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बस स्टैंड कागज़ों में, सड़क पर चल रहा परिवहन घंसौर में नियमों की हत्या, व्यापारियों की रोज़ी बर्बाद

2007 में बना शांति नगर बस स्टैंड आज वीरान, 25–30 गरीब परिवारों की रोज़ी पर सीधा वार जनसुनवाई में फूटा आक्रोश—“बसें नहीं रुकीं तो पलायन तय”

बस स्टैंड बना, बसें नहीं रुकीं: घंसौर के व्यापारी उजड़ने की कगार पर

Seoni 10 February 2026

घंसौर यशो:-  वर्षों से सुलग रही घंसौर नगर की एक गंभीर समस्या एक बार फिर जनसुनवाई में फूट पड़ी। शांति नगर स्थित बस स्टैंड में बसों का ठहराव न होने से जुड़े मुद्दे पर व्यापारियों और आम नागरिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर के समक्ष दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो दर्जनों गरीब परिवारों का रोजगार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

जनसुनवाई में फूटा आक्रोश

जनसुनवाई के दौरान व्यापारियों और नागरिकों ने प्रशासन को अवगत कराया कि वर्षों पहले निर्मित बस स्टैंड होने के बावजूद अधिकांश बसें वहां रुक ही नहीं रही हैं। इससे जहां एक ओर सरकारी संसाधनों की खुली बर्बादी हो रही है, वहीं दूसरी ओर बस स्टैंड क्षेत्र पर निर्भर परिवार आर्थिक तबाही की ओर धकेले जा रहे हैं।

बस स्टैंड है, लेकिन उपयोग शून्य

वर्ष 2007 में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा शांति नगर क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था। यात्रियों की सुविधा के लिए यहां शुद्ध पेयजल, प्रतीक्षालय, शौचालय, दो हैंडपंप, पर्याप्त रोशनी और खुला परिसर उपलब्ध है। बावजूद इसके, आज यह बस स्टैंड लगभग वीरान पड़ा है, क्योंकि अधिकांश बसें यहां रुकने के बजाय सड़क किनारे ही यात्रियों को चढ़ा-उतार रही हैं।

बस मालिकों की मनमानी, नियम ताक पर

प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि कुछ बस मालिक और चालक अपने निजी स्वार्थ के चलते जानबूझकर बस स्टैंड में बस नहीं रोकते। सड़क किनारे सवारी भरना उन्हें आसान लगता है, लेकिन यह न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से भी सीधा खिलवाड़ है।

गरीब परिवारों पर सीधा असर

बस स्टैंड परिसर और आसपास के क्षेत्र में लगभग 25 से 30 परिवार चाय-नाश्ता, पान दुकान, होटल, जनरल स्टोर, ठेले और अन्य छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से जीवन यापन करते थे। इनमें से अधिकांश परिवार गरीबी रेखा के आसपास जीवन जी रहे हैं। बसों का ठहराव बंद होते ही इन दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही लगभग समाप्त हो चुकी है।

व्यापार 10 प्रतिशत पर सिमटा

व्यापारियों ने बताया कि पहले जहां दिनभर यात्रियों की भीड़ से दुकानें गुलजार रहती थीं, वहीं अब व्यापार महज 10 प्रतिशत पर सिमट कर रह गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई दुकानदार दुकानें बंद कर दूसरे स्थानों पर पलायन करने की तैयारी में हैं।

यात्री भी परेशान, हादसों का खतरा

इस अव्यवस्था से केवल व्यापारी ही नहीं, यात्री भी परेशान हैं। सड़क पर बस रुकते ही यात्रियों को दौड़कर बस पकड़नी पड़ती है। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक असुरक्षित स्थिति में आ जाते हैं। कई बार अफरा-तफरी में दुर्घटना की नौबत तक आ जाती है।

नियमों की खुलेआम अनदेखी

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि शासन के नियमों के अनुसार बसों का ठहराव केवल अधिकृत बस स्टैंड पर ही किया जाना चाहिए। इसके बावजूद वर्षों से नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। न तो परिवहन विभाग सक्रिय नजर आ रहा है और न ही नियम तोड़ने वाले बस मालिकों पर कोई ठोस कार्रवाई हो रही है।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी तहसीलदार, एसडीएम और अन्य अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की यह चुप्पी बस मालिकों की मनमानी को और बढ़ावा दे रही है।

प्रतिनिधिमंडल की दो टूक मांग

  • सभी बसों का ठहराव अनिवार्य रूप से शांति नगर बस स्टैंड पर कराया जाए
  • सड़क किनारे अवैध स्टॉपेज तत्काल बंद किए जाएं
  • नियम तोड़ने वाले बस मालिकों पर सख्त कार्रवाई की जाए
  • बस स्टैंड क्षेत्र के व्यापारियों को प्रशासनिक संरक्षण दिया जाए

जनता का सीधा सवाल

घंसौर की जनता आज एक ही सवाल पूछ रही है— “जब बस स्टैंड बना है, तो बसें रुकेंगी कहां?” यदि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

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