रस्तुति कर ,पूज्य शंकराचार्य महाराज श्री का शुभआशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर, अवस्थी परिवार के वरिष्ठ पं.डॉ.श्री कृष्णा प्रसाद अवस्थी,एवं परिजन, ब्रह्मचारी राघवानंद जी, ब्रह्मचारी शारदानंद जी, श्री रवि उपाध्याय, श्री सागर उपाध्याय ,महाराज श्री के साथ पधारेअन्य ब्रह्मचारीगण , गुरु परिवार के सदस्य -योगाचार्य पं.महेंद्र मिश्रा, पं.ओमप्रकाश तिवारी, पं.प्रशांत तिवारी, पं.अरुण उपाध्याय , , श्री प्रदीप राय ,श्री गया प्रसाद ददुआ पटेल,श्री विजय तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु जनो ने उपस्थित होकर धर्मलाभ एवम दर्शन लाभ प्राप्त किया।

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